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Jind News: विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना समृद्ध भविष्य की कुंजी
Thu, 15 Oct 2026 01:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 15 Oct 2026 01:59 AM IST
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सोनीपत के भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर
गोहाना। भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां में प्रबंधन अध्ययन विभाग की ओर से बुधवार को ऊर्जा, संधारणीयता और जलवायु परिवर्तन विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। हरियाणा सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो के अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की वाणी योजना के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन किया।
मुख्य अतिथि बड़ौली ने कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य की कुंजी है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने सभी से 15-15 पौधे लगाने और उनकी देखभाल की भी अपील की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुदेश ने की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बढ़ती मांग, पर्यावरणीय असंतुलन और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है। विश्वविद्यालयों को ज्ञान प्रदान करने के साथ सामाजिक समस्याओं के समाधान तलाशने में भी भूमिका निभानी चाहिए।
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सम्मेलन के पहले तकनीकी सत्र में ग्लोबल जिंदल विश्वविद्यालय के ऑफिस ऑफ डॉक्टोरल स्टडीज के डीन प्रो. कृष्ण कुमार पांडेय ने सौर ऊर्जा के उपयोग, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण पर आंकड़ों सहित प्रस्तुति दी।
सम्मेलन समन्वयक प्रो. अंशु भारद्वाज ने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन में स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास पर चर्चा होगी। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के 27 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. शिवालिक यादव, प्रो. पूर्णमल गौड़, राजकुमार कटारिया, नरेंद्र भारतीय, प्रवीण खुराना और डॉ. कपिल कुमार सहित अन्य शिक्षाविद, शोधार्थी मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि बड़ौली ने कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य की कुंजी है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने सभी से 15-15 पौधे लगाने और उनकी देखभाल की भी अपील की।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुदेश ने की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बढ़ती मांग, पर्यावरणीय असंतुलन और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है। विश्वविद्यालयों को ज्ञान प्रदान करने के साथ सामाजिक समस्याओं के समाधान तलाशने में भी भूमिका निभानी चाहिए।
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सम्मेलन के पहले तकनीकी सत्र में ग्लोबल जिंदल विश्वविद्यालय के ऑफिस ऑफ डॉक्टोरल स्टडीज के डीन प्रो. कृष्ण कुमार पांडेय ने सौर ऊर्जा के उपयोग, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण पर आंकड़ों सहित प्रस्तुति दी।
सम्मेलन समन्वयक प्रो. अंशु भारद्वाज ने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन में स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास पर चर्चा होगी। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के 27 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. शिवालिक यादव, प्रो. पूर्णमल गौड़, राजकुमार कटारिया, नरेंद्र भारतीय, प्रवीण खुराना और डॉ. कपिल कुमार सहित अन्य शिक्षाविद, शोधार्थी मौजूद रहे।