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Jind News: एडीसी साहब! छह महीने से नहीं मिला मनरेगा का काम
Wed, 26 Feb 2025 12:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 26 Feb 2025 12:54 AM IST
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25जेएनडी12-एडीसी से मिलने पहुंचे डूमरखा कलां के मनरेगा मजदूर। संवाद
- फोटो : संवाद
जींद। एडीसी साहब! पिछले छह महीने से मनरेगा का काम नहीं मिला है। वह छह माह से काम की तलाश में भटक रहे हैं। डूमरखा के सैकड़ों मनरेगा मजदूर मंगलवार को एडीसी से मिलने पहुंचे। उन्होंने एडीसी से मिलकर काम दिलाने की गुहार लगाई। इस पर एडीसी विवेक आर्य ने उन्हें आश्वासन दिलाया कि जल्द ही उन्हें काम मिल जाएगा। इसके बाद मनरेगा मजदूर वापस लौट गए।
मजदूर कमला, पूनम, मुकेश देवी, सावित्री, रामरति, मीना, सेवापति, कांता, राजवंती, बिमला, रानी, रीना, शीला, राजीव का कहना है कि उन्हें पिछले छह माह से काम नहीं मिला है। सरकार तो बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन सच्चाई कुछ ओर ही है। काम न मिलने के कारण वह बेरोजगार हैं, उन्हें बिना काम मिलने के आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनके गांव के पास नेशनल हाईवे पर पंचायत की तरफ से मनरेगा स्कीम के तहत कार्य करवाया जाता है। गांव में बिजली घर भी लगा हुआ है, लेकिन वहां दूसरे गांव की पंचायत की ओर से मनरेगा मजदूरों के कार्य कराए जा रहे हैं। जबकि यह कार्य उनसे कराया जाना चाहिए था। इससे पहले बिजली घर में वह कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में लगभग 300 मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन उनमें से 200 मजदूर मनरेगा के तहत होने वाले कार्य के सहारे ही जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने गुहार लगाई कि यह कार्य करवाने का अधिकार उनकी पंचायत डूमरखा कलां को दिया जाए।
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मजदूर कमला, पूनम, मुकेश देवी, सावित्री, रामरति, मीना, सेवापति, कांता, राजवंती, बिमला, रानी, रीना, शीला, राजीव का कहना है कि उन्हें पिछले छह माह से काम नहीं मिला है। सरकार तो बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन सच्चाई कुछ ओर ही है। काम न मिलने के कारण वह बेरोजगार हैं, उन्हें बिना काम मिलने के आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनके गांव के पास नेशनल हाईवे पर पंचायत की तरफ से मनरेगा स्कीम के तहत कार्य करवाया जाता है। गांव में बिजली घर भी लगा हुआ है, लेकिन वहां दूसरे गांव की पंचायत की ओर से मनरेगा मजदूरों के कार्य कराए जा रहे हैं। जबकि यह कार्य उनसे कराया जाना चाहिए था। इससे पहले बिजली घर में वह कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में लगभग 300 मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन उनमें से 200 मजदूर मनरेगा के तहत होने वाले कार्य के सहारे ही जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने गुहार लगाई कि यह कार्य करवाने का अधिकार उनकी पंचायत डूमरखा कलां को दिया जाए।
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