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Jind News: भाकियू ने सांसद के सामने रखी एमएसपी गारंटी कानून की बात
Mon, 08 Jul 2024 02:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 08 Jul 2024 02:36 AM IST
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07जेएनडी19-मांगों को लेकर सोनीपत सांसद को ज्ञापन सौंपते भाकियू पदाधिकारी। संवाद
जींद। भारतीय किसान यूनियन ने मांगों को लेकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला के नेतृत्व में रविवार को सांसद सतपाल ब्रह्मचारी को लेकर ज्ञापन सौंपा। सांसद ने उनको आश्वासन दिया कि उनकी मांगों एवं समस्याओं को सदन में जोर-शोर से उठाया जाएगा।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला, जिला प्रधान बारूराम, प्रवक्ता रामराजी पोंकरीखेड़ी, बिंद्र नंबरदार और रामफल ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ एवं एमएसपी गारंटी कानून बनवाने के लिए 2020-21 में किसानों ने दिल्ली के बार्डर पर 378 दिनों तक आंदोलन किया था। उस समय केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लिए थे। एमएसपी गारंटी कानून बनाने के लिए एक कमेटी के गठन की घोषणा की थी। इसके बाद एक-एक दिन के लिए कई सांकेतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार का ध्यान एमएसपी गारंटी कानून बनाने की तरफ करवाया था, लेकिन सरकार ने अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
मांगपत्र में यह उठाई मांग
देश के किसानों के लिए सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाए और डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार फसलों के भाव तय किए जाएं। किसानों और मजदूरों की पूर्ण कर्ज मुक्ति की जाए। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को पूरे देश में दोबारा लागू किया जाए। भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की लिखित सहमति एवं कलेक्टर रेट से चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान लागू किए जाए। किसानों और खेत मजदूरों को दस हजार रुपये महीना पेंशन दी जाए। विद्युत संशोधन विधेयक 2023 को रद्द किया जाए एवं खेती को प्रदूषण कानून से बाहर निकाला जाए। मनरेगा के तहत प्रति वर्ष 200 दिन का रोजगार, 700 रुपये का मजदूरी भत्ता दिया जाए एवं मनरेगा को खेती के साथ जोड़ा जाए। नकली बीज, कीटनाशक दवाइयां एवं खाद बनाने वाली कंपनियों पर सख्त दंड और जुर्माना लगाने के प्रावधान तय किए जाएं एवं बीजों की गुणवत्ता में सुधार किए जाए। मिर्च, हल्दी एवं अन्य मसालों के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन किया जाए। संविधान की पांच सूची को लागू किया जाए। किसान आंदोलन के दौरान मौत और घायल हुए किसान परिवारों को मुआवजा दिया जाए। एमएसपी गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट एवं किसान व मजदूरों की कर्ज माफी समेत तमाम मुद्दों पर संसद के मानसून सत्र में प्राइवेट बिल पेश करे ताकि किसानों एवं मजदूरों की मांगें पूरी हो सकें।
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राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला, जिला प्रधान बारूराम, प्रवक्ता रामराजी पोंकरीखेड़ी, बिंद्र नंबरदार और रामफल ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ एवं एमएसपी गारंटी कानून बनवाने के लिए 2020-21 में किसानों ने दिल्ली के बार्डर पर 378 दिनों तक आंदोलन किया था। उस समय केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लिए थे। एमएसपी गारंटी कानून बनाने के लिए एक कमेटी के गठन की घोषणा की थी। इसके बाद एक-एक दिन के लिए कई सांकेतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार का ध्यान एमएसपी गारंटी कानून बनाने की तरफ करवाया था, लेकिन सरकार ने अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
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मांगपत्र में यह उठाई मांग
देश के किसानों के लिए सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाए और डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार फसलों के भाव तय किए जाएं। किसानों और मजदूरों की पूर्ण कर्ज मुक्ति की जाए। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को पूरे देश में दोबारा लागू किया जाए। भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की लिखित सहमति एवं कलेक्टर रेट से चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान लागू किए जाए। किसानों और खेत मजदूरों को दस हजार रुपये महीना पेंशन दी जाए। विद्युत संशोधन विधेयक 2023 को रद्द किया जाए एवं खेती को प्रदूषण कानून से बाहर निकाला जाए। मनरेगा के तहत प्रति वर्ष 200 दिन का रोजगार, 700 रुपये का मजदूरी भत्ता दिया जाए एवं मनरेगा को खेती के साथ जोड़ा जाए। नकली बीज, कीटनाशक दवाइयां एवं खाद बनाने वाली कंपनियों पर सख्त दंड और जुर्माना लगाने के प्रावधान तय किए जाएं एवं बीजों की गुणवत्ता में सुधार किए जाए। मिर्च, हल्दी एवं अन्य मसालों के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन किया जाए। संविधान की पांच सूची को लागू किया जाए। किसान आंदोलन के दौरान मौत और घायल हुए किसान परिवारों को मुआवजा दिया जाए। एमएसपी गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट एवं किसान व मजदूरों की कर्ज माफी समेत तमाम मुद्दों पर संसद के मानसून सत्र में प्राइवेट बिल पेश करे ताकि किसानों एवं मजदूरों की मांगें पूरी हो सकें।

07जेएनडी19-मांगों को लेकर सोनीपत सांसद को ज्ञापन सौंपते भाकियू पदाधिकारी। संवाद
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