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Jind News: श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमे, गूंजे आध्यात्मिक संकीर्तन के स्वर
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11जेएनडी17: आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के सदस्य सत्संग समारोह में मौजूद। संवाद
जींद। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के जन्मदिवस और आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के 45 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सेवा सदन में सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया।
सत्संग के दौरान आराधना, जैस्मिन और महावीर की ओर से प्रस्तुत भक्तिमय भजनों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। भजनों की मधुर प्रस्तुति पर श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आए। कार्यक्रम में गुरुदेव के संदेश खुशी, सेवा और आत्मिक शांति को विशेष रूप से साझा किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संगीता पाटपटिया, सुमित वर्मा, पवन गोदिया, अजय पवन ने सेवाएं दीं। सीमा गिल ने श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद सेवा का आयोजन किया। सत्संग के समापन पर उपस्थित लोगों ने ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों को समाज में सकारात्मकता और भाईचारे के लिए जरूरी बताया।
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श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों को मानसिक शांति देने के साथ सेवा भावना को भी मजबूत करते हैं। गुरुदेव के विचार समाज में प्रेम, शांति और मानव सेवा का संदेश देते हैं। कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ जीवन में सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा भी दी।
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सत्संग के दौरान आराधना, जैस्मिन और महावीर की ओर से प्रस्तुत भक्तिमय भजनों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। भजनों की मधुर प्रस्तुति पर श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते नजर आए। कार्यक्रम में गुरुदेव के संदेश खुशी, सेवा और आत्मिक शांति को विशेष रूप से साझा किया गया।
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कार्यक्रम को सफल बनाने में संगीता पाटपटिया, सुमित वर्मा, पवन गोदिया, अजय पवन ने सेवाएं दीं। सीमा गिल ने श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद सेवा का आयोजन किया। सत्संग के समापन पर उपस्थित लोगों ने ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों को समाज में सकारात्मकता और भाईचारे के लिए जरूरी बताया।
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श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों को मानसिक शांति देने के साथ सेवा भावना को भी मजबूत करते हैं। गुरुदेव के विचार समाज में प्रेम, शांति और मानव सेवा का संदेश देते हैं। कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ जीवन में सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा भी दी।