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Jind News: महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर 23 को होगा आर्य सम्मेलन
Thu, 21 Sep 2023 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 21 Sep 2023 11:52 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर 23 सितंबर को बलिदान दिवस पर खटकड़ टोल पर आयोजित होने वाले आर्य सम्मेलन की तैयारी को लेकर वीरवार को जींद अर्बन इस्टेट में बैठक हुई। इसमें सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में होशियार सिंह आर्य, सूर्य देव आर्य, किताब सिंह भनवाला, योगाचार्य जोरा सिंह आर्य, पूर्व सरपंच मदन मलिक ने कहा कि आर्य सम्मेलन की सफलता के लिए तैयारी की गई है। इसको लेकर आर्य समाज के लोगों के अलावा आम जनता में उत्साह है। कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना करके देशभर में समाज में फैली कुरीतियों को मिटाने के लिए देश के कोने-कोने में प्रचार किया। अंधविश्वास, पाखंड व मूर्ति पूजा का खंडन करते हुए समाज में जागृति पैदा की। कहा कि वर्तमान सरकार में मिथ्या प्रचार से पुन: ये बुराइयां समाज में बढ़ने लगी हैं। कहा कि 23 सितंबर को होने वाले आर्य सम्मेलन में जहां नशाखोरी, अश्लीलता, अनैतिकता, समगोत्र और माता-पिता की सहमति बिना विवाह आदि कुप्रथाओं के विरोध में आवाज उठाई जाएगी। वहीं अंध विश्वास, पाखंड और मूर्ति पूजा के विरोध में भी पुरजोर आवाज उठाई जाएगी।
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जींद। महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर 23 सितंबर को बलिदान दिवस पर खटकड़ टोल पर आयोजित होने वाले आर्य सम्मेलन की तैयारी को लेकर वीरवार को जींद अर्बन इस्टेट में बैठक हुई। इसमें सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में होशियार सिंह आर्य, सूर्य देव आर्य, किताब सिंह भनवाला, योगाचार्य जोरा सिंह आर्य, पूर्व सरपंच मदन मलिक ने कहा कि आर्य सम्मेलन की सफलता के लिए तैयारी की गई है। इसको लेकर आर्य समाज के लोगों के अलावा आम जनता में उत्साह है। कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना करके देशभर में समाज में फैली कुरीतियों को मिटाने के लिए देश के कोने-कोने में प्रचार किया। अंधविश्वास, पाखंड व मूर्ति पूजा का खंडन करते हुए समाज में जागृति पैदा की। कहा कि वर्तमान सरकार में मिथ्या प्रचार से पुन: ये बुराइयां समाज में बढ़ने लगी हैं। कहा कि 23 सितंबर को होने वाले आर्य सम्मेलन में जहां नशाखोरी, अश्लीलता, अनैतिकता, समगोत्र और माता-पिता की सहमति बिना विवाह आदि कुप्रथाओं के विरोध में आवाज उठाई जाएगी। वहीं अंध विश्वास, पाखंड और मूर्ति पूजा के विरोध में भी पुरजोर आवाज उठाई जाएगी।
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