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Jind News: सीआरएसयू का शोध और वैश्विक अकादमिक सहयोग स्थापित
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28जेएनडी42: प्रोफेसर डॉ. रामपाल सैनी।
जींद। उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध को सशक्त बनाने की दिशा में वैश्विक अकादमिक सहयोग स्थापित किया है।
इससे सीआरएसयू की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर और मजबूत होगी। यह महत्वपूर्ण पहल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राम पाल सैनी के नेतृत्व में हुई है।
कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने बताया कि सीआरएसयू ने शिक्षा के साथ-साथ शोध और नवाचार को प्राथमिकता बनाकर विश्वविद्यालय को एक शोध-उन्मुख वैश्विक संस्थान बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग से विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को संयुक्त शोध परियोजनाओं, उच्च स्तरीय शोध प्रकाशनों और वैश्विक अकादमिक अनुभव का अवसर मिलेगा।
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साथ ही विज़िटिंग रिसर्चर कार्यक्रम, विशेषज्ञ व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशालाओं और अंतर-विभागीय शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल प्रो. (डॉ.) बृज मोहन तथा विश्व के शीर्ष एक प्रतिशत वैज्ञानिक प्रो. (डॉ.) आर्मांडो जे. एल. पोम्बेइरो के साथ अकादमिक साझेदारी की गई है।
प्रो. डॉ. बृज मोहन संघनित पदार्थ भौतिकी और नैनो-संरचनाओं के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त हैं, जबकि प्रो. डॉ. पोम्बेइरो पुर्तगाल के लिस्बन विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं और यूरोपीय विज्ञान अकादमी के वरिष्ठ सदस्य हैं।
इस पहल के अंतर्गत डॉ. वीरेंद्र और डॉ. संदीप कुमार को सीआरएसयू, जींद में विज़िटिंग रिसर्चर के रूप में नामित किया गया है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग विश्वविद्यालय की शोध गुणवत्ता, अकादमिक मानकों और वैश्विक रैंकिंग को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सीआरएसयू की यह पहल न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक नई मिसाल स्थापित करेगी।
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इससे सीआरएसयू की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर और मजबूत होगी। यह महत्वपूर्ण पहल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राम पाल सैनी के नेतृत्व में हुई है।
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कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने बताया कि सीआरएसयू ने शिक्षा के साथ-साथ शोध और नवाचार को प्राथमिकता बनाकर विश्वविद्यालय को एक शोध-उन्मुख वैश्विक संस्थान बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग से विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को संयुक्त शोध परियोजनाओं, उच्च स्तरीय शोध प्रकाशनों और वैश्विक अकादमिक अनुभव का अवसर मिलेगा।
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साथ ही विज़िटिंग रिसर्चर कार्यक्रम, विशेषज्ञ व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशालाओं और अंतर-विभागीय शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल प्रो. (डॉ.) बृज मोहन तथा विश्व के शीर्ष एक प्रतिशत वैज्ञानिक प्रो. (डॉ.) आर्मांडो जे. एल. पोम्बेइरो के साथ अकादमिक साझेदारी की गई है।
प्रो. डॉ. बृज मोहन संघनित पदार्थ भौतिकी और नैनो-संरचनाओं के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त हैं, जबकि प्रो. डॉ. पोम्बेइरो पुर्तगाल के लिस्बन विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं और यूरोपीय विज्ञान अकादमी के वरिष्ठ सदस्य हैं।
इस पहल के अंतर्गत डॉ. वीरेंद्र और डॉ. संदीप कुमार को सीआरएसयू, जींद में विज़िटिंग रिसर्चर के रूप में नामित किया गया है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग विश्वविद्यालय की शोध गुणवत्ता, अकादमिक मानकों और वैश्विक रैंकिंग को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सीआरएसयू की यह पहल न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक नई मिसाल स्थापित करेगी।