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Jind News: बबीता ब्यूटी पार्लर से निखार रही अपनी और अपने परिवार की जिंदगी
Sat, 04 Oct 2025 12:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 04 Oct 2025 12:04 AM IST
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03जेएनडी04 : बबीता कटारिया
जींद। जीवन में मुश्किलें जब इंसान के हौसले को तोड़ने लगती हैं तो कुछ लोग अपने संघर्ष से न सिर्फ खुद का बल्कि परिवार का भविष्य भी संवार देते हैं। शहर के गोहाना रोड निवासी बबीता कटारिया ने ऐसी ही मिसाल पेश की है। साथ ही जरूरतमंद बेटियों को पार्लर का निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम भी कर ही है।
13 साल पहले बबीता के पति की बीमारी से मौत हो गई थी। उस समय उसके दो छोटे-छोटे बच्चे थे। उनके मायके वालों ने कहा कि दूसरी शादी कर ले लेकिन बबीता ने मना कर दिया। फिर उसने एक सरकारी केंद्र में छह महीने का ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण लिया।
इसके बाद उसने मायके से मिले शीशे और कुर्सी को लेकर घर में ही बने छोटे से कमरे में ब्यूटी पार्लर और सिलाई का काम शुरु कर दिया। गली-मोहल्ले से थोड़े बहुत ग्राहक आने शुरु हाे गए। धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। बबीता अभी बच्चों और सास-ससुर के साथ रहती है।
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पार्लर की आमदनी से बबीता ने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना शुरू किया। उन्होंने कभी भी अपने बच्चों को यह एहसास नहीं होने दिया कि पिता के जाने के बाद उनकी पढ़ाई रुक न जाए बल्कि उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया कि पढ़ाई करके ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। आज उनका बड़ा बेटा हर्ष बीटेक कर रहा है और छोटा बेटा दसवीं कक्षा में है।
600 महिलाओं को दे चुकी है प्रशिक्षण
बबीता शहर की 600 महिलाओं को ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण दे चुकी है। उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण देकर अपनी तरह आत्मनिर्भर बनाया। इसके अलावा वह जरूरतमंद बेटियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रही है। वे कहती हैं कि कठिनाइयां हर किसी के जीवन में आती हैं यदि इंसान हिम्मत न हारे तो रास्ता खुद निकल आता है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना बेहद जरूरी है ताकि वे किसी भी हालात में अपने परिवार का सहारा बन सकें।
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13 साल पहले बबीता के पति की बीमारी से मौत हो गई थी। उस समय उसके दो छोटे-छोटे बच्चे थे। उनके मायके वालों ने कहा कि दूसरी शादी कर ले लेकिन बबीता ने मना कर दिया। फिर उसने एक सरकारी केंद्र में छह महीने का ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण लिया।
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इसके बाद उसने मायके से मिले शीशे और कुर्सी को लेकर घर में ही बने छोटे से कमरे में ब्यूटी पार्लर और सिलाई का काम शुरु कर दिया। गली-मोहल्ले से थोड़े बहुत ग्राहक आने शुरु हाे गए। धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। बबीता अभी बच्चों और सास-ससुर के साथ रहती है।
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पार्लर की आमदनी से बबीता ने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना शुरू किया। उन्होंने कभी भी अपने बच्चों को यह एहसास नहीं होने दिया कि पिता के जाने के बाद उनकी पढ़ाई रुक न जाए बल्कि उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया कि पढ़ाई करके ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। आज उनका बड़ा बेटा हर्ष बीटेक कर रहा है और छोटा बेटा दसवीं कक्षा में है।
600 महिलाओं को दे चुकी है प्रशिक्षण
बबीता शहर की 600 महिलाओं को ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण दे चुकी है। उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण देकर अपनी तरह आत्मनिर्भर बनाया। इसके अलावा वह जरूरतमंद बेटियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रही है। वे कहती हैं कि कठिनाइयां हर किसी के जीवन में आती हैं यदि इंसान हिम्मत न हारे तो रास्ता खुद निकल आता है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना बेहद जरूरी है ताकि वे किसी भी हालात में अपने परिवार का सहारा बन सकें।