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Jind News: फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र पाए जाने पर दंपती के खिलाफ मुकदमा दर्ज
Sat, 18 Nov 2023 12:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 18 Nov 2023 12:12 AM IST
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जींद। जिले में फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर अनेक लोग पेंशन ले रहे हैं। हालांकि यह दिव्यांगता प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए हैं, लेकिन इन प्रमाणपत्रों को बनवाने के लिए रिश्वत दी गई है, जो लोग पेंशन ले रहे हैं, वह दिव्यांग नहीं हैं। ऐसे में काफी शिकायतें समाज कल्याण विभाग के पास पहुंची हैं। सुदकैन खुर्द निवासी एक दंपती का ऐसा ही मामला सामने आया है। अब दोनों के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
जुलानी, अहीरका, आलनजोगी खेड़ा, निर्जन, मोरखी समेत अनेक ऐसे गांव हैं, जहां लोग दिव्यांगता पेंशन ले रहे हैं, लेकिन वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। शिकायतकर्ताओं की ओर से लोगों के नाम भी समाज कल्याण विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को सौंपे गए हैं, लेकिन आज तक इनकी जांच नहीं हो पाई। सुदकैन खुर्द गांव निवासी राहुल ने ऐसी ही शिकायत समाज कल्याण विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को दी थी। इसमें उन्होंने गांव के ही एक दंपती पर दिव्यांग नहीं होने के बावजूद पेंशन लेने के आरोप लगाए थे। स्वास्थ्य विभाग इन दोनों की जांच की तो दोनों पूरी तरह से स्वस्थ पाए आर छह प्रतिशत ही दिव्यांग पाए गए। जांच के दौरान सामने आया कि दंपती ने वर्ष 2018 में धोखाधड़ी तथा गलत तरीके से दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाया है। शिकायतकर्ता राहुल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों से मिलीभगत कर लोगों ने यह प्रमाण-पत्र बनवाए हैं। सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी रणबीर ने बताया कि पुलिस ने राहुल की शिकायत पर राजेंद्र तथा उसकी पत्नी माया के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी कागजातों का सहारा लेने समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कोट
कुछ लोगों ने मिलीभगत करके दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवा लिए हों। स्वास्थ्य विभाग इनकी जांच कर सकता है, लेकिन इन लोगों को मेडिकल बोर्ड में पुलिस को या फिर समाज कल्याण विभाग को लेकर आना चाहिए। हर बुधवार को मेडिकल बोर्ड दिव्यांगों की जांच करता है। किसी का भी दोबारा मेडिकल करवाकर जांच करवाई जा सकती है।
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-डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।
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जुलानी, अहीरका, आलनजोगी खेड़ा, निर्जन, मोरखी समेत अनेक ऐसे गांव हैं, जहां लोग दिव्यांगता पेंशन ले रहे हैं, लेकिन वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। शिकायतकर्ताओं की ओर से लोगों के नाम भी समाज कल्याण विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को सौंपे गए हैं, लेकिन आज तक इनकी जांच नहीं हो पाई। सुदकैन खुर्द गांव निवासी राहुल ने ऐसी ही शिकायत समाज कल्याण विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को दी थी। इसमें उन्होंने गांव के ही एक दंपती पर दिव्यांग नहीं होने के बावजूद पेंशन लेने के आरोप लगाए थे। स्वास्थ्य विभाग इन दोनों की जांच की तो दोनों पूरी तरह से स्वस्थ पाए आर छह प्रतिशत ही दिव्यांग पाए गए। जांच के दौरान सामने आया कि दंपती ने वर्ष 2018 में धोखाधड़ी तथा गलत तरीके से दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाया है। शिकायतकर्ता राहुल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों से मिलीभगत कर लोगों ने यह प्रमाण-पत्र बनवाए हैं। सिविल लाइन थाना के जांच अधिकारी रणबीर ने बताया कि पुलिस ने राहुल की शिकायत पर राजेंद्र तथा उसकी पत्नी माया के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी कागजातों का सहारा लेने समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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कुछ लोगों ने मिलीभगत करके दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवा लिए हों। स्वास्थ्य विभाग इनकी जांच कर सकता है, लेकिन इन लोगों को मेडिकल बोर्ड में पुलिस को या फिर समाज कल्याण विभाग को लेकर आना चाहिए। हर बुधवार को मेडिकल बोर्ड दिव्यांगों की जांच करता है। किसी का भी दोबारा मेडिकल करवाकर जांच करवाई जा सकती है।
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-डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।