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Jind News: एक्यूआई 375 पार... दम घोंट रहा प्रदूषण, दमा, एलर्जी और चर्म रोगी बढ़े
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जींद। शहर में धूल और धुएं का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। वायु प्रदूषण के कारण एलर्जी, अस्थमा और चर्म रोग के मरीजों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण से दम घुटने लगा है। जिले का एक्यूआई स्तर वीरवार को 375 दर्ज किया गया है।
यह अस्थमा, एलर्जी और दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक होता जा रहा है। इसलिए चिकित्सक भी घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि बाहर खुले में सांस के माध्यम से धूल और धुएं के कण अंदर जा रहे हैं, जिससे सांस और दिल के मरीजों के लिए नुकसानदेह है।
एक्यूआई स्तर बढ़ने से नागरिक अस्पताल में भी अस्थमा, एलर्जी और चर्म रोग से पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी है। प्रतिदिन आने वाले हर 100 मरीजों में से कम से कम 30 मरीज ऐसे सामने रहे हैं, जिन्हें अस्थमा, एलर्जी और चर्म रोग संबंधित शिकायत है। चिकित्सकों का मानना है कि एलर्जी और अस्थमा के रोगियों की तादाद में वृद्धि का बड़ा कारण शहर में बढ़ रहा वायू प्रदूषण भी है। शहर में ऐसी कोई सड़क नहीं है, जहां धूल और धुएं का गुबार नही उठता हो। सबसे ज्यादा बदतर स्थिति जेडी-7, रोहतक रोड, पटियाला चौक से टेनरी मोड़, सब्जी मंडी के आसपास का एरिया, ज्ञानतारा रोड, ओमनगर की है। वहीं, शहर में दौड़ रहे कंडम वाहनों के धुएं से भी लोगों का जीना मुहाल हो रखा है।
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कंडम वाहनों पर भी नहीं लग रही रोक
शहर में दौड़ रहे कई वाहन कंडम हो चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में ये कंडम वाहन दिन भर सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। शहर में सवारियों को ढोने वाले कई ऑटो भी अनफिट होकर कंडम वाहनों की श्रेणी में पहुंच गए हैं। कंडम हो चुके वाहनों को शहर में बेफिक्र होकर दौड़ाया जा रहा है, जिनके जहरीले धुएं से बीमारियां बढ़ रही हैं। इन कंडम वाहनों के खिलाफ यातायात पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।
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ग्रैप के दूसरे चरण के नियमों का नहीं हो रहा पालन
-अस्पतालों, रेल सेवाओं को छोड़कर अन्य जगहों पर डीजल जनरेटर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। रोजाना सड़कों पर पानी का छिड़काव तो हो रहा है, लेकिन साफ-सफाई नहीं हो रही। कोयले और लकड़ी को भी जलाया जा रहा है। निर्माण कार्य भी बिना रोक-टोक के चल रहे हैं। शहर के सबसे व्यस्त एरिया गोहाना रोड के पास निर्माणाधीन जेडी-7 पर वाहनों के पीछे धूल के गुबार उड़ते रहते हैं।
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एक्यूआई का प्रभाव
-0-50 कोई नुकसान नहीं
-51-100 सामान्य बीमार लोगों के लिए थोड़ा नुकसानदायक
-101-200 सांस के रोगियों के लिए नुकसानदायक
-201-300 लोगों को सांस लेने में परेशानी
-301-400 आंखों में जलन व सांस लेने की परेशानी
वर्जन
वातावरण में धूल और धुएं के साथ ही सूरज की अल्ट्रावाइलेट किरणों से भी चर्म और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बचने के लिए जितना हो सके शरीर के हिस्से को ढककर रखा जाना चाहिए।
डॉ. विनिता, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल जींद
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यह अस्थमा, एलर्जी और दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक होता जा रहा है। इसलिए चिकित्सक भी घर से बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि बाहर खुले में सांस के माध्यम से धूल और धुएं के कण अंदर जा रहे हैं, जिससे सांस और दिल के मरीजों के लिए नुकसानदेह है।
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एक्यूआई स्तर बढ़ने से नागरिक अस्पताल में भी अस्थमा, एलर्जी और चर्म रोग से पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी है। प्रतिदिन आने वाले हर 100 मरीजों में से कम से कम 30 मरीज ऐसे सामने रहे हैं, जिन्हें अस्थमा, एलर्जी और चर्म रोग संबंधित शिकायत है। चिकित्सकों का मानना है कि एलर्जी और अस्थमा के रोगियों की तादाद में वृद्धि का बड़ा कारण शहर में बढ़ रहा वायू प्रदूषण भी है। शहर में ऐसी कोई सड़क नहीं है, जहां धूल और धुएं का गुबार नही उठता हो। सबसे ज्यादा बदतर स्थिति जेडी-7, रोहतक रोड, पटियाला चौक से टेनरी मोड़, सब्जी मंडी के आसपास का एरिया, ज्ञानतारा रोड, ओमनगर की है। वहीं, शहर में दौड़ रहे कंडम वाहनों के धुएं से भी लोगों का जीना मुहाल हो रखा है।
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कंडम वाहनों पर भी नहीं लग रही रोक
शहर में दौड़ रहे कई वाहन कंडम हो चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में ये कंडम वाहन दिन भर सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। शहर में सवारियों को ढोने वाले कई ऑटो भी अनफिट होकर कंडम वाहनों की श्रेणी में पहुंच गए हैं। कंडम हो चुके वाहनों को शहर में बेफिक्र होकर दौड़ाया जा रहा है, जिनके जहरीले धुएं से बीमारियां बढ़ रही हैं। इन कंडम वाहनों के खिलाफ यातायात पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।
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ग्रैप के दूसरे चरण के नियमों का नहीं हो रहा पालन
-अस्पतालों, रेल सेवाओं को छोड़कर अन्य जगहों पर डीजल जनरेटर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। रोजाना सड़कों पर पानी का छिड़काव तो हो रहा है, लेकिन साफ-सफाई नहीं हो रही। कोयले और लकड़ी को भी जलाया जा रहा है। निर्माण कार्य भी बिना रोक-टोक के चल रहे हैं। शहर के सबसे व्यस्त एरिया गोहाना रोड के पास निर्माणाधीन जेडी-7 पर वाहनों के पीछे धूल के गुबार उड़ते रहते हैं।
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एक्यूआई का प्रभाव
-0-50 कोई नुकसान नहीं
-51-100 सामान्य बीमार लोगों के लिए थोड़ा नुकसानदायक
-101-200 सांस के रोगियों के लिए नुकसानदायक
-201-300 लोगों को सांस लेने में परेशानी
-301-400 आंखों में जलन व सांस लेने की परेशानी
वर्जन
वातावरण में धूल और धुएं के साथ ही सूरज की अल्ट्रावाइलेट किरणों से भी चर्म और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बचने के लिए जितना हो सके शरीर के हिस्से को ढककर रखा जाना चाहिए।
डॉ. विनिता, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल जींद