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डेंगू का डंक जारी, स्वाइन फ्लू की नहीं तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
Updated Tue, 13 Oct 2015 12:14 AM IST
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डेंगू व मलेरिया के बाद अब प्रदेश में स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी, लेकिन जींद जिले में स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से निहत्था है। अभी तक जिले के सामान्य अस्पताल में न तो स्वाइन फ्लू के उपचार की दवाइयां हैं और ना ही बचाव के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले मास्क हैं।
सामान्य अस्पताल प्रशासन ने स्वाइन फ्लू के संदिग्धों के लिए अलग से वार्ड की भी व्यवस्था नहीं की है। पिछले साल स्वाइन फ्लू से जिले में दो लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग इसकी चपेट में थे। इसके अलावा जिले में डेंगू का प्रकोप भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में हर रोज डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं।
सोमवार को जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या 223 से बढ़कर 245 तक पहुंच गई है। मलेरिया के भी 45 मामले सामने आ चुके हैं। फॉगिंग की दवाई खत्म होने से फॉगिंग अभियान भी थमा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग जिले में डेंगू के डंक को रोक पाने में नाकाम साबित हो रहा है।
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डेंगू की बीमारी की चपेट में आने से कई दिन पहले मेरे बेटे शंभू को सामान्य अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने हमारे घर पर फॉगिंग नहीं करवाई। इसके चलते अब मेरे दूसरे बेटे शंकर को भी डेंगू ने चपेट में ले लिया है। दर्शन सिंह, बराह कलां निवासी
मेरी पत्नी को डेंगू है और उसे यहां दाखिल करवाया गया है। लेकिन अभी तक विभाग ने हमारे घर पर फॉगिंग नहीं करवाई है। इसके चलते परिवार के दूसरे सदस्यों को भी डेंगू का भय सता रहा है। अस्पताल पीने के पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है। वीरेंद्र सैनी, पिल्लूखेड़ा मंडी निवासी
शहर के रोहतक रोड निवासी दिलबाग ने बताया कि उसकी पत्नी व बेटी डेंगू की चपेट में हैं और उन्हें उपचार के लिए सामान्य अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। विभाग द्वारा अभी तक उनकी कोई सुध नहीं ली गई है।
व्हीकल मशीन पहुंची, लेकिन नहीं मिली दवाई
सामान्य अस्पताल प्रशासन को फॉगिंग के लिए नई व्हीकल मशीन तो मिल गई है, लेकिन अभी तक फॉगिंग के लिए दवाई नहीं मिल पाई है। इससे जिले में फॉगिंग का काम ठप है।
डेंगू से पीड़ित महिला की मौत
उचाना कलां गांव की वार्ड नंबर आठ निवासी संतरो देवी (38) की अग्रोहा मेडिकल में उपचार के दौरान मौत हो गई। डेंगू से पीड़ित संतरो देवी का कई दिनों से यहां उपचार चल रहा था। मृतका के बेटे सुनील ने बताया कि उसकी मां को बुखार की शिकायत थी। उचाना के प्राइवेट अस्पताल में उपचार करवाया।
यहां तबीयत बिगड़ जाने पर अग्रोहा मेडिकल में उपचार शुरू करवाया। सोमवार को उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक के दो लड़के, एक लड़की है। परिवार के पालन-पोषण संतरो मजदूरी करके करती थी। उसका पति बीमारी से ग्रस्त है जो काम नहीं कर सकता।
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर दवाइयों, मास्क व अन्य जरूरी सामान की मांग की गई है। स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए जल्द ही सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। वहीं, फॉगिंग के लिए जल्द ही दवाई उपलब्ध हो जाएगी।
फॉगिंग व्हीकल मशीन की सहायता से पूरे जिले में फॉगिंग का काम पूरा करवा दिया जाएगा। उचाना में डेंगू से मौत होने की कोई सूचना अभी तक विभाग के पास नहीं है। डॉ. आरएस तवर, नोडल अधिकारी, सामान्य अस्पताल, जींद
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सामान्य अस्पताल प्रशासन ने स्वाइन फ्लू के संदिग्धों के लिए अलग से वार्ड की भी व्यवस्था नहीं की है। पिछले साल स्वाइन फ्लू से जिले में दो लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग इसकी चपेट में थे। इसके अलावा जिले में डेंगू का प्रकोप भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में हर रोज डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं।
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सोमवार को जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या 223 से बढ़कर 245 तक पहुंच गई है। मलेरिया के भी 45 मामले सामने आ चुके हैं। फॉगिंग की दवाई खत्म होने से फॉगिंग अभियान भी थमा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग जिले में डेंगू के डंक को रोक पाने में नाकाम साबित हो रहा है।
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डेंगू की बीमारी की चपेट में आने से कई दिन पहले मेरे बेटे शंभू को सामान्य अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने हमारे घर पर फॉगिंग नहीं करवाई। इसके चलते अब मेरे दूसरे बेटे शंकर को भी डेंगू ने चपेट में ले लिया है। दर्शन सिंह, बराह कलां निवासी
मेरी पत्नी को डेंगू है और उसे यहां दाखिल करवाया गया है। लेकिन अभी तक विभाग ने हमारे घर पर फॉगिंग नहीं करवाई है। इसके चलते परिवार के दूसरे सदस्यों को भी डेंगू का भय सता रहा है। अस्पताल पीने के पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है। वीरेंद्र सैनी, पिल्लूखेड़ा मंडी निवासी
शहर के रोहतक रोड निवासी दिलबाग ने बताया कि उसकी पत्नी व बेटी डेंगू की चपेट में हैं और उन्हें उपचार के लिए सामान्य अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। विभाग द्वारा अभी तक उनकी कोई सुध नहीं ली गई है।
व्हीकल मशीन पहुंची, लेकिन नहीं मिली दवाई
सामान्य अस्पताल प्रशासन को फॉगिंग के लिए नई व्हीकल मशीन तो मिल गई है, लेकिन अभी तक फॉगिंग के लिए दवाई नहीं मिल पाई है। इससे जिले में फॉगिंग का काम ठप है।
डेंगू से पीड़ित महिला की मौत
उचाना कलां गांव की वार्ड नंबर आठ निवासी संतरो देवी (38) की अग्रोहा मेडिकल में उपचार के दौरान मौत हो गई। डेंगू से पीड़ित संतरो देवी का कई दिनों से यहां उपचार चल रहा था। मृतका के बेटे सुनील ने बताया कि उसकी मां को बुखार की शिकायत थी। उचाना के प्राइवेट अस्पताल में उपचार करवाया।
यहां तबीयत बिगड़ जाने पर अग्रोहा मेडिकल में उपचार शुरू करवाया। सोमवार को उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक के दो लड़के, एक लड़की है। परिवार के पालन-पोषण संतरो मजदूरी करके करती थी। उसका पति बीमारी से ग्रस्त है जो काम नहीं कर सकता।
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर दवाइयों, मास्क व अन्य जरूरी सामान की मांग की गई है। स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए जल्द ही सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। वहीं, फॉगिंग के लिए जल्द ही दवाई उपलब्ध हो जाएगी।
फॉगिंग व्हीकल मशीन की सहायता से पूरे जिले में फॉगिंग का काम पूरा करवा दिया जाएगा। उचाना में डेंगू से मौत होने की कोई सूचना अभी तक विभाग के पास नहीं है। डॉ. आरएस तवर, नोडल अधिकारी, सामान्य अस्पताल, जींद