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पूरे प्रदेश की निगाहें जींद पर, जींद में छायी रहस्यमयी शांति
Updated Sat, 17 Nov 2018 12:29 AM IST
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पूरे प्रदेश की निगाहें जींद पर, जींद में छायी रहस्यमयी शांति
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हरियाणा की राजनीति के कुरुक्षेत्र माने जाने वाले बांगर की धरती जींद से एक बार फिर प्रदेश की राजनीतिक दशा व इनेलो काभविष्य तय होगा। आज पूरे प्रदेश की निगाहें जींद पर है। लेकिन जींद में एक रहस्यमयी शांति है। शांति भी ऐसी की किसी भी बड़े राजनीतिक आयोजन से पहले जो माहौल होता है, वह बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा। लेकिन लोगों का मानना भीड़ आएगी, ऐसी आएगी कि रिकॉर्ड टूूटेगा। शनिवार को अजय चौटाला, दुष्यंत व दिग्विजय के सामने विकल्पों में से कौन सा फैसला लिया जाएगा, यह लोगों के लिए एक रात पहले भी रहस्य बना हुआ है। शुक्रवार रात तक खुद दुष्यंत चौटाला ने अपने पत्ते नहीं खोले और बस इतना कहा कि आप शनिवार तक का इंतजार किजिए। वहीं सब कुछ बताया जाएगा।
इनेलो से अपने बेटों के निष्कासन के बाद याचना नहीं युद्ध की रणनीति पर निकले अजय चौटाला ने जींद में अपने दादा की उसी जगह को रैली के लिए चुना, जहां से कभी देवीलाल ने राजनीतिक शंखनाद किया था। उसी के बाद से ही इस हुडा ग्राउंड का नाम बदलकर देवी लाल ग्राउंड हो गया था। शुक्रवार सांय हुडा ग्राउंड में महज मंच बनाया गया है। जहां केवल टेंट हाउस मालिक के कर्मचारी काम में व्यस्त हैं। यहां इनेलो कार्यकर्ताओं की कोई भीड़ नजर नहीं आ रही। ना ही किसी बड़े आयोजन जैसी कोई तैयारी दिखी। इससे कुछ दूरी पर स्थित इनेलो कार्यालय में भी अजीब सी शांति मिली। कार्यालय के प्रवेश द्वार के निकट कमरे में सात-आठ लोग हुक्का गुड़गुड़ाते नजर आए। वहीं जहां दीप पैलेस में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होनी है, वहां पर भी हाल के अंदर महज पैलेस कर्मचारी लाइटें जांच रहा था। एक बुजुर्ग हरी पगड़ी पहनें एक युवक से बतियाते नजर आए। इस तरह से तीनों जगहों पर छाई रहस्यमयी शांति ब्यां कर रही है कि शनिवार को यहां बड़ा रहस्योद्घाट होना है। देवी लाल ग्राउंड में कार्यकर्ता बैठक आयोजन स्थल पर पहुंचे एक प्रदेश स्तरीय युवा नेता ने कहा कि इस आयोजन के लिए ना तो किसी को गाड़ी भेजी जा रही, ना ही कोई विशेष व्यवस्था। दुष्यंत, दिग्विजय व अजय चौटाला को चाहने वाले खुद चलकर आएंगे। उन्हें महज इतना पता है कि जींद में कोई आयोजन होना है। इसमें क्या होगा। किसी को नहीं पता। अजय चौटाला ने खुद उनसे कहा है कि जो कार्यकर्ता फाइनल करेंगे, वही जींद से ऐलान किया जाएगा। जो होगा, वहीं से तय होगा।
तीन विकल्पों में से एक पहले पर ज्यादा रहेगा जोर:-राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजय चौटाला, दुष्यंत व दिग्विजय के सामने तीन विकल्प हैं। सबसे पहला प्रदेश भर से इनेलो के अधिकतर नेता व पदाधिकारी जुटाकर इनेलो में अपना वर्चस्व कायम करें और चूंकि विधायक कहीं नजरबंद बताए जा रहे हैं, इसीलिए झंडे व पार्टी के चुनाव चिन्ह के लिए कानूनी लड़ाई लड़ें। दूसरा विकल्प नई पार्टी का गठन करें या तीसरा विकल्प भाजपा या अन्य किसी दल में जाने का फैसला लें। इनमें से तीसरे विकल्प के आसार कम नजर आ रहे हैं। फैसला क्या होगा, यह रहस्य बना हुआ है। लोगों में इसी कारण उत्सुकता है कि आखिर शनिवार को जींद में क्या होगा? पूरे प्रदेश की निगाहें आज जींद पर हैं। खुद सांसद दुष्यंत चौटाला ने अपने पत्ते नहीं खोले। उन्होंने महज इतना कहा कि इंतजार किजिए। जो भी होगा, जींद में फैसला लिया जाएगा। कितने विधायक इस बैठक में आ रहे हैं, इस सवाल पर सांसद ने बस इतना कहा कि वे अभी कुछ नहीं कह सकते।
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चंडीगढ़ तो डोगे-डोगे जा रे हैं...जनता तो आड़े ए आवेगी
देवी लाल मैदान में शुक्रवार सांय कुछ बुजुर्ग जिन्होंने ताऊ देवी लाल को भी यहां रैली करते देखा था। वे बैंच पर बैठकर बात करते नजर आए। बात-बात में पूछा तो करीब 75 वर्षीय ताऊ नफे सिंह खर्ब ने कहा कि बेटा चंडीगढ़ में तो डोगे-डोगे जा रे सैं..आड़े जनता आवैगी। इसी प्रकार से ताऊ देवीलाल की रैली के समय 36 साल के रहे इस समय बुर्जुग हो चले सूरजमल ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जैसे नेता उस रैली में आए थे। रामकुमार नैन ने कहा कि उन्होंने भी ताऊ देवी लाल की रैली सुनी थीं। इसके बाद उन्होंने हरियाणा में स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाई थी। दुष्यंत के साथ जनता है। शनिवार को ना जाने कितनी भीड़ जुटेगी, लोग आएंगे। वे दुष्यंत को पसंद करते हैं।
हरियाणा की राजनीति का कुरुक्षेत्र रहा है जींद, अपना संसदीय क्षेत्र होने का भी मिलेगा दुष्यंत को लाभ:-दुष्यंत चौटाला हिसार से सांसद हैं। जींद भी हिसार लोकसभा क्षेत्र में आता है। जींद में आयोजन का सांसद को काफी लाभ होगा। वहीं पूरा जींद जिला इनेलो का गढ़ माना जाता है। भीड़ के लिहाज से स्थानीय लोग यही मान कर चल रहे हैं कि आयोजन स्थल छोटा पड़ जाएगा। सांसद को इतने चाहने वाले हैं कि यहां भारी भीड़ उमड़ेगी। यहां उचाना व नरवाना से ओमप्रकाश चौटाला चुनाव लड़ते रहे हैं। ताऊ देवी लाल के समय से ही जींद हरियाणा की राजनीति का केंद्र बिंदू रहा है। एक बार फिर जींद की धरती से तय होगा कि ताऊ देवी लाल की राजनीतिक विरासत का वारिस कौन होगा? चरण सिंह से अलग होकर देवी लाल, देवीलाल द्वारा निष्कासित किए जाने के बाद ओमप्रकाश चौटाला ने जिस धरती को संघर्ष का केंद्र बनाया था, उनके पुत्र अजय व पौत्र दुष्यंत भी समर्थन जुटाने व न्याय पाने के लिए जुट रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हरियाणा की राजनीति के कुरुक्षेत्र माने जाने वाले बांगर की धरती जींद से एक बार फिर प्रदेश की राजनीतिक दशा व इनेलो काभविष्य तय होगा। आज पूरे प्रदेश की निगाहें जींद पर है। लेकिन जींद में एक रहस्यमयी शांति है। शांति भी ऐसी की किसी भी बड़े राजनीतिक आयोजन से पहले जो माहौल होता है, वह बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा। लेकिन लोगों का मानना भीड़ आएगी, ऐसी आएगी कि रिकॉर्ड टूूटेगा। शनिवार को अजय चौटाला, दुष्यंत व दिग्विजय के सामने विकल्पों में से कौन सा फैसला लिया जाएगा, यह लोगों के लिए एक रात पहले भी रहस्य बना हुआ है। शुक्रवार रात तक खुद दुष्यंत चौटाला ने अपने पत्ते नहीं खोले और बस इतना कहा कि आप शनिवार तक का इंतजार किजिए। वहीं सब कुछ बताया जाएगा।
इनेलो से अपने बेटों के निष्कासन के बाद याचना नहीं युद्ध की रणनीति पर निकले अजय चौटाला ने जींद में अपने दादा की उसी जगह को रैली के लिए चुना, जहां से कभी देवीलाल ने राजनीतिक शंखनाद किया था। उसी के बाद से ही इस हुडा ग्राउंड का नाम बदलकर देवी लाल ग्राउंड हो गया था। शुक्रवार सांय हुडा ग्राउंड में महज मंच बनाया गया है। जहां केवल टेंट हाउस मालिक के कर्मचारी काम में व्यस्त हैं। यहां इनेलो कार्यकर्ताओं की कोई भीड़ नजर नहीं आ रही। ना ही किसी बड़े आयोजन जैसी कोई तैयारी दिखी। इससे कुछ दूरी पर स्थित इनेलो कार्यालय में भी अजीब सी शांति मिली। कार्यालय के प्रवेश द्वार के निकट कमरे में सात-आठ लोग हुक्का गुड़गुड़ाते नजर आए। वहीं जहां दीप पैलेस में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होनी है, वहां पर भी हाल के अंदर महज पैलेस कर्मचारी लाइटें जांच रहा था। एक बुजुर्ग हरी पगड़ी पहनें एक युवक से बतियाते नजर आए। इस तरह से तीनों जगहों पर छाई रहस्यमयी शांति ब्यां कर रही है कि शनिवार को यहां बड़ा रहस्योद्घाट होना है। देवी लाल ग्राउंड में कार्यकर्ता बैठक आयोजन स्थल पर पहुंचे एक प्रदेश स्तरीय युवा नेता ने कहा कि इस आयोजन के लिए ना तो किसी को गाड़ी भेजी जा रही, ना ही कोई विशेष व्यवस्था। दुष्यंत, दिग्विजय व अजय चौटाला को चाहने वाले खुद चलकर आएंगे। उन्हें महज इतना पता है कि जींद में कोई आयोजन होना है। इसमें क्या होगा। किसी को नहीं पता। अजय चौटाला ने खुद उनसे कहा है कि जो कार्यकर्ता फाइनल करेंगे, वही जींद से ऐलान किया जाएगा। जो होगा, वहीं से तय होगा।
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तीन विकल्पों में से एक पहले पर ज्यादा रहेगा जोर:-राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजय चौटाला, दुष्यंत व दिग्विजय के सामने तीन विकल्प हैं। सबसे पहला प्रदेश भर से इनेलो के अधिकतर नेता व पदाधिकारी जुटाकर इनेलो में अपना वर्चस्व कायम करें और चूंकि विधायक कहीं नजरबंद बताए जा रहे हैं, इसीलिए झंडे व पार्टी के चुनाव चिन्ह के लिए कानूनी लड़ाई लड़ें। दूसरा विकल्प नई पार्टी का गठन करें या तीसरा विकल्प भाजपा या अन्य किसी दल में जाने का फैसला लें। इनमें से तीसरे विकल्प के आसार कम नजर आ रहे हैं। फैसला क्या होगा, यह रहस्य बना हुआ है। लोगों में इसी कारण उत्सुकता है कि आखिर शनिवार को जींद में क्या होगा? पूरे प्रदेश की निगाहें आज जींद पर हैं। खुद सांसद दुष्यंत चौटाला ने अपने पत्ते नहीं खोले। उन्होंने महज इतना कहा कि इंतजार किजिए। जो भी होगा, जींद में फैसला लिया जाएगा। कितने विधायक इस बैठक में आ रहे हैं, इस सवाल पर सांसद ने बस इतना कहा कि वे अभी कुछ नहीं कह सकते।
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चंडीगढ़ तो डोगे-डोगे जा रे हैं...जनता तो आड़े ए आवेगी
देवी लाल मैदान में शुक्रवार सांय कुछ बुजुर्ग जिन्होंने ताऊ देवी लाल को भी यहां रैली करते देखा था। वे बैंच पर बैठकर बात करते नजर आए। बात-बात में पूछा तो करीब 75 वर्षीय ताऊ नफे सिंह खर्ब ने कहा कि बेटा चंडीगढ़ में तो डोगे-डोगे जा रे सैं..आड़े जनता आवैगी। इसी प्रकार से ताऊ देवीलाल की रैली के समय 36 साल के रहे इस समय बुर्जुग हो चले सूरजमल ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जैसे नेता उस रैली में आए थे। रामकुमार नैन ने कहा कि उन्होंने भी ताऊ देवी लाल की रैली सुनी थीं। इसके बाद उन्होंने हरियाणा में स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाई थी। दुष्यंत के साथ जनता है। शनिवार को ना जाने कितनी भीड़ जुटेगी, लोग आएंगे। वे दुष्यंत को पसंद करते हैं।
हरियाणा की राजनीति का कुरुक्षेत्र रहा है जींद, अपना संसदीय क्षेत्र होने का भी मिलेगा दुष्यंत को लाभ:-दुष्यंत चौटाला हिसार से सांसद हैं। जींद भी हिसार लोकसभा क्षेत्र में आता है। जींद में आयोजन का सांसद को काफी लाभ होगा। वहीं पूरा जींद जिला इनेलो का गढ़ माना जाता है। भीड़ के लिहाज से स्थानीय लोग यही मान कर चल रहे हैं कि आयोजन स्थल छोटा पड़ जाएगा। सांसद को इतने चाहने वाले हैं कि यहां भारी भीड़ उमड़ेगी। यहां उचाना व नरवाना से ओमप्रकाश चौटाला चुनाव लड़ते रहे हैं। ताऊ देवी लाल के समय से ही जींद हरियाणा की राजनीति का केंद्र बिंदू रहा है। एक बार फिर जींद की धरती से तय होगा कि ताऊ देवी लाल की राजनीतिक विरासत का वारिस कौन होगा? चरण सिंह से अलग होकर देवी लाल, देवीलाल द्वारा निष्कासित किए जाने के बाद ओमप्रकाश चौटाला ने जिस धरती को संघर्ष का केंद्र बनाया था, उनके पुत्र अजय व पौत्र दुष्यंत भी समर्थन जुटाने व न्याय पाने के लिए जुट रहे हैं।