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Jind News: मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान, डुबकी लगा मोक्ष की कामना की

Wed, 29 Jan 2025 11:32 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2025 11:32 PM IST
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Devotees performed Pind Daan on Mauni Amavasya, took a dip and prayed for salvation
29जेएनडी15: पांडू पिंडारा तीर्थ पर स्नान करते हुए श्रद्धालु। संवाद - फोटो : रेलवे प्लेटफार्म पर यात्रियों को जानकारी देते एसओ जीआरपी जेपी सिंह।
जींद। पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर बुधवार को मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया व पिंडदान करके करके तर्पण किया। ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर मंगलवार शाम से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे, पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग व कीर्तन का आयोजन चलता रहा।
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बुधवार अल सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान व पिंडदान शुरू कर दिया, जो दोपहर तक चलता रहा। इस मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया व सूर्य देव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की। ठंड व धुंध के बीच सुबह ही श्रद्धालुओं का आवागमन तीर्थ पर शुरू हो गया। तीर्थ पर पुलिसकर्मी पूरा दिन तैनात रहे। महिला घाटों पर महिला पुलिसकर्मियों की डयूटी लगाई गई थी। घाटों पर आटे के पिंडों के कारण फिसलन पैदा न हो, इसको ध्यान में रखते हुए घाटों पर पिंड डालने के लिए विशेष व्यवस्था रही। वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाए रखने के लिए वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की तरफ पुलिस प्रशासन ने विशेष ख्याल रखा।
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क्या है महत्व
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं।
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मेले में श्रद्धालुओं ने की खरीदारी
पिंडारा तीर्थ पर अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी भी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़े लगाई हुई थी। जिस पर बच्चों व महिलाओं ने खरीदारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे, तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे।

अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित : नवीन शास्त्री
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित हैं। इस दिन स्नान दान और पितरों के नाम से तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या पर पितर अपने वंशजों से मिलने के लिए धरती पर आते हैं। ऐसे में उनके नाम से किया गया दान पुण्य व्यक्ति को कई गुना अधिक फल देता है। इस दिन किए गए पितरों के नाम से दान, पुण्य और तर्पण से पितरों का आशीर्वाद हमेशा परिवार के सदस्यों पर बना रहता है।

29जेएनडी15: पांडू पिंडारा तीर्थ पर स्नान करते हुए श्रद्धालु। संवाद

29जेएनडी15: पांडू पिंडारा तीर्थ पर स्नान करते हुए श्रद्धालु। संवाद- फोटो : रेलवे प्लेटफार्म पर यात्रियों को जानकारी देते एसओ जीआरपी जेपी सिंह।

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