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Jind News: भाद्रपद अमावस्या पर पांडू पिंडारा में उमड़ा आस्था का सैलाब
Sat, 12 Sep 2026 01:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 12 Sep 2026 01:32 AM IST
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11जेएनडी04: पांडू पिंडारा में भाद्रपद अमावस्या पर पुजा अर्चना करने के लिए पहुंचे श्रद्वालु। संव
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। महाभारतकालीन ऐतिहासिक तीर्थ पांडू पिंडारा शुक्रवार को भाद्रपद अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। पितरों की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना लेकर जिले के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचे। सुबह होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई और दिनभर में 20 हजार से अधिक लोगों ने पवित्र सरोवर में स्नान किया।
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण कर अपने पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। भाद्रपद अमावस्या को पितरों के निमित्त पूजा, श्राद्ध और तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों को अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि की जानकारी नहीं होती, वे अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान कर सूर्यदेव को जल अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
तीर्थ पर श्रद्धालुओं का आगमन वीरवार शाम से ही शुरू हो गया था। धर्मशालाओं और धार्मिक स्थलों पर रातभर सत्संग, भजन और कीर्तन का दौर चलता रहा। शुक्रवार तड़के सरोवर के घाटों पर श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं और दोपहर बाद तक पिंडदान-तर्पण का सिलसिला जारी रहा।
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श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष ड्यूटी लगाई। सरोवर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मी तैनात रहे। धार्मिक मंत्रोच्चार और भजनों से पूरा तीर्थ परिसर आध्यात्मिक माहौल में डूबा रहा।
वर्जन पिंडतारक तीर्थ को लेकर मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने मृत परिजनों और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां तपस्या की थी। बाद में अमावस्या के अवसर पर उन्होंने पिंडदान किया। तभी से पांडू पिंडारा में पितरों के निमित्त पिंडदान की परंपरा चली आ रही है। मान्यता के कारण हर वर्ष विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।-नवीन शास्त्री, पुजारी जयंती देवी मंदिर
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जींद। महाभारतकालीन ऐतिहासिक तीर्थ पांडू पिंडारा शुक्रवार को भाद्रपद अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। पितरों की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना लेकर जिले के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचे। सुबह होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई और दिनभर में 20 हजार से अधिक लोगों ने पवित्र सरोवर में स्नान किया।
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण कर अपने पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। भाद्रपद अमावस्या को पितरों के निमित्त पूजा, श्राद्ध और तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों को अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि की जानकारी नहीं होती, वे अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान कर सूर्यदेव को जल अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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तीर्थ पर श्रद्धालुओं का आगमन वीरवार शाम से ही शुरू हो गया था। धर्मशालाओं और धार्मिक स्थलों पर रातभर सत्संग, भजन और कीर्तन का दौर चलता रहा। शुक्रवार तड़के सरोवर के घाटों पर श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं और दोपहर बाद तक पिंडदान-तर्पण का सिलसिला जारी रहा।
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श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष ड्यूटी लगाई। सरोवर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मी तैनात रहे। धार्मिक मंत्रोच्चार और भजनों से पूरा तीर्थ परिसर आध्यात्मिक माहौल में डूबा रहा।
वर्जन पिंडतारक तीर्थ को लेकर मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने मृत परिजनों और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां तपस्या की थी। बाद में अमावस्या के अवसर पर उन्होंने पिंडदान किया। तभी से पांडू पिंडारा में पितरों के निमित्त पिंडदान की परंपरा चली आ रही है। मान्यता के कारण हर वर्ष विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।-नवीन शास्त्री, पुजारी जयंती देवी मंदिर

11जेएनडी04: पांडू पिंडारा में भाद्रपद अमावस्या पर पुजा अर्चना करने के लिए पहुंचे श्रद्वालु। संव