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Jind News: मां कुष्मांडा के दर्शन के लिए मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु, यज्ञ में डाली आहुतियां

Thu, 15 Oct 2026 12:31 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 12:31 AM IST
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Devotees flocked to temples to have darshan of Maa Kushmanda and offered sacrifices in the yagna.
फोटो 14जेएनडी26-जयंती देवी मंदिर में भजन सुनते हुए श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धालु
जींद। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना के लिए शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही जयंती देवी मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, सोमनाथ मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर और रघुनाथ मंदिर में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने मां से परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की।
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जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि मां कुष्मांडा को सृष्टि की रचयिता और ब्रह्मांड को ऊर्जा प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि मां कुष्मांडा ने अपनी दिव्य शक्ति से सृष्टि में प्रकाश और ऊर्जा का संचार किया। उनका निवास सूर्य मंडल के भीतर माना जाता है। उन्होंने कहा कि नवरात्र के नौ दिन आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं। इन दिनों सच्चे मन से मां भगवती की आराधना करने से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
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मां को अपना मानने वाला कभी नहीं भूलता : आचार्य पवन शर्मा
आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि मां का सच्चा भक्त वही है जिसके अंतर्मन में हर समय मां का स्मरण बना रहता है और जिसके जीवन का प्रमुख उद्देश्य उनकी भक्ति होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य उसी व्यक्ति या वस्तु को सहजता से याद रखता है, जिसे वह अपना मानता है। माता-पिता, भाई-बहन और अन्य परिजनों का स्मरण करने के लिए अलग से प्रयास नहीं करना पड़ता क्योंकि उनसे आत्मीय संबंध होता है। इसी प्रकार जब मनुष्य परमात्मा को अपना मानने लगता है तो उसका स्मरण भी सहज हो जाता है। आचार्य ने कहा कि विडंबना यह है कि मनुष्य भगवान की दी हुई वस्तुओं को तो अपना मानता है लेकिन सब कुछ देने वाले परमात्मा को भूल जाता है। केवल परमात्मा ही नित्य, शाश्वत और सनातन हैं। इसलिए मनुष्य को सांसारिक मोह से ऊपर उठकर प्रभु की भक्ति और स्मरण को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। धाम में आयोजित महायज्ञ में आरपी कोहनोरिया, डॉ. बनीष गर्ग, डॉ. सविता, डॉ. कमल गिरोतरा, डॉ. विवेक सिंगला, विनोद गुप्ता, महेंद्र मंगला और पवन गुप्ता ने परिवार सहित मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की और यज्ञ में आहुतियां डालीं।
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