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बदले हुए समीकरणों में दोनों मोर्चों पर विजयी रहे डॉ. कृष्ण मिड्ढा
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बदले समीकरणों में दोनों मोर्चों पर विजयी रहे डॉ. कृष्ण मिड्ढा
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जींद विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में पार्टी के अंदर व बाहर के विरोधियों पर जीत दर्ज कर भाजपा के उम्मीदवार डॉ. कृष्ण मिड्ढा विधायक बन गए हैं। जिस प्रकार पार्टी के पुराने दावेदारों को पछाड़कर डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने भाजपा का टिकट पक्का किया, ठीक उसी प्रकार दूसरी पार्टियों के विरोधियों को भी चुनावी मैदान में पटखनी दी।
हरियाणा राज्य के अस्तित्व में आने के बाद हुए विधानसभा के 13वें चुनाव में जींद की धरती पर पहली बार कमल खिला है। तमाम दावों और समीकरणों के बीच जिस प्रकार भाजपा ने जींद उपचुनाव में जीत हासिल की है, इससे प्रदेश की राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ेगा। पिछले दो चुनाव में जींद की सीट इनेलो के पास रही है, लेकिन भाजपा ने अब एक ही झटके में इसे छीन लिया है। वहीं 14 साल से जींद की अपनी पुरानी जमीन बचाने के लिए प्रयास कर रही कांग्रेस को इस बार भी तगड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला तीसरे नंबर पर रहे। अब तक हुए 13 चुनाव में दो बार 2005 व 2009 में इनेलो के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके अलावा एक बार हरियाणा विकास पार्टी से 1996 में बृजमोहन सिंगला व 1977 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर मांगेराम गुप्ता विधानसभा पहुंचे थे। यहां से छह बार कांग्रेस जीत चुकी है। ऐसे में अब बदले हुए समीकरणों में पहली बार भाजपा का कमल खिला है।
अब तक यह रहे जींद के विधायक
हरियाणा में पहला चुनाव 1967 में हुआ। इसमें कांग्रेस के दयाकृष्ण ने 26089 मत लेकर आजाद उम्मीदवार इंद्र सिंह को हरा दिया। इंद्र सिंह को 15548 मत मिले। 1968 में हुए चुनाव में कांग्रेस के दयाकृष्ण ने फिर से आजाद उम्मीदवार शंकर दास को हरा दिया। इस चुनाव में दयाकृष्ण ने 17733 और शंकर दास ने 16136 मत प्राप्त किए। 1972 के चुनाव में कांग्रेस (एस) के उम्मीदवार चौधरी दलसिंह ने 28281 मत प्राप्त कर कांग्रेस के दयाकृष्ण को हरा दिया। दयाकृष्ण को इस चुनाव में 21999 मत मिले। 1977 के चुनाव में चौधरी देवीलाल की लहर के बावजूद आजाद उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता 15751 वोट लेकर विधायक बने। उन्होंने जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रताप सिंह को हरा दिया। प्रताप सिंह को इस चुनाव में 9646 वोट मिले। 1982 के चुनाव में फिर से समीकरण बदले और लोकदल की टिकट पर बृजमोहन सिंगला ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। इस चुनाव में बृजमोहन सिंगल को 27045 व मांगेराम गप्ता को 26899 वोट मिले। 1987 में हुए चुनाव में परमानंद ने लोकदल की टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। परमानंद को 39323 और मांगेराम गुप्ता को 31221 वोट मिले। 1991 में कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने 35346 वोट लेकर जनता पार्टी के उम्मीदवार टेकराम को हरा दिया। टेकराम को 19213 वोट मिले। 1996 में हविपा की टिकट पर फिर से बृजमोहन सिंगला विधायक बने और उन्होंने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। बृजमोहन सिंगला को 40803 व मांगेराम गुप्ता को 22245 वोट मिले। 2000 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के गुलशन लाल को हरा दिया। मांगेराम गुप्ता को 41621 और गुलशन लाल को 36978 वोट मिले थे। 2005 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता इनेलो के सुरेंद्र बरवाला को हराकर विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव में गुप्ता को 43883 और बरवाला को 26448 वोट मिले। 2009 के चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने 34057 और कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को 26195 मत मिले। 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को हरा दिया। डॉ. मिड्ढा को इस चुनाव में 31631 व बरवाला को 29374 वोट मिले। इस चुनाव में भाजपा के डॉ. कृष्ण मिड्ढा को 50578 मत मिले। उन्होंने जेजेपी के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला को 12930 मतों के अंतर से हरा दिया। दिग्विजय चौटाला को 37648 मत मिले।
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इनेलो की फूट और भाजपा के बागी सांसद ने बदले समीकरण
जींद विधानसभा उपचुनाव में समीकरण मुख्य रूप से इनेलो की राजनीतिक और पारिवारिक फूट और भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी को माना जा रहा है। दरअसल जींद को इनेलो का गढ़ माना जाता है। इनेलो से अलग होकर बनी जननायक जनता पार्टी की आपसी लड़ाई के कारण दोनों दल चुनाव में हार गए। वहीं भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी की पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच ने जिस प्रकार 13582 मत प्राप्त किए हैं, वह अपने आप में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। जींद विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में पार्टी के अंदर व बाहर के विरोधियों पर जीत दर्ज कर भाजपा के उम्मीदवार डॉ. कृष्ण मिड्ढा विधायक बन गए हैं। जिस प्रकार पार्टी के पुराने दावेदारों को पछाड़कर डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने भाजपा का टिकट पक्का किया, ठीक उसी प्रकार दूसरी पार्टियों के विरोधियों को भी चुनावी मैदान में पटखनी दी।
हरियाणा राज्य के अस्तित्व में आने के बाद हुए विधानसभा के 13वें चुनाव में जींद की धरती पर पहली बार कमल खिला है। तमाम दावों और समीकरणों के बीच जिस प्रकार भाजपा ने जींद उपचुनाव में जीत हासिल की है, इससे प्रदेश की राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ेगा। पिछले दो चुनाव में जींद की सीट इनेलो के पास रही है, लेकिन भाजपा ने अब एक ही झटके में इसे छीन लिया है। वहीं 14 साल से जींद की अपनी पुरानी जमीन बचाने के लिए प्रयास कर रही कांग्रेस को इस बार भी तगड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला तीसरे नंबर पर रहे। अब तक हुए 13 चुनाव में दो बार 2005 व 2009 में इनेलो के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके अलावा एक बार हरियाणा विकास पार्टी से 1996 में बृजमोहन सिंगला व 1977 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर मांगेराम गुप्ता विधानसभा पहुंचे थे। यहां से छह बार कांग्रेस जीत चुकी है। ऐसे में अब बदले हुए समीकरणों में पहली बार भाजपा का कमल खिला है।
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अब तक यह रहे जींद के विधायक
हरियाणा में पहला चुनाव 1967 में हुआ। इसमें कांग्रेस के दयाकृष्ण ने 26089 मत लेकर आजाद उम्मीदवार इंद्र सिंह को हरा दिया। इंद्र सिंह को 15548 मत मिले। 1968 में हुए चुनाव में कांग्रेस के दयाकृष्ण ने फिर से आजाद उम्मीदवार शंकर दास को हरा दिया। इस चुनाव में दयाकृष्ण ने 17733 और शंकर दास ने 16136 मत प्राप्त किए। 1972 के चुनाव में कांग्रेस (एस) के उम्मीदवार चौधरी दलसिंह ने 28281 मत प्राप्त कर कांग्रेस के दयाकृष्ण को हरा दिया। दयाकृष्ण को इस चुनाव में 21999 मत मिले। 1977 के चुनाव में चौधरी देवीलाल की लहर के बावजूद आजाद उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता 15751 वोट लेकर विधायक बने। उन्होंने जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रताप सिंह को हरा दिया। प्रताप सिंह को इस चुनाव में 9646 वोट मिले। 1982 के चुनाव में फिर से समीकरण बदले और लोकदल की टिकट पर बृजमोहन सिंगला ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। इस चुनाव में बृजमोहन सिंगल को 27045 व मांगेराम गप्ता को 26899 वोट मिले। 1987 में हुए चुनाव में परमानंद ने लोकदल की टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। परमानंद को 39323 और मांगेराम गुप्ता को 31221 वोट मिले। 1991 में कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने 35346 वोट लेकर जनता पार्टी के उम्मीदवार टेकराम को हरा दिया। टेकराम को 19213 वोट मिले। 1996 में हविपा की टिकट पर फिर से बृजमोहन सिंगला विधायक बने और उन्होंने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। बृजमोहन सिंगला को 40803 व मांगेराम गुप्ता को 22245 वोट मिले। 2000 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के गुलशन लाल को हरा दिया। मांगेराम गुप्ता को 41621 और गुलशन लाल को 36978 वोट मिले थे। 2005 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता इनेलो के सुरेंद्र बरवाला को हराकर विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव में गुप्ता को 43883 और बरवाला को 26448 वोट मिले। 2009 के चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने 34057 और कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को 26195 मत मिले। 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को हरा दिया। डॉ. मिड्ढा को इस चुनाव में 31631 व बरवाला को 29374 वोट मिले। इस चुनाव में भाजपा के डॉ. कृष्ण मिड्ढा को 50578 मत मिले। उन्होंने जेजेपी के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला को 12930 मतों के अंतर से हरा दिया। दिग्विजय चौटाला को 37648 मत मिले।
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इनेलो की फूट और भाजपा के बागी सांसद ने बदले समीकरण
जींद विधानसभा उपचुनाव में समीकरण मुख्य रूप से इनेलो की राजनीतिक और पारिवारिक फूट और भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी को माना जा रहा है। दरअसल जींद को इनेलो का गढ़ माना जाता है। इनेलो से अलग होकर बनी जननायक जनता पार्टी की आपसी लड़ाई के कारण दोनों दल चुनाव में हार गए। वहीं भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी की पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच ने जिस प्रकार 13582 मत प्राप्त किए हैं, वह अपने आप में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।