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दुग्ध उत्पादकों के खाते में सीएम द्वारा दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहन राशि डाले जाने से दुग्ध समिति के सदस्य परेशान
Updated Thu, 05 Apr 2018 12:45 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा के बाद दुग्ध समिति के सदस्यों ने मिल्क प्लांट के सीईओ से मिलकर प्रोत्साहन राशि समितियों को देने की मांग की है। वहीं वीटा अधिकारियों का कहना है कि यह राशि सीधे दुग्ध उत्पादक किसानों के बैंक खाते में ही जाएगी। इस पर सहकारी समिति संचालकों ने वीटा प्लांट अधिकारियों के खिलाफ रोष जताया। इस मांग को लेकर बुधवार को दर्जनों समितियों के संचालक वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ राजेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे।
दुग्ध समिति के संचालकों ने वीटा मिल्क प्लांट में पहुंचकर सीईओ के माध्यम से सीएम के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि सरकार द्वारा सीधे दुग्ध उत्पादकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि से दुग्ध उत्पादकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गांव में ज्यादातर लोग कम पढ़े-लिखे हैं, जिसके चलते ज्यादातर लोगों के बैंकों में खाते नहीं हैं। खाते नहीं होने के कारण इनका पैसा सरकार के पास ही अटका रहेगा। जिनके खाते हैं वह लोग बैंकों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते। सभी दुग्ध उत्पादकों का समिति के सदस्यों के अच्छा व्यवहार है। इन लोगों ने कहा कि बैंकों में होने वाली परेशानी से तंग आकर दुग्ध उत्पादक उनको दूध देना बंद कर देंगे। इस समस्या के समाधान की मांग करते हुए उन्होंने दुग्ध की दस दिन में आने वाली राशि के साथ ही यह राशि सीधे समिति के खाते में डाली जाए ताकि दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध की समय पर कीमत मिल सके। इन मांगों को लेकर उन्होंने वीटा मिल्क प्लांट में कई घंटो तक हंगामा खड़ा किया।
यह है प्रोत्साहन योजना
प्रदेश सरकार ने दुग्ध उत्पादकों के प्रोत्साहन के लिए योजना बनाई है। इसके तहत दूध के फैट 60 से अधिक होने पर प्रति लीटर पांच रुपये व इससे कम होने पर प्रति लीटर चार रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह योजना अप्रैल से सितंबर माह तक चलेगी। फिलहाल सहकारी समितियों में 100 फैट वाला दूध 48 रुपये प्रति लीटर खरीदा जा रहा है। सीएम द्वारा दी गई प्रोत्साहन राशि के बाद दूध का रेट उत्पादकों के लिए बढ़कर 53 रुपये प्रति लीटर होगा। यह राशि सीधे किसान के खाते में डाली जाने का प्रावधान है।
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सीईओ को मिलने के लिए किया हंगामा
दुग्ध समिति के दर्जनों लोगों ने वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ पर समस्याओं का समाधान करवाने की बजाए उनको मिलने से मना करने का भी आरोप लगाते हुए प्लांट में हंगामा खड़ा कर दिया। इन लोगों ने सीईओ से मिलने के लिए घंटों तक इंतजार करवाने का भी आरोप लगाया
बाक्स
जिले में 650 दुग्ध समिति
जिले में लगभग 650 दुग्ध समिति समिति हैं इन सभी समितियों से प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर के करीब दुध वीटा मिल्क प्लांट में पहुंचाया जाता है। इन समितियों के 26 रूट बनाए गए हैं। प्रत्येक रूट पर 25 समिति हैं। जींद मिल्क प्लांट में प्रति दिन डेढ़ लाख लीटर दूध आता है।
समितियों के माध्यम से जाए पैसा
किसान दूध सहकारी समितियों के माध्यम से ही मिल्क प्लांट में भेजता है। किसानों को भुगतान व अन्य जिम्मेदारी सहकारी समितियों की होती है। ऐसे में यह पैसा समितियों के माध्यम से किसानों तक जाना चाहिए, ताकि किसानों को पूरा लाभ मिल सके।
शमशेर भौंगरा, सहकारी समिति संचालक।
नियमों के अनुसार डाले जाएंगे पैसे
सरकार ने दुग्ध उत्पादकों को बढ़ावा देने के लिए पांच रुपये प्रति लीटर एक अप्रैल से सितंबर 2018 तक देने का निर्णय लिया है। सीएम के आदेशानुसार इन दुग्ध उत्पादकों के खाते में यह राशि प्रत्यक्ष रूप से डाली जाएगा। अगर सरकार की तरफ से इसमें को बदलाव हुआ तो उसी के अनुसार यह पैसा दिया जाएगा।
राजेंद्र सिंह, सीईओ, वीटा मिल्क प्लांट जींद।
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जींद।
प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा के बाद दुग्ध समिति के सदस्यों ने मिल्क प्लांट के सीईओ से मिलकर प्रोत्साहन राशि समितियों को देने की मांग की है। वहीं वीटा अधिकारियों का कहना है कि यह राशि सीधे दुग्ध उत्पादक किसानों के बैंक खाते में ही जाएगी। इस पर सहकारी समिति संचालकों ने वीटा प्लांट अधिकारियों के खिलाफ रोष जताया। इस मांग को लेकर बुधवार को दर्जनों समितियों के संचालक वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ राजेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे।
दुग्ध समिति के संचालकों ने वीटा मिल्क प्लांट में पहुंचकर सीईओ के माध्यम से सीएम के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि सरकार द्वारा सीधे दुग्ध उत्पादकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि से दुग्ध उत्पादकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गांव में ज्यादातर लोग कम पढ़े-लिखे हैं, जिसके चलते ज्यादातर लोगों के बैंकों में खाते नहीं हैं। खाते नहीं होने के कारण इनका पैसा सरकार के पास ही अटका रहेगा। जिनके खाते हैं वह लोग बैंकों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते। सभी दुग्ध उत्पादकों का समिति के सदस्यों के अच्छा व्यवहार है। इन लोगों ने कहा कि बैंकों में होने वाली परेशानी से तंग आकर दुग्ध उत्पादक उनको दूध देना बंद कर देंगे। इस समस्या के समाधान की मांग करते हुए उन्होंने दुग्ध की दस दिन में आने वाली राशि के साथ ही यह राशि सीधे समिति के खाते में डाली जाए ताकि दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध की समय पर कीमत मिल सके। इन मांगों को लेकर उन्होंने वीटा मिल्क प्लांट में कई घंटो तक हंगामा खड़ा किया।
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यह है प्रोत्साहन योजना
प्रदेश सरकार ने दुग्ध उत्पादकों के प्रोत्साहन के लिए योजना बनाई है। इसके तहत दूध के फैट 60 से अधिक होने पर प्रति लीटर पांच रुपये व इससे कम होने पर प्रति लीटर चार रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह योजना अप्रैल से सितंबर माह तक चलेगी। फिलहाल सहकारी समितियों में 100 फैट वाला दूध 48 रुपये प्रति लीटर खरीदा जा रहा है। सीएम द्वारा दी गई प्रोत्साहन राशि के बाद दूध का रेट उत्पादकों के लिए बढ़कर 53 रुपये प्रति लीटर होगा। यह राशि सीधे किसान के खाते में डाली जाने का प्रावधान है।
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सीईओ को मिलने के लिए किया हंगामा
दुग्ध समिति के दर्जनों लोगों ने वीटा मिल्क प्लांट के सीईओ पर समस्याओं का समाधान करवाने की बजाए उनको मिलने से मना करने का भी आरोप लगाते हुए प्लांट में हंगामा खड़ा कर दिया। इन लोगों ने सीईओ से मिलने के लिए घंटों तक इंतजार करवाने का भी आरोप लगाया
बाक्स
जिले में 650 दुग्ध समिति
जिले में लगभग 650 दुग्ध समिति समिति हैं इन सभी समितियों से प्रतिदिन डेढ़ लाख लीटर के करीब दुध वीटा मिल्क प्लांट में पहुंचाया जाता है। इन समितियों के 26 रूट बनाए गए हैं। प्रत्येक रूट पर 25 समिति हैं। जींद मिल्क प्लांट में प्रति दिन डेढ़ लाख लीटर दूध आता है।
समितियों के माध्यम से जाए पैसा
किसान दूध सहकारी समितियों के माध्यम से ही मिल्क प्लांट में भेजता है। किसानों को भुगतान व अन्य जिम्मेदारी सहकारी समितियों की होती है। ऐसे में यह पैसा समितियों के माध्यम से किसानों तक जाना चाहिए, ताकि किसानों को पूरा लाभ मिल सके।
शमशेर भौंगरा, सहकारी समिति संचालक।
नियमों के अनुसार डाले जाएंगे पैसे
सरकार ने दुग्ध उत्पादकों को बढ़ावा देने के लिए पांच रुपये प्रति लीटर एक अप्रैल से सितंबर 2018 तक देने का निर्णय लिया है। सीएम के आदेशानुसार इन दुग्ध उत्पादकों के खाते में यह राशि प्रत्यक्ष रूप से डाली जाएगा। अगर सरकार की तरफ से इसमें को बदलाव हुआ तो उसी के अनुसार यह पैसा दिया जाएगा।
राजेंद्र सिंह, सीईओ, वीटा मिल्क प्लांट जींद।