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Jind News: 47 गांवों में अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों का होने वाला सुंदरीकरण अटका
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25जेएनडी17: आलन जोगी खेड़ा गांव का तालाब बजट नहीं आने के कारण अधूरा पड़ा हुआ। संवाद
सुशील टुर्ण
जींद। प्रदेश सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों का सुंदरीकरण करने की योजना बनाई थी। जिले में यह योजना शुरू तो करवाई गई, लेकिन योजना के तहत अभी लगभग एक तिहाई के काम बाकी हैं। जिले में अमृत सरोवर योजना के तहत 2108 लाख रुपये खर्च कर तालाबों को नया रूप देने के लिए काम शुरू किया गया था। योजना के तहत 143 तालाबों का काम अभी तक पूरा भी हो चुका है।
जिला पंचायती राज विभाग द्वारा यह काम पूरा करवाया जाना था। इसके लिए पंचायतों से आवेदन मांगे गए थे। जिन पंचायतों ने तालाब सौंदर्यकरण के लिए आवेदन किया था, उनसे तालाबों के एस्टीमेट बनवाए गए थे। जिले में इसके लिए 215 तालाबों का चयन हुआ था। इन सभी की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजी गई थी। इनमें से अब तक 47 तालाबों पर काम शुरू नहीं हो पाया। इसके अतिरिक्त 35 गांवों के तालाब ऐसे हैं, जिनका एस्टीमेट रिवाइज मांगा गया है। इन तालाबों के एस्टीमेट में खामियां हैं। इसके कारण इनके रुपये कम आए हैं। इस राशि से यह तालाब पूरे नहीं हो सकते। इसके अलावा चार गांवों के तालाबों के दो बार एस्टीमेट बनकर आ गए थे। इन तालाबों के अलग-अलग नाम से एस्टीमेट बने हुए थे। इस कारण इनको रद्द कर दिया गया।
आलन जोगी खेड़ा, हथवाला समेत पांच गांव ऐसे हैं, जिनको तालाब के सुंदरीकरण के लिए अभी इंतजार करना होगा। इन तालाबों के एस्टीमेट तो बने हुए हैं, लेकिन इनके लिए बजट जारी नहीं हो पाया। जब बजट आएगा, इसके बाद ही इन गांवों में तालाबों का सुंदरीकरण शुरू होगा। इसके अलावा एक गांव के तालाब में ज्यादा पानी होने के कारण कार्य नहीं करवाया जा सकता, जबकि एक गांव का टेंडर प्रक्रिया चली हुई है।
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बाक्स
तालाब सुंदरीकरण से गांवों को मिल रहा नया रूप
जिन गांवों के तालाबों का सुंदरीकरण का काम पूरा हो चुका है। इन गांवों में तालाबों को चारों तरफ से पक्का करके पगडंडी बनाई गई हैं। वहीं तालाब में पशुओं के प्रवेश के लिए सुंदर घाट, पगडंडी के चारों तरफ पौधे और लाइट लगाकर सजाए गए हैं। इसके अलावा कुछ गांव के तालाबों पर काम शुरू करके अधूरा भी छोड़ा गया है। इन तालाबों को सुंदरीकरण का इंतजार है।
बाक्स
आचार संहिता समाप्त होने के बाद शुरू होंगे काम
विधानसभा के चुनाव के बाद इन सभी गावों में तालाबों का काम शुरू करवा दिया जाएगा। जिन तालाबों में तकनीकी समस्या है, उस पर काम चला हुआ है।
-पोषण कुमार, एक्सईन पंचायती राज जींद।
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जींद। प्रदेश सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों का सुंदरीकरण करने की योजना बनाई थी। जिले में यह योजना शुरू तो करवाई गई, लेकिन योजना के तहत अभी लगभग एक तिहाई के काम बाकी हैं। जिले में अमृत सरोवर योजना के तहत 2108 लाख रुपये खर्च कर तालाबों को नया रूप देने के लिए काम शुरू किया गया था। योजना के तहत 143 तालाबों का काम अभी तक पूरा भी हो चुका है।
जिला पंचायती राज विभाग द्वारा यह काम पूरा करवाया जाना था। इसके लिए पंचायतों से आवेदन मांगे गए थे। जिन पंचायतों ने तालाब सौंदर्यकरण के लिए आवेदन किया था, उनसे तालाबों के एस्टीमेट बनवाए गए थे। जिले में इसके लिए 215 तालाबों का चयन हुआ था। इन सभी की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजी गई थी। इनमें से अब तक 47 तालाबों पर काम शुरू नहीं हो पाया। इसके अतिरिक्त 35 गांवों के तालाब ऐसे हैं, जिनका एस्टीमेट रिवाइज मांगा गया है। इन तालाबों के एस्टीमेट में खामियां हैं। इसके कारण इनके रुपये कम आए हैं। इस राशि से यह तालाब पूरे नहीं हो सकते। इसके अलावा चार गांवों के तालाबों के दो बार एस्टीमेट बनकर आ गए थे। इन तालाबों के अलग-अलग नाम से एस्टीमेट बने हुए थे। इस कारण इनको रद्द कर दिया गया।
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आलन जोगी खेड़ा, हथवाला समेत पांच गांव ऐसे हैं, जिनको तालाब के सुंदरीकरण के लिए अभी इंतजार करना होगा। इन तालाबों के एस्टीमेट तो बने हुए हैं, लेकिन इनके लिए बजट जारी नहीं हो पाया। जब बजट आएगा, इसके बाद ही इन गांवों में तालाबों का सुंदरीकरण शुरू होगा। इसके अलावा एक गांव के तालाब में ज्यादा पानी होने के कारण कार्य नहीं करवाया जा सकता, जबकि एक गांव का टेंडर प्रक्रिया चली हुई है।
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तालाब सुंदरीकरण से गांवों को मिल रहा नया रूप
जिन गांवों के तालाबों का सुंदरीकरण का काम पूरा हो चुका है। इन गांवों में तालाबों को चारों तरफ से पक्का करके पगडंडी बनाई गई हैं। वहीं तालाब में पशुओं के प्रवेश के लिए सुंदर घाट, पगडंडी के चारों तरफ पौधे और लाइट लगाकर सजाए गए हैं। इसके अलावा कुछ गांव के तालाबों पर काम शुरू करके अधूरा भी छोड़ा गया है। इन तालाबों को सुंदरीकरण का इंतजार है।
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आचार संहिता समाप्त होने के बाद शुरू होंगे काम
विधानसभा के चुनाव के बाद इन सभी गावों में तालाबों का काम शुरू करवा दिया जाएगा। जिन तालाबों में तकनीकी समस्या है, उस पर काम चला हुआ है।
-पोषण कुमार, एक्सईन पंचायती राज जींद।