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Jind News: शहर में बंदरों के आतंक पर लगेगा अंकुश, नगर परिषद ने एक साल के लिए मांगे टेंडर
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30जेएनडी02: शहर के पुराने बस अड्डे के पास बंदरों का आंतक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान लोगों को अब राहत की उम्मीद जगी है। नगर परिषद ने बंदरों को पकड़ने के लिए एक साल का ठेका देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परिषद ने ओपन टेंडर जारी कर एजेंसियों और ठेकेदारों से आवेदन मांगे हैं।
इच्छुक फर्म या ठेकेदार 8 अक्तूबर तक निविदा जमा कर सकेंगे जबकि तकनीकी बोली इसी दिन दोपहर तीन बजे नगर परिषद कार्यालय में खोली जाएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर में बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू किया जाएगा।
शहर में पांच हजार से अधिक बंदर होने का अनुमान है। गलियों, बाजारों और घरों की छतों से लेकर सार्वजनिक संस्थानों तक बंदरों के झुंड लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं।
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बंदर कई बार लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। घरों में घुसकर सामान उठाने और लोगों पर झपटने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। कुछ दिन पहले नागरिक अस्पताल में बंदरों के रिकॉर्ड रूम तक पहुंचने और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड फाड़ने का मामला सामने आया था।
40 बार रिमाइंडर, हाउस की बैठकों में भी उठता रहा मुद्दा : बंदरों को पकड़ने की मांग को लेकर प्रशासन के समक्ष लंबे समय से शिकायतें पहुंचती रही हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ के प्रधान राममेहर वर्मा की ओर से डीसी डॉ. वैशाली शर्मा को करीब 40 बार रिमाइंडर भेजे हैं। शहरवासी भी नगर परिषद कार्यालय में शिकायतें देकर बंदरों से निजात दिलाने की मांग कर चुके हैं। नगर परिषद की हाउस बैठकों में भी यह मुद्दा लगातार उठता रहा है।
पहले भी एजेंसी को दिया था ठेका, नियमों के उल्लंघन पर करना पड़ा रद्द : नगर परिषद इससे पहले भी बंदरों को पकड़ने के लिए एक एजेंसी को ठेका दे चुकी है। हालांकि, नियमों के अनुसार काम नहीं करने के आरोप में करीब छह माह पहले टेंडर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद बंदरों को पकड़ने का अभियान प्रभावित हुआ और समस्या फिर बढ़ती चली गई। अब परिषद ने दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। नई एजेंसी को काम मिलने के बाद शहरवासियों की नजर इस बात पर रहेगी कि अभियान कितनी प्रभावी तरीके से चलाया जाता है और कितने बंदरों को पकड़ा जाता है।
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जींद। शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान लोगों को अब राहत की उम्मीद जगी है। नगर परिषद ने बंदरों को पकड़ने के लिए एक साल का ठेका देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परिषद ने ओपन टेंडर जारी कर एजेंसियों और ठेकेदारों से आवेदन मांगे हैं।
इच्छुक फर्म या ठेकेदार 8 अक्तूबर तक निविदा जमा कर सकेंगे जबकि तकनीकी बोली इसी दिन दोपहर तीन बजे नगर परिषद कार्यालय में खोली जाएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर में बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू किया जाएगा।
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शहर में पांच हजार से अधिक बंदर होने का अनुमान है। गलियों, बाजारों और घरों की छतों से लेकर सार्वजनिक संस्थानों तक बंदरों के झुंड लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं।
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बंदर कई बार लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। घरों में घुसकर सामान उठाने और लोगों पर झपटने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। कुछ दिन पहले नागरिक अस्पताल में बंदरों के रिकॉर्ड रूम तक पहुंचने और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड फाड़ने का मामला सामने आया था।
40 बार रिमाइंडर, हाउस की बैठकों में भी उठता रहा मुद्दा : बंदरों को पकड़ने की मांग को लेकर प्रशासन के समक्ष लंबे समय से शिकायतें पहुंचती रही हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ के प्रधान राममेहर वर्मा की ओर से डीसी डॉ. वैशाली शर्मा को करीब 40 बार रिमाइंडर भेजे हैं। शहरवासी भी नगर परिषद कार्यालय में शिकायतें देकर बंदरों से निजात दिलाने की मांग कर चुके हैं। नगर परिषद की हाउस बैठकों में भी यह मुद्दा लगातार उठता रहा है।
पहले भी एजेंसी को दिया था ठेका, नियमों के उल्लंघन पर करना पड़ा रद्द : नगर परिषद इससे पहले भी बंदरों को पकड़ने के लिए एक एजेंसी को ठेका दे चुकी है। हालांकि, नियमों के अनुसार काम नहीं करने के आरोप में करीब छह माह पहले टेंडर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद बंदरों को पकड़ने का अभियान प्रभावित हुआ और समस्या फिर बढ़ती चली गई। अब परिषद ने दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। नई एजेंसी को काम मिलने के बाद शहरवासियों की नजर इस बात पर रहेगी कि अभियान कितनी प्रभावी तरीके से चलाया जाता है और कितने बंदरों को पकड़ा जाता है।