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Jind News: भवन निर्माण मजदूर मांगों को लेकर 26 को करेंगे प्रदर्शन
Sat, 23 Dec 2023 01:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 23 Dec 2023 01:16 AM IST
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22जेएनडी03: महिला मनरेगा मजदूरों को संबोधित करते हुए वक्ता। स्वयं
जींद। भवन निर्माण मजदूरों ने शुक्रवार को 26 दिसंबर के प्रदर्शन को लेकर मनोहरपुर, बराहखुर्द, मांडो खेड़ी गांवों में जनसभाएं की। जिला सचिव कपूर सिंह, संदीप जाजवान ने कहा कि श्रम कल्याण बोर्ड में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है।
श्रम कल्याण बोर्ड से यूनियनों को मिले मजदूरों की तसदीक के अधिकार को छीन कर कल्याण बोर्ड को और ज्यादा पंगु बना दिया है। निर्माण मजदूरों ने तीन-तीन, चार-चार साल से अपनी बेटियों की शादी सहायता, कन्यादान सहायता, मातृत्व-पितृत्व सहायता, मजदूर की मृत्यु के बाद परिवार को मिलने वाली मृत्यु सहायता, बच्चों की छात्रवृत्ति सहायता इत्यादि के आवेदनों पर अनाप-शनाप आपत्तियां लगा कर रद्द किया गया है। श्रम कार्यालय में तो कोई अधिकारी ही नहीं है जो मजदूरों की समस्याओं का निदान कर सकें। मनरेगा में काम मांगने पर मजदूरों को काम नहीं मिलता और काम मिल भी जाता है तो 15 दिन के मस्टरोल में से सिर्फ दो-तीन दिन काम करवा कर काम को बंद करवा दिया जाता है। जिले के शहरों में जुलाना को छोड़ कर कहीं पर भी लेबर शेड का निर्माण नहीं हुआ है। जुलाना का लेबर शेड भी आधा अधूरा ही पड़ा हुआ है। यूनियन नेताओं ने बताया कि प्रदेश की भाजपा सरकार के गठन के समय से ही निर्माण मजदूरों की सुविधाओं में कटौतियां व भ्रष्टाचार के माध्यम से वर्ष 2006 में बने श्रम कल्याण बोर्ड को खत्म करने की साजिश की जा रही है। कल्याण बोर्ड में जमा 4500 करोड़ रुपये को सरकार खुर्दबुर्द करना चाहती है।
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श्रम कल्याण बोर्ड से यूनियनों को मिले मजदूरों की तसदीक के अधिकार को छीन कर कल्याण बोर्ड को और ज्यादा पंगु बना दिया है। निर्माण मजदूरों ने तीन-तीन, चार-चार साल से अपनी बेटियों की शादी सहायता, कन्यादान सहायता, मातृत्व-पितृत्व सहायता, मजदूर की मृत्यु के बाद परिवार को मिलने वाली मृत्यु सहायता, बच्चों की छात्रवृत्ति सहायता इत्यादि के आवेदनों पर अनाप-शनाप आपत्तियां लगा कर रद्द किया गया है। श्रम कार्यालय में तो कोई अधिकारी ही नहीं है जो मजदूरों की समस्याओं का निदान कर सकें। मनरेगा में काम मांगने पर मजदूरों को काम नहीं मिलता और काम मिल भी जाता है तो 15 दिन के मस्टरोल में से सिर्फ दो-तीन दिन काम करवा कर काम को बंद करवा दिया जाता है। जिले के शहरों में जुलाना को छोड़ कर कहीं पर भी लेबर शेड का निर्माण नहीं हुआ है। जुलाना का लेबर शेड भी आधा अधूरा ही पड़ा हुआ है। यूनियन नेताओं ने बताया कि प्रदेश की भाजपा सरकार के गठन के समय से ही निर्माण मजदूरों की सुविधाओं में कटौतियां व भ्रष्टाचार के माध्यम से वर्ष 2006 में बने श्रम कल्याण बोर्ड को खत्म करने की साजिश की जा रही है। कल्याण बोर्ड में जमा 4500 करोड़ रुपये को सरकार खुर्दबुर्द करना चाहती है।
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