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Jind News: यूपीएस खराब होने से ओपीडी में बढ़ी भीड़, डेढ़ घंटे तक हाथों से कटी पर्चियां
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26जेएनडी07: यूपीएस खराब होने के बाद कांउटरों पर बढ़ी मरीजों की भीड़। संवाद
जींद। नागरिक अस्पताल में मंगलवार सुबह तकनीकी खराबी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी स्लिप काउंटर पर लगे कंप्यूटर अचानक बंद हो गए। इससे ऑनलाइन पर्चियां कटनी बंद हो गईं।
जांच करने पर पता चला कि काउंटर से जुड़े यूपीएस खराब हो गए हैं। अस्पताल की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था करीब डेढ़ घंटे तक प्रभावित रही तकनीकी खराबी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
अस्पताल प्रशासन ने तुरंत उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद यूपीएस को ठीक करवाया गया। इस दौरान मरीजों की भीड़ बढ़ती गई और लंबी कतारें लग गईं। परेशानी को देखते हुए कर्मचारियों ने हाथ से पर्चियां बनानी शुरू कीं लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगने से मरीजों को इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों को डॉक्टरों के कमरों के बाहर और दवा काउंटर पर भी लंबा इंतजार करना पड़ा।
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तकनीकी खामी के कारण जिन मरीजों की हाथ से पर्ची बनाई
अस्पताल में मरीजों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहता है। एक बार रजिस्ट्रेशन होने के बाद मरीज का डाटा बार कोड के माध्यम से उपलब्ध हो जाता है। इससे डॉक्टर बीमारी की पुरानी हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और डिजिटल एक्स-रे तक आसानी से देख सकते हैं लेकिन तकनीकी खामी के कारण जिन मरीजों की हाथ से पर्ची बनाई गई। उनका डाटा ऑनलाइन अपडेट नहीं हो पाया। ऐसे में डॉक्टरों को मरीजों की पुरानी जानकारी देखने में दिक्कत हुई। अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण काउंटरों पर भीड़ और बढ़ गई। कर्मचारियों ने व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभालते हुए हाथ से पर्चियां काटकर मरीजों को राहत दी।
वर्जन
यूपीएस खराब होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हाथ से पर्चियां बनाई गईं। तकनीकी खराबी दूर होने के बाद ऑनलाइन सिस्टम फिर से शुरू कर दिया गया और मरीजों को उपचार में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी गई। -डॉ. रघुवीर पूनिया, प्रधान चिकित्सा अधिकारी
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जांच करने पर पता चला कि काउंटर से जुड़े यूपीएस खराब हो गए हैं। अस्पताल की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था करीब डेढ़ घंटे तक प्रभावित रही तकनीकी खराबी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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अस्पताल प्रशासन ने तुरंत उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद यूपीएस को ठीक करवाया गया। इस दौरान मरीजों की भीड़ बढ़ती गई और लंबी कतारें लग गईं। परेशानी को देखते हुए कर्मचारियों ने हाथ से पर्चियां बनानी शुरू कीं लेकिन इस प्रक्रिया में समय लगने से मरीजों को इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों को डॉक्टरों के कमरों के बाहर और दवा काउंटर पर भी लंबा इंतजार करना पड़ा।
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तकनीकी खामी के कारण जिन मरीजों की हाथ से पर्ची बनाई
अस्पताल में मरीजों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहता है। एक बार रजिस्ट्रेशन होने के बाद मरीज का डाटा बार कोड के माध्यम से उपलब्ध हो जाता है। इससे डॉक्टर बीमारी की पुरानी हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और डिजिटल एक्स-रे तक आसानी से देख सकते हैं लेकिन तकनीकी खामी के कारण जिन मरीजों की हाथ से पर्ची बनाई गई। उनका डाटा ऑनलाइन अपडेट नहीं हो पाया। ऐसे में डॉक्टरों को मरीजों की पुरानी जानकारी देखने में दिक्कत हुई। अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण काउंटरों पर भीड़ और बढ़ गई। कर्मचारियों ने व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभालते हुए हाथ से पर्चियां काटकर मरीजों को राहत दी।
वर्जन
यूपीएस खराब होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हाथ से पर्चियां बनाई गईं। तकनीकी खराबी दूर होने के बाद ऑनलाइन सिस्टम फिर से शुरू कर दिया गया और मरीजों को उपचार में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी गई। -डॉ. रघुवीर पूनिया, प्रधान चिकित्सा अधिकारी