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Jind News: अंजलि बनीं गांव की महिलाओं की प्रेरणा, हुनर से दिखाई आत्मनिर्भरता की राह
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04जेएनडी12: अंजलि देवी गांव में सिलाई करते हुए। संवाद
राम राय। गांव पोकर खेड़ी की अंजलि देवी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और सामाजिक सोच के बल पर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि गांव की दर्जनों महिलाओं को भी रोजगार से जोडा है। सिलाई, बुनाई, कढ़ाई और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को स्वरोजगार का रास्ता दिखाया है।
तीन वर्षों से अंजलि गांव की महिलाओं को निशुल्क सिलाई, बुनाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण दे रही हैं। उन्होंने इस पहल की शुरुआत अपने घर से केवल पांच-छह महिलाओं के साथ की थी। धीरे-धीरे यह प्रयास बढ़ता गया और आज 50 से अधिक महिलाएं उनसे प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार से जुड़ चुकी हैं। इनमें से कई महिलाएं हर माह अच्छी आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।
महिलाओं को संगठित करने के उद्देश्य से अंजलि देवी ने चार स्वयं सहायता समूहों का भी गठन कराया। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं ने बैंक से ऋण लेकर सिलाई मशीनें, ऊन और कढ़ाई का सामान खरीदा। वर्तमान में ये समूह स्कूल यूनिफॉर्म, पर्दे, बेडशीट, स्वेटर और विभिन्न सजावटी वस्तुएं तैयार कर गांव के साथ-साथ आसपास के कस्बों में भी आपूर्ति कर रहे हैं।
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अंजलि देवी का कहना है कि यदि महिलाओं को सहयोग मिले तो वे घर की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनका लक्ष्य है कि पोकर खेड़ी की कोई भी महिला आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर न रहे। अंजलि देवी अब गांव में एक छोटा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना चाहती हैं ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर पोकर खेड़ी को महिला उद्यमिता की पहचान दिलाई जा सके।
समूह से जुड़ी रीना, सुनीता और पूजा ने बताया कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं लेकिन अब वे हर महीने छह से आठ हजार रुपये तक कमा रही हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई और परिवार के खर्चों में सहयोग मिल रहा है।
बाक्स
अंजलि देवी का यह प्रयास सराहनीय है। सरकारी योजनाओं के साथ ऐसे सामाजिक नवाचार न केवल ग्रामीण विकास को गति देते हैं बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- राजकुमार, सरपंच
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तीन वर्षों से अंजलि गांव की महिलाओं को निशुल्क सिलाई, बुनाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण दे रही हैं। उन्होंने इस पहल की शुरुआत अपने घर से केवल पांच-छह महिलाओं के साथ की थी। धीरे-धीरे यह प्रयास बढ़ता गया और आज 50 से अधिक महिलाएं उनसे प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार से जुड़ चुकी हैं। इनमें से कई महिलाएं हर माह अच्छी आय अर्जित कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।
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महिलाओं को संगठित करने के उद्देश्य से अंजलि देवी ने चार स्वयं सहायता समूहों का भी गठन कराया। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं ने बैंक से ऋण लेकर सिलाई मशीनें, ऊन और कढ़ाई का सामान खरीदा। वर्तमान में ये समूह स्कूल यूनिफॉर्म, पर्दे, बेडशीट, स्वेटर और विभिन्न सजावटी वस्तुएं तैयार कर गांव के साथ-साथ आसपास के कस्बों में भी आपूर्ति कर रहे हैं।
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अंजलि देवी का कहना है कि यदि महिलाओं को सहयोग मिले तो वे घर की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनका लक्ष्य है कि पोकर खेड़ी की कोई भी महिला आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर न रहे। अंजलि देवी अब गांव में एक छोटा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना चाहती हैं ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर पोकर खेड़ी को महिला उद्यमिता की पहचान दिलाई जा सके।
समूह से जुड़ी रीना, सुनीता और पूजा ने बताया कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं लेकिन अब वे हर महीने छह से आठ हजार रुपये तक कमा रही हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई और परिवार के खर्चों में सहयोग मिल रहा है।
बाक्स
अंजलि देवी का यह प्रयास सराहनीय है। सरकारी योजनाओं के साथ ऐसे सामाजिक नवाचार न केवल ग्रामीण विकास को गति देते हैं बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- राजकुमार, सरपंच