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छह महीने पहले रॉड लेकर यूनिवर्सिटी में घुसने पर नरेंद्र को किया था बैन

Rohtak Bureau Updated Wed, 12 Sep 2018 12:55 AM IST
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छह महीने पहले रॉड लेकर यूनिवर्सिटी में घुसने पर नरेंद्र को किया था बैन
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। गांव रामकली निवासी जिस नरेंद्र ने विश्वविद्यालय में कुलपति पर हमला करने का प्रयास किया वह दो वर्ष पहले एमपीएड में ही विश्वद्यालय में पढ़ाई करता था। छह महीने पहले नरेंद्र यूनिवर्सिटी में रॉड लेकर घुस गया था। इस पर पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद नरेंद्र पर यूनिवर्सिटी में घुसने पर बैन लगा दिया गया था। इसके बावजूद वह मंगलवार शाम को दीवार फांद कर यूनिवर्सिटी में घुसा और कुलपति कार्यालय के बाहर फायर किया। पुलिस को मौके से एक खाली गोली का खोल भी मिला है।
नरेंद्र अपने एक साथी के साथ यूनिवर्सिटी की दीवार फांद कर अंदर घुसा। शराब पीने के कारण कुलपति कार्यालय के बाहर सुरक्षा गार्ड दिलबाग को बदबू आ गई। इससे वह सचेत हो गया। इसी बीच नरेंद्र ने अपने कपड़े में छिपाकर लाई पिस्तौल से फायर करने की कोशिश की लेकिन फायर वहीं मिस हो गया और धमाका हो गया। इससे यूनिवर्सिटी में मौजूद अन्य सुरक्षा गार्ड भी मौके पर पहुंच गए। कुलपति कार्यालय के बाहर सुरक्षा गार्ड दिलबाग ने नरेंद्र के साथी को पीछे से पकड़ लिया। इस पर नरेंद्र दूसरा फायर लोड करता इससे पहले ही अन्य सुरक्षा गार्ड आ गए और नरेंद्र अपने साथी को सुरक्षा गार्ड से छुड़वाकर फरार होने में कामयाब हो गया। छह महीने पहले नरेंद्र यूनिवर्सिटी में रॉड लेकर घुसा था। इसके बाद नरेंद्र पर यूनिवर्सिटी में घुसने पर बैन लगा दिया था।
यूनिवर्सिटी में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद नहीं
यूनिवर्सिटी में जिस प्रकार से दोनों आरोपी घुसे उससे साफ है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समय यूनिवर्सिटी में घुस सकता है। यूनिवर्सिटी में चारों तरफ सुरक्षागार्ड होने के बावजूद यह सवाल उठता है कि दोनों युवक बिना मैन गेट के बावजूद दीवार फांद कर कैसे घुस गए। घटना के बाद दोनों युवक सुरक्षा गार्डों को चकमा देकर फरार होने में कामयाब भी हो गए। कुलपति का कार्यालय पूरी बिल्डिंग के बीच में पड़ता है। कुलपति कार्यालय तक जाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इसके बावजूद किसी भी सुरक्षा गार्ड ने युवकों को अंदर घुसते समय न तो रोका और न ही उनकी तलाशी ली। इसके बाद आरोपी आसानी से फरार भी हो गए। आरोपी फरार होते हुए भी उसी रास्ते से गए, जिस रास्ते से आए थे। इससे यूनिवर्सिटी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
सुरक्षागार्ड दिलबाग ने दिखाई बहादुरी
कुलपति कार्यालय के बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड गांव ईगराह निवासी दिलबाग की बहादुर के कारण कुलपति प्रो. आरबी सोलंकी की जान बचाई पाई। नरेंद्र व उसका साथी जब कुलपति कार्यालय में घुसने का प्रयास कर रहे थे तो दिलबाग ने उन्हें अंदर जाने से रोका व कहा कि पहले कुलपति के पीए सुरेश से मिलकर बात करें। इस पर दोंनो युवक बिफर गए और अपने कपड़े से पिस्तौल निकाल कर फायर करने की कोशिश की लेकिन जल्दबाजी में फायर वहीं हो गया। इतनी ही देर में दिलबाग ने नरेंद्र को दबोच लिया और उसे दूसरा फायर नहीं करने दिया। दिलबाग लगभग दो मिनट तक नरेंद्र व उसके साथी से उलझे रहे। जब नरेंद्र व उसके साथी ने देखा कि अन्य गार्ड भी आ गए तो वह उससे छुड़ाते ही अपने साथी समेत फरार हो गया।
सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही पुलिस
सदर थाना प्रभारी मनदीप कुमार ने कहा कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। मौके से गोली का एक खाली खोल मिला है। गांव रामकली निवासी नरेंद्र को नामजद करते हुए एक अन्य पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यूनिवर्सिटी की सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लेकर खंगाली जा रही है। जल्द ही आरोपियों को काबू कर लिया जाएगा।

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