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Jind News: 21 जुलाई से एलएचबी कोच के साथ दाैड़ेगी धौलाधार एक्सप्रेस
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18जेएनडी05-जींद जंक्शन पर खड़ी धौलाधार एक्सपे्रस, जिसमें एलएचबी कोच लगाए जाएंगे। संवाद
जींद। भारतीय रेलवे ट्रेनों में अत्याधुनिक एलएचबी कोच लगाने पर जोर दे रहा है। जींद से बठिंडा रेलवे ट्रैक पर लंबी दूरी तय करने वाली 14035-36 धौलाधार एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगाए जाएंगे।
अब यात्री एलएचबी कोच में बैठकर आरामदायक सफर कर सकेंगे। इस ट्रेन का एलएचबी कोच के साथ संचालन 21 जुलाई से शुरू हो जाएगा। यात्रियों को सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। धौलााधार एक्सप्रेस सप्ताह में रविवार, बुधवार और शुक्रवार को आवागमन करती है। 12481-82 श्रीगंगानगर इंटरसिटी में यह सुविधा पहले ही मिलनी शुरू हो गई है।
दिल्ली-बठिंडा रेलमार्ग पर सभी सुपरफास्ट ट्रेनों में एलएचबी कोच लग चुके हैं, जिससे यात्रियों को सफर के दौरान पहले से बेहतर सुविधा मिलनी शुरू हो गई है। इस ट्रेन में 20 एलएचबी लगाए जाएंगे। एलएचबी कोच की यह विशेषता है कि किसी कारणवश दुर्घटना होने पर ट्रेनों के डिब्बे एक-दूसरे पर नहीं चढ़ेंगे। इससे ट्रेन की रफ्तार में भी इजाफा हुआ है और बाहर से आवाज भी पहले के मुकाबले कम आ रही है।
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बॉक्स
150 किमी तक की रफ्तार से दौड़ा सकते हैं एलएचबी
एलएचबी कोच की खासियत यह भी है कि इसमें सेंट्रल कप्लिंग होती है। इस वजह से दो बोगियों को आपस में जोड़ा जाता है। वहीं, आईसीएफ में खुद की बिजली बनाने की क्षमता है। बिजली को बैटरी में स्टोर कर लिया जाता है। इसी वजह से इस कोच की ट्रेन को 150 तक की स्पीड तक दौड़ा सकते हैं। एलएचबी कोच में बिजली के लिए इस कोच के पीछे जनरेटर कार लगा दिया जाता है। आधे में जेनरेटर लगा होता है और आधे कोच में माल लोड किया जाता है। फिलहाल जींद जंक्शन से गुजरने वाली अवध-असम, पतालकोट एक्सप्रेस, जम्मूतवी एक्सप्रेस, शरबत दा भला, नांदेड़ एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, पंजाब मेल, श्रीगंगानगर सुपरफास्ट में एलएचबी रैक लगे हुए हैं।
बॉक्स
आईसीएफ रैक और एलएचबी में क्या है अंतर
एलएचबी रैक जर्मन तकनीक है, जो अधिकतर तेज रफ्तार वाली ट्रेनों में इस्तेमाल की जाती है। एलएचबी रैक पुराने आइसीएफ रैक से काफी आरामदायक होते हैं। एलएचबी रैक में डबल सस्पेंशन होता है, जबकि आईसीएफ में ऐसा नहीं होता है। एलएचबी में एक्स्ट्रा सस्पेंशन भी दिया गया है। एलएचबी को आईसीएफ रैक के मुकाबले दोगुने समय तक मरम्मत करने की आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा आईसीएफ रैक में एयर ब्रेक का प्रयोग होता है। इससे ब्रेक लगाने पर ट्रेन काफी दूर जाकर रुकती है, जबकि एलएचबी में डिस्क ब्रेक का प्रयोग होता है। आईसीएफ के सस्पेंशन से 70 डेसीबल की आवाज आती है। इसलिए ट्रेन चलने के दौरान कई सारी आवाज सुनने को मिलती हैं, जबकि एलएचबी में 60 डेसीबल तक की आवाज होती है जो आरामदायक भी है और आवाज भी कम करता है।
वर्जन
जींद से गुजरने वाली 14035-36 धौलाधार एक्सप्रेस में एलएचबी रैक कोच लगाए जाएंगे। इससे पहले 12481-82 श्रीगंगानगर इंटरसिटी में यह सुविधा शुरू करवा दी थी। 21 जुलाई से यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
-अजय माइकल, पीआरओ, डीआरएम दिल्ली
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अब यात्री एलएचबी कोच में बैठकर आरामदायक सफर कर सकेंगे। इस ट्रेन का एलएचबी कोच के साथ संचालन 21 जुलाई से शुरू हो जाएगा। यात्रियों को सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। धौलााधार एक्सप्रेस सप्ताह में रविवार, बुधवार और शुक्रवार को आवागमन करती है। 12481-82 श्रीगंगानगर इंटरसिटी में यह सुविधा पहले ही मिलनी शुरू हो गई है।
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दिल्ली-बठिंडा रेलमार्ग पर सभी सुपरफास्ट ट्रेनों में एलएचबी कोच लग चुके हैं, जिससे यात्रियों को सफर के दौरान पहले से बेहतर सुविधा मिलनी शुरू हो गई है। इस ट्रेन में 20 एलएचबी लगाए जाएंगे। एलएचबी कोच की यह विशेषता है कि किसी कारणवश दुर्घटना होने पर ट्रेनों के डिब्बे एक-दूसरे पर नहीं चढ़ेंगे। इससे ट्रेन की रफ्तार में भी इजाफा हुआ है और बाहर से आवाज भी पहले के मुकाबले कम आ रही है।
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150 किमी तक की रफ्तार से दौड़ा सकते हैं एलएचबी
एलएचबी कोच की खासियत यह भी है कि इसमें सेंट्रल कप्लिंग होती है। इस वजह से दो बोगियों को आपस में जोड़ा जाता है। वहीं, आईसीएफ में खुद की बिजली बनाने की क्षमता है। बिजली को बैटरी में स्टोर कर लिया जाता है। इसी वजह से इस कोच की ट्रेन को 150 तक की स्पीड तक दौड़ा सकते हैं। एलएचबी कोच में बिजली के लिए इस कोच के पीछे जनरेटर कार लगा दिया जाता है। आधे में जेनरेटर लगा होता है और आधे कोच में माल लोड किया जाता है। फिलहाल जींद जंक्शन से गुजरने वाली अवध-असम, पतालकोट एक्सप्रेस, जम्मूतवी एक्सप्रेस, शरबत दा भला, नांदेड़ एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, पंजाब मेल, श्रीगंगानगर सुपरफास्ट में एलएचबी रैक लगे हुए हैं।
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आईसीएफ रैक और एलएचबी में क्या है अंतर
एलएचबी रैक जर्मन तकनीक है, जो अधिकतर तेज रफ्तार वाली ट्रेनों में इस्तेमाल की जाती है। एलएचबी रैक पुराने आइसीएफ रैक से काफी आरामदायक होते हैं। एलएचबी रैक में डबल सस्पेंशन होता है, जबकि आईसीएफ में ऐसा नहीं होता है। एलएचबी में एक्स्ट्रा सस्पेंशन भी दिया गया है। एलएचबी को आईसीएफ रैक के मुकाबले दोगुने समय तक मरम्मत करने की आवश्यकता नहीं होती। इसके अलावा आईसीएफ रैक में एयर ब्रेक का प्रयोग होता है। इससे ब्रेक लगाने पर ट्रेन काफी दूर जाकर रुकती है, जबकि एलएचबी में डिस्क ब्रेक का प्रयोग होता है। आईसीएफ के सस्पेंशन से 70 डेसीबल की आवाज आती है। इसलिए ट्रेन चलने के दौरान कई सारी आवाज सुनने को मिलती हैं, जबकि एलएचबी में 60 डेसीबल तक की आवाज होती है जो आरामदायक भी है और आवाज भी कम करता है।
वर्जन
जींद से गुजरने वाली 14035-36 धौलाधार एक्सप्रेस में एलएचबी रैक कोच लगाए जाएंगे। इससे पहले 12481-82 श्रीगंगानगर इंटरसिटी में यह सुविधा शुरू करवा दी थी। 21 जुलाई से यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
-अजय माइकल, पीआरओ, डीआरएम दिल्ली