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माकपा ने मांगों को लेकर तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
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अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों पर हमले के आरोप लगाकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने लघु सचिवालय के बाहर धरना दिया और हमलों के खिलाफ जिले में विरोध दिवस मनाते हुए अल्पसंख्यक समुदायों के साथ एकजुटता दिखाई। धरने की अध्यक्षता पार्टी नेता कश्मीर सिंह सेलवाल ने की। धरने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम तहसील अजय सैनी को ज्ञापन सौंपा।
पार्टी जिला सचिव कामरेड रमेश चंद्र ने कहा कि सोशल मीडिया पर यह साफ हो गया है कि खुले आम सांप्रदायिक संदेश फैलाए जा रहे हैं। कुछ मामलों में संदेशों ने हिंसा भड़काई है। माकपा ने हरियाणा में और विशेषकर दक्षिण हरियाणा में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर निरंतर बढ़ रहे हमलों की गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नूंह, गुरुग्राम, फ रीदाबाद व पलवल में निरंतर अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। गुरुग्राम में लोगों की आपसी एकता और भाईचारे को बिगाड़ने की साजिश हो रही हैं। अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए पिछले दो-तीन सालों से सरकार ने एक राजनीतिक मुद्दा बना रखा है। यह बेहद भयानक स्थिति है।
यही स्थिति देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रही है। मानवाधिकार समूहों की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 के पहले नौ महीनों में अल्पसंख्यकों के धार्मिक पूजा स्थलों पर 300 हमले किए गए हैं। त्रिपुरा में भी अल्पसंख्यक समुदायों पर हमला किया गया। इन हमलों की खबर प्रसारित करने वालों पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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पार्टी जिला सचिव कामरेड रमेश चंद्र ने कहा कि सोशल मीडिया पर यह साफ हो गया है कि खुले आम सांप्रदायिक संदेश फैलाए जा रहे हैं। कुछ मामलों में संदेशों ने हिंसा भड़काई है। माकपा ने हरियाणा में और विशेषकर दक्षिण हरियाणा में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर निरंतर बढ़ रहे हमलों की गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नूंह, गुरुग्राम, फ रीदाबाद व पलवल में निरंतर अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। गुरुग्राम में लोगों की आपसी एकता और भाईचारे को बिगाड़ने की साजिश हो रही हैं। अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए पिछले दो-तीन सालों से सरकार ने एक राजनीतिक मुद्दा बना रखा है। यह बेहद भयानक स्थिति है।
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यही स्थिति देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रही है। मानवाधिकार समूहों की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 के पहले नौ महीनों में अल्पसंख्यकों के धार्मिक पूजा स्थलों पर 300 हमले किए गए हैं। त्रिपुरा में भी अल्पसंख्यक समुदायों पर हमला किया गया। इन हमलों की खबर प्रसारित करने वालों पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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