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Jind News: कार खरीदने के बदले दिया चेक बाउंस, दोषी को 6 महीने की कैद, तीन लाख का जुर्माना
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जींद। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जसबीर की कोर्ट ने ब्रेजा कार खरीदने के बदले दिया चेक बाउंस होने पर हुडा सेक्टर-7 निवासी मनीष को 6 महीने कैद की सजा सुनाई है। 3 लाख का जुर्माना भी लगाया है। कार 10.52 लाख में खरीदी गई थी। इसमें 1.96 लाख का भुगतान चेक से हुआ था।
यह कार मारुति सुजुकी के डीलर एकांश मोटर्स से खरीदी गई थी। डीलर आनंद ने कोर्ट को शिकायत में बताया कि मनीष ने अपने मामा के लिए 22 फरवरी 2019 को 10,52,644 रुपये में ब्रेजा कार खरीदी थी। 7,41,500 रुपये बैंक से लोन लेकर दिया। 1.96 लाख का भुगतान चेक से किया।
डीलर ने मनीष के मामा गुरमीत को उसी दिन कार हैंडओवर कर दी थी। 11 मार्च 2019 को चेक बाउंस हो गया। डीलर ने रकम भुगतान के लिए मनीष से कहा लेकिन उसने खाते में रुपये नहीं डाले। बाद में विभिन्न कारणों से चेक तीन बार बाउंस हो गया।
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कोर्ट में वीरवार को बचाव पक्ष ने दलील दी कि मनीष ने कोई चेक ही नहीं दिया था। यह चेक फर्जी है। उसके दस्तखत का मिलान भी हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से नहीं कराया गया है। याची पक्ष ने इन दलीलों को गलत करार दिया।
मां की ही एफआईआर बनी सजा का आधार
मनीष की दलीलें उसकी मां सरिता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के कारण धड़ाम हो गईं। दरअसल, सरिता ने 18 नवंबर 2019 को दर्ज कराई एफआईआर में आरोप लगाया था कि बेटे की ओर से दिया चेक बाउंस हो जाने के कारण डीलर ने कार छीन ली है। लूट की इसी रिपोर्ट के तथ्यों से पुष्टि हो गई कि चेक मनीष ने ही दिया था। कोर्ट ने इसे मजबूत साक्ष्य मानते हुए मनीष को 6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई। 3 लाख का जुर्माना भी लगाया।
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यह कार मारुति सुजुकी के डीलर एकांश मोटर्स से खरीदी गई थी। डीलर आनंद ने कोर्ट को शिकायत में बताया कि मनीष ने अपने मामा के लिए 22 फरवरी 2019 को 10,52,644 रुपये में ब्रेजा कार खरीदी थी। 7,41,500 रुपये बैंक से लोन लेकर दिया। 1.96 लाख का भुगतान चेक से किया।
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डीलर ने मनीष के मामा गुरमीत को उसी दिन कार हैंडओवर कर दी थी। 11 मार्च 2019 को चेक बाउंस हो गया। डीलर ने रकम भुगतान के लिए मनीष से कहा लेकिन उसने खाते में रुपये नहीं डाले। बाद में विभिन्न कारणों से चेक तीन बार बाउंस हो गया।
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कोर्ट में वीरवार को बचाव पक्ष ने दलील दी कि मनीष ने कोई चेक ही नहीं दिया था। यह चेक फर्जी है। उसके दस्तखत का मिलान भी हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से नहीं कराया गया है। याची पक्ष ने इन दलीलों को गलत करार दिया।
मां की ही एफआईआर बनी सजा का आधार
मनीष की दलीलें उसकी मां सरिता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के कारण धड़ाम हो गईं। दरअसल, सरिता ने 18 नवंबर 2019 को दर्ज कराई एफआईआर में आरोप लगाया था कि बेटे की ओर से दिया चेक बाउंस हो जाने के कारण डीलर ने कार छीन ली है। लूट की इसी रिपोर्ट के तथ्यों से पुष्टि हो गई कि चेक मनीष ने ही दिया था। कोर्ट ने इसे मजबूत साक्ष्य मानते हुए मनीष को 6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई। 3 लाख का जुर्माना भी लगाया।