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Jind News: मुख्यमंत्री नहीं बनने का बीरेंद्र सिंह को आज भी मलाल
Sat, 25 Mar 2023 10:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 25 Mar 2023 10:44 PM IST
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जींद। प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं बनने का दर्द आज भी पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह को साल रहा है। शनिवार को उचाना के कॉलेज में उनके कार्यकर्ताओं ने उनका जन्मदिन मनाया। इस मौके पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि वह प्रदेश का नेतृत्व करते, लेकिन आप लोग ही नहीं चाहते थे। उनके पास 2000 व 2009 में ऐसा मौका आया था।
बीरेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि दो बार ऐसा मौका आया था जब नेता लोग चाहते थे कि बीरेंद्र सिंह प्रदेश का नेतृत्व करे, लेकिन उचाना के लोग नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति में इन दो चुनावों में ही रुकावट आई, जिस कारण वह प्रदेश का नेतृत्व नहीं कर सके। उन्होंने लोगों से साफ कहा कि इसमें बुरा मानने की बात नहीं है, लेकिन वह कई बार सोचते हैं कि मामला क्या है। यह आपकी सोच का हिस्सा था या फिर ऐसी मंशा थी कि अबकी बार बीरेंद्र को गाड्ढांगे (हराएंगे)। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि नेता चाहते थे, लेकिन वह 2000 में हुए चुनाव के बाद प्रदेश का नेतृत्व करें, लेकिन वह चुनाव हार गए। इसके बाद 2009 में भी ऐसा ही मौका आया, लेकिन इस चुनाव में भी उनको हार का सामना करना पड़ा। बीरेंद्र सिंह को हरियाणा में ट्रेजडी किंग के नाम से भी जाना जाता है।
2000 में हुए विस चुनाव में भाग सिंह छात्तर ने हराया था बीरेंद्र सिंह को
वर्ष 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में चौधरी बीरेंद्र सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में इनेलो की टिकट पर भाग सिंह छात्तर ने बीरेंद्र सिंह को हराया था। इसी प्रकार 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में भी इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने बीरेंद्र सिंह हराया था। बीरेंद्र सिंह अब तक पांच बार 1977, 1982, 1991, 1996, 2005 में विधायक बने। वह तीन बार हरियाणा में कैबिनेट मंत्री रहे। 1984 में बीरेंद्र सिंह सांसद चुने गए। 2010 में उन्हें राज्यसभा सदस्य चुना गया।
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बीरेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि दो बार ऐसा मौका आया था जब नेता लोग चाहते थे कि बीरेंद्र सिंह प्रदेश का नेतृत्व करे, लेकिन उचाना के लोग नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति में इन दो चुनावों में ही रुकावट आई, जिस कारण वह प्रदेश का नेतृत्व नहीं कर सके। उन्होंने लोगों से साफ कहा कि इसमें बुरा मानने की बात नहीं है, लेकिन वह कई बार सोचते हैं कि मामला क्या है। यह आपकी सोच का हिस्सा था या फिर ऐसी मंशा थी कि अबकी बार बीरेंद्र को गाड्ढांगे (हराएंगे)। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि नेता चाहते थे, लेकिन वह 2000 में हुए चुनाव के बाद प्रदेश का नेतृत्व करें, लेकिन वह चुनाव हार गए। इसके बाद 2009 में भी ऐसा ही मौका आया, लेकिन इस चुनाव में भी उनको हार का सामना करना पड़ा। बीरेंद्र सिंह को हरियाणा में ट्रेजडी किंग के नाम से भी जाना जाता है।
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2000 में हुए विस चुनाव में भाग सिंह छात्तर ने हराया था बीरेंद्र सिंह को
वर्ष 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में चौधरी बीरेंद्र सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में इनेलो की टिकट पर भाग सिंह छात्तर ने बीरेंद्र सिंह को हराया था। इसी प्रकार 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में भी इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने बीरेंद्र सिंह हराया था। बीरेंद्र सिंह अब तक पांच बार 1977, 1982, 1991, 1996, 2005 में विधायक बने। वह तीन बार हरियाणा में कैबिनेट मंत्री रहे। 1984 में बीरेंद्र सिंह सांसद चुने गए। 2010 में उन्हें राज्यसभा सदस्य चुना गया।
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