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Jind News: भाकियू ने किया ट्रेड डील का विरोध
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05जेएनडी33: भारतीय किसान यूनियन की मासिक बैठक में मौजूद किसान। स्रोत किसान
- फोटो : 1
जींद। शिव कॉलोनी में वीरवार को भारतीय किसान यूनियन की मासिक बैठक का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षत सुभाष घिमाना ने की और बैठक में ट्रेड डील समझौते का विरोध किया गया जो केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ किया है।
भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला ने अमेरिका के साथ किए जा रहे कृषि उत्पाद समझौते का किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा कदम बताया। कंडेला ने कहा कि यह ट्रेड डील देश के किसानों को बर्बाद करने वाली और खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की साजिश लग रही है। भारत सरकार विदेशी दबाव में आकर किसानों की रोजी रोटी को बेचने पर तुली हुई है।
रामफल कंडेला ने कहा कि इस डील से अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य हो जाएगा जिससे भारतीय बाजार में अमेरिका के सस्ते और अत्यधिक सब्सिडी वाले उत्पादों की बाढ़ आ जाएगी। इससे स्थानीय फसलों की कीमतें गिर सकती हैं और छोटे किसानों की आजीविका संकट में पड़ सकती है।
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रामराजी ढुल ने कहा कि अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में जगह मिलने से दूध की स्थानीय कीमतों में 15 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, जिससे भारतीय पशुपालकों को आर्थिक नुकसान होगा।
डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों, पशुपालकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अमेरिका में डेयरी उद्योग कॉर्पोरेट स्तर पर चलता है और वहां किसानों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है। इसके विपरीत, भारत में औसत पशुपालक के पास केवल 2 से 3 पशु होते हैं। बिना सुरक्षा के भारतीय छोटे पशुपालक अमेरिकी कंपनियों के सस्ते उत्पादों के सामने टिक नहीं पाएंगे।
बैठक में दूसरा सबसे बड़ा एजेंडा बुजुर्गों की पेंशन काटने से संबंधित रहा। यूनियन पदाधिकारियों ने फैमिली आईडी में इनकम का हवाला देकर बुजुर्गों की पेंशन काटने के सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की। यूनियन ने मांग की कि बुजुर्गों को परेशान न किया जाए और उनकी पेंशन को वापस से जोड़ा जाए। इस दौरान भाकियू जिला प्रधान बिंद्र नंबरदार, रामराजी ढुल पोंकरी खेड़ी, राजिंद्र पहलवान, प्रकाश राजपुरा भैण, बारू राम रूपगढ़, विजय गुलकनी व छज्जू राम कंडेला भी मौजूद रहे।
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भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला ने अमेरिका के साथ किए जा रहे कृषि उत्पाद समझौते का किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा कदम बताया। कंडेला ने कहा कि यह ट्रेड डील देश के किसानों को बर्बाद करने वाली और खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की साजिश लग रही है। भारत सरकार विदेशी दबाव में आकर किसानों की रोजी रोटी को बेचने पर तुली हुई है।
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रामफल कंडेला ने कहा कि इस डील से अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य हो जाएगा जिससे भारतीय बाजार में अमेरिका के सस्ते और अत्यधिक सब्सिडी वाले उत्पादों की बाढ़ आ जाएगी। इससे स्थानीय फसलों की कीमतें गिर सकती हैं और छोटे किसानों की आजीविका संकट में पड़ सकती है।
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रामराजी ढुल ने कहा कि अमेरिकी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में जगह मिलने से दूध की स्थानीय कीमतों में 15 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, जिससे भारतीय पशुपालकों को आर्थिक नुकसान होगा।
डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों, पशुपालकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अमेरिका में डेयरी उद्योग कॉर्पोरेट स्तर पर चलता है और वहां किसानों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है। इसके विपरीत, भारत में औसत पशुपालक के पास केवल 2 से 3 पशु होते हैं। बिना सुरक्षा के भारतीय छोटे पशुपालक अमेरिकी कंपनियों के सस्ते उत्पादों के सामने टिक नहीं पाएंगे।
बैठक में दूसरा सबसे बड़ा एजेंडा बुजुर्गों की पेंशन काटने से संबंधित रहा। यूनियन पदाधिकारियों ने फैमिली आईडी में इनकम का हवाला देकर बुजुर्गों की पेंशन काटने के सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की। यूनियन ने मांग की कि बुजुर्गों को परेशान न किया जाए और उनकी पेंशन को वापस से जोड़ा जाए। इस दौरान भाकियू जिला प्रधान बिंद्र नंबरदार, रामराजी ढुल पोंकरी खेड़ी, राजिंद्र पहलवान, प्रकाश राजपुरा भैण, बारू राम रूपगढ़, विजय गुलकनी व छज्जू राम कंडेला भी मौजूद रहे।