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हर गली में खुला है किड्ज प्ले स्कूल, जिला में महज 59 ने किया रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन
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जिलेभर में खुले एक हजार से ज्यादा प्ले स्कूल, रजिस्ट्रेशन सिर्फ 59 ने करवाया
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। यूं तो गली-गली में प्ले स्कूल है लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग के पास जिलाभर में महज 59 स्कूलों ने ही रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। स्कूलों को 20 फरवरी तक रजिस्ट्रेशन करवाने का फरमान जारी किया था लेकिन स्कूल संचालकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार जिला भर में एक हजार से अधिक स्कूल चल रहे हैं। इनमें से सिर्फ 59 स्कूलों ने ही रजिस्ट्रेशन फार्म जमा करवाए हैं। सरकार ने अक्तूबर 2018 में जिले में ऐसे सभी प्ले स्कूलों को रजिस्ट्रेशन करवाने के आदेश जारी किए थे। इनकी रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी बाल विकास विभाग को सौंपी गई हैं। अब अप्रैल माह में पंजीकरण के लिए बनाई गई कमेटी सभी 59 स्कूलों की जांच करेगी। जांच टीम में सीडीपीओ, डीसीपीओ, एलपीओ, बाल विकास टीम व शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। अगर जांच के दौरान इन 59 स्कूलों में तय मानकों के अनुसार सुविधा पाई गई तो एक साल का रजिस्ट्रेशन पत्र जारी कर दिया जाएगा। वहीं अन्य गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की रिपोर्ट नेशनल कमीशन ऑफ प्रोटेक्शन राइट (एनसीपीसीआर) को भेजी जाएगी। एनसीपीसीआर के आदेश पर गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद किया जा सकता है।
इन 59 प्ले स्कूलों ने किया आवेदन
जिलेभर में एक हजार प्ले स्कूलों में से 59 स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। जींद में 27, जुलाना में 15, सफीदों ब्लॉक में 13, अलेवा व पिल्लूखेड़ा ब्लॉक में एक और उचाना ब्लॉक में दो प्ले स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है।
यह है प्ले स्कूलों को का हाल
जिला में एक हजार से ज्यादा किड्स प्ले स्कूल चल रहे हैं। जिनमें से ज्यादा स्कूलों में व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है। एक कमरे में प्ले स्कूल चलाया जा रहा है। प्ले स्कूल संचालक अभिभावकों को झांसे में लेकर बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में न तो बच्चों के खेलने की व्यवस्था है और न ही सुरक्षा व्यवस्था।
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रजिस्ट्रेशन इसलिए है अनिवार्य
महिला एंव बाल विकास विभाग के अनुसार सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन के लिए अक्तूबर 2018 में आदेश जारी कर दिए गए थे लेकिन इन स्कूलों को रजिस्ट्रेशन के लिए बाध्य नहीं किया गया था। कई स्कूलों में बच्चों के साथ आपराधिक गतिविधियों के अलावा सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं में अभाव की बात सामने आई है। इसके बाद सरकार ने जिलेभर के स्कूलों को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य कर दिया। ऐसे में बिना रजिस्ट्रेशन वाले स्कूलों को बंद किया जा सकता है। दो साल पहले जींद में भी एक प्ले स्कूल में आग लगने की घटना सामने आई थी। जांच करने पर यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं मिले।
प्ले स्कूल के लिए यह हैं नियम
1. स्कूल पूरी तरह से स्वच्छ होने चाहिए।
2. स्कूलों में बच्चों के खेेलने के लिए प्ले ग्राउंड होना चाहिए।
3. स्कूल में सीसीटीवी कैमरे जरूर लगे होने चाहिए।
4. छात्र और छात्राओें के लिए अलग से शौचालयों की व्यवस्था होनी चाहिए।
5. 20 बच्चों पर एक अध्यापक व एक केयर टेकर की व्यवस्था होनी चाहिए।
6. फायर सेफ्टी की व्यवस्था होनी चाहिए।
7. प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए।
8. स्कूलों में बच्चों को छोड़ने व ले जाने का पूरा रिकॉर्ड व बच्चों का पूरा रिकॉर्ड दुरुस्त होना चाहिए।
मुफ्त होता है प्ले स्कूलों का रजिस्ट्रेशन
मुफ्त स्कूलों का रजिस्ट्रेशन फ्री में हो रहा है। इसके लिए कोई फीस निर्धारित नहीं की है। इसके बावजूद स्कूल रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
ताक पर रखे रहे हैं सुरक्षा की व्यवस्था
सीडीपीओ कार्यालय के सूत्रों के अनुसार अधिकत प्ले स्कूलों में सुरक्षा के निमय ताक पर रखे जा रहे हैं। यहां कोई टीचर नहीं हो, सिर्फ केयर टेकर के सहारे प्ले स्कूलों को चलाया जा रहा है। बच्चों की संभाल के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं होती।
महिला एंव बाल विकास अधिकारी ने प्ले स्कूलों को ढूंढने का जिम्मा अंागनबाड़ी वर्कर व आशा वर्कर को दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ यह वर्कर स्कूलों को ढूंढेगी और ब्योरा देंगी। उसके बाद जिलेभर के गैर मान्यता प्राप्त प्ले स्कूलों की रिपोर्ट एनसीपीसीआर के पास भेजी जाएगी। एनसीपीसीआर के आदेश मिलने के बाद गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई करते हुए बंद किया जा सकता है।
ऊषा कुमारी, डीपीओ, जिला बाल विकास कार्यालय।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। यूं तो गली-गली में प्ले स्कूल है लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग के पास जिलाभर में महज 59 स्कूलों ने ही रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। स्कूलों को 20 फरवरी तक रजिस्ट्रेशन करवाने का फरमान जारी किया था लेकिन स्कूल संचालकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार जिला भर में एक हजार से अधिक स्कूल चल रहे हैं। इनमें से सिर्फ 59 स्कूलों ने ही रजिस्ट्रेशन फार्म जमा करवाए हैं। सरकार ने अक्तूबर 2018 में जिले में ऐसे सभी प्ले स्कूलों को रजिस्ट्रेशन करवाने के आदेश जारी किए थे। इनकी रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी बाल विकास विभाग को सौंपी गई हैं। अब अप्रैल माह में पंजीकरण के लिए बनाई गई कमेटी सभी 59 स्कूलों की जांच करेगी। जांच टीम में सीडीपीओ, डीसीपीओ, एलपीओ, बाल विकास टीम व शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। अगर जांच के दौरान इन 59 स्कूलों में तय मानकों के अनुसार सुविधा पाई गई तो एक साल का रजिस्ट्रेशन पत्र जारी कर दिया जाएगा। वहीं अन्य गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की रिपोर्ट नेशनल कमीशन ऑफ प्रोटेक्शन राइट (एनसीपीसीआर) को भेजी जाएगी। एनसीपीसीआर के आदेश पर गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद किया जा सकता है।
इन 59 प्ले स्कूलों ने किया आवेदन
जिलेभर में एक हजार प्ले स्कूलों में से 59 स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। जींद में 27, जुलाना में 15, सफीदों ब्लॉक में 13, अलेवा व पिल्लूखेड़ा ब्लॉक में एक और उचाना ब्लॉक में दो प्ले स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है।
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यह है प्ले स्कूलों को का हाल
जिला में एक हजार से ज्यादा किड्स प्ले स्कूल चल रहे हैं। जिनमें से ज्यादा स्कूलों में व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है। एक कमरे में प्ले स्कूल चलाया जा रहा है। प्ले स्कूल संचालक अभिभावकों को झांसे में लेकर बच्चों का भविष्य खराब कर रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में न तो बच्चों के खेलने की व्यवस्था है और न ही सुरक्षा व्यवस्था।
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रजिस्ट्रेशन इसलिए है अनिवार्य
महिला एंव बाल विकास विभाग के अनुसार सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन के लिए अक्तूबर 2018 में आदेश जारी कर दिए गए थे लेकिन इन स्कूलों को रजिस्ट्रेशन के लिए बाध्य नहीं किया गया था। कई स्कूलों में बच्चों के साथ आपराधिक गतिविधियों के अलावा सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं में अभाव की बात सामने आई है। इसके बाद सरकार ने जिलेभर के स्कूलों को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य कर दिया। ऐसे में बिना रजिस्ट्रेशन वाले स्कूलों को बंद किया जा सकता है। दो साल पहले जींद में भी एक प्ले स्कूल में आग लगने की घटना सामने आई थी। जांच करने पर यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं मिले।
प्ले स्कूल के लिए यह हैं नियम
1. स्कूल पूरी तरह से स्वच्छ होने चाहिए।
2. स्कूलों में बच्चों के खेेलने के लिए प्ले ग्राउंड होना चाहिए।
3. स्कूल में सीसीटीवी कैमरे जरूर लगे होने चाहिए।
4. छात्र और छात्राओें के लिए अलग से शौचालयों की व्यवस्था होनी चाहिए।
5. 20 बच्चों पर एक अध्यापक व एक केयर टेकर की व्यवस्था होनी चाहिए।
6. फायर सेफ्टी की व्यवस्था होनी चाहिए।
7. प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए।
8. स्कूलों में बच्चों को छोड़ने व ले जाने का पूरा रिकॉर्ड व बच्चों का पूरा रिकॉर्ड दुरुस्त होना चाहिए।
मुफ्त होता है प्ले स्कूलों का रजिस्ट्रेशन
मुफ्त स्कूलों का रजिस्ट्रेशन फ्री में हो रहा है। इसके लिए कोई फीस निर्धारित नहीं की है। इसके बावजूद स्कूल रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
ताक पर रखे रहे हैं सुरक्षा की व्यवस्था
सीडीपीओ कार्यालय के सूत्रों के अनुसार अधिकत प्ले स्कूलों में सुरक्षा के निमय ताक पर रखे जा रहे हैं। यहां कोई टीचर नहीं हो, सिर्फ केयर टेकर के सहारे प्ले स्कूलों को चलाया जा रहा है। बच्चों की संभाल के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं होती।
महिला एंव बाल विकास अधिकारी ने प्ले स्कूलों को ढूंढने का जिम्मा अंागनबाड़ी वर्कर व आशा वर्कर को दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ यह वर्कर स्कूलों को ढूंढेगी और ब्योरा देंगी। उसके बाद जिलेभर के गैर मान्यता प्राप्त प्ले स्कूलों की रिपोर्ट एनसीपीसीआर के पास भेजी जाएगी। एनसीपीसीआर के आदेश मिलने के बाद गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई करते हुए बंद किया जा सकता है।
ऊषा कुमारी, डीपीओ, जिला बाल विकास कार्यालय।