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चार साल से नहीं किया खंडहर इमारतों का सर्वे, मौत के गलियारों में रह रहे लोग
Updated Thu, 15 Jun 2017 12:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
नगर परिषद की लापरवाही शहर के लोगों पर भारी पड़ सकती है। शहर के बीचोंबीच काल बन कर खड़ी खंडहर इमारतों पर कार्रवाई तो दूर, नगर परिषद ने चार साल से शहर में कंडम भवनों का सर्वे तक नहीं किया है। अब मानसून का सीजन सिर पर है और नगर परिषद के पास इन भवनों की कोई योजना नहीं है। शहर में दर्जन भर ऐसी इमारतें हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
दरअसल, बारिश के मौसम से पहले हर साल नगर परिषद को लोगों के लिए खतरा बन चुके भवनों का सर्वे कराना होता है। इन भवनों की मजबूती का निर्धारण किया जाता है और इसके अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाती है। लेकिन जींद नगर परिषद पुराने और जर्जर भवनों की कोई सुध नहीं ले रहा है। अमर उजाला ने जब शहर में जर्जर भवनों का सर्वे किया तो कई इमारतें ऐसी मिलीं, जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकती हैं।
शहर के बीचोंबीच बना है मौत का गलियारा
शहर में करीब दर्जन भर ऐसी इमारतें हैं, जो बारिश के मौसम में गिर सकती हैं। अधिकतर इमारतों में वर्षों से कोई नहीं रह रहा है और इन भवनों की मरम्मत तक नहीं हुई है। कई भवनों से ईंटें निकल कर गिरती रहती हैं। इन इमारतों के आसपास रहने वालों की मानें तो अक्सर इन भवनों से ईंट या अन्य मलबा भी गिरता रहता है, जिससे हादसे का डर रहता है।
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काफी पुराने हैं भवन
शहर के दखनिया मोहल्ला, तांगा चौक व पुराने किले के आसपास कुछ भवन तो ऐसे हैं, जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं। लोगों का कहना है कि इनमें से कई भवन तो जींद रियासत के समय के हैं। इसके इसके बावजूद प्रशासन इन भवनों की सुध नहीं ले रहा है। जहां-जहां ऐसे भवन हैं, वहां गलियां इतनी संकरी हैं कि यदि कोई हादसा होता है तो यहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा।
प्रशासन नहीं ले रहा सुध
आशरी गेट पर कई ऐसी जर्जर इमारतें हैं, जो लोगों के लिए खतरा बनी हुई हैं। कई साल से न तो इमारतों के मालिक और न ही प्रशासन इनकी सुध ले रहा है। इन भवनों को गिराया जाना चाहिए, ताकि लोगों को लिए आफत नहीं बनें।
जयभगवान, आशरी गेट
शहर में काफी भवन ऐसे हैं, जो जर्जर हालात में हैं। इन भवनों के पास से निकलने में भी डर लगता है। खासकर बारिश के मौसम में बच्चों को इस रास्ते नहीं निकाला जा सकता। इन पर प्रशासन को जल्द ही कोई कार्रवाई करनी चाहिए।
होशियार सिंह, नाइयों वाली गली
किया जाएगा सर्वे
शहर में जर्जर भवनों के लिए कोई सर्वे नहीं हुआ है, लेकिन अब बारिश के मौसम को देखते हुए इन भवनों का सर्वे किया जाएगा। जो भवन लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं, उनको गिराया जाएगा। ऐसे लोगों को नोटिस देकर आगे की कार्रवाई होगी।
सतीश गर्ग, एमई, नगर परिषद जींद
चार साल से नहीं किया खंडहर इमारतों का सर्वे, मौत के गलियारों में रह रहे लोग
मानूसन के सीजन में हादसे का अंदेशा, नगर परिषद ने नहीं कराया है सर्वे
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जींद।
नगर परिषद की लापरवाही शहर के लोगों पर भारी पड़ सकती है। शहर के बीचोंबीच काल बन कर खड़ी खंडहर इमारतों पर कार्रवाई तो दूर, नगर परिषद ने चार साल से शहर में कंडम भवनों का सर्वे तक नहीं किया है। अब मानसून का सीजन सिर पर है और नगर परिषद के पास इन भवनों की कोई योजना नहीं है। शहर में दर्जन भर ऐसी इमारतें हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
दरअसल, बारिश के मौसम से पहले हर साल नगर परिषद को लोगों के लिए खतरा बन चुके भवनों का सर्वे कराना होता है। इन भवनों की मजबूती का निर्धारण किया जाता है और इसके अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाती है। लेकिन जींद नगर परिषद पुराने और जर्जर भवनों की कोई सुध नहीं ले रहा है। अमर उजाला ने जब शहर में जर्जर भवनों का सर्वे किया तो कई इमारतें ऐसी मिलीं, जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकती हैं।
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शहर के बीचोंबीच बना है मौत का गलियारा
शहर में करीब दर्जन भर ऐसी इमारतें हैं, जो बारिश के मौसम में गिर सकती हैं। अधिकतर इमारतों में वर्षों से कोई नहीं रह रहा है और इन भवनों की मरम्मत तक नहीं हुई है। कई भवनों से ईंटें निकल कर गिरती रहती हैं। इन इमारतों के आसपास रहने वालों की मानें तो अक्सर इन भवनों से ईंट या अन्य मलबा भी गिरता रहता है, जिससे हादसे का डर रहता है।
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काफी पुराने हैं भवन
शहर के दखनिया मोहल्ला, तांगा चौक व पुराने किले के आसपास कुछ भवन तो ऐसे हैं, जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं। लोगों का कहना है कि इनमें से कई भवन तो जींद रियासत के समय के हैं। इसके इसके बावजूद प्रशासन इन भवनों की सुध नहीं ले रहा है। जहां-जहां ऐसे भवन हैं, वहां गलियां इतनी संकरी हैं कि यदि कोई हादसा होता है तो यहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा।
प्रशासन नहीं ले रहा सुध
आशरी गेट पर कई ऐसी जर्जर इमारतें हैं, जो लोगों के लिए खतरा बनी हुई हैं। कई साल से न तो इमारतों के मालिक और न ही प्रशासन इनकी सुध ले रहा है। इन भवनों को गिराया जाना चाहिए, ताकि लोगों को लिए आफत नहीं बनें।
जयभगवान, आशरी गेट
शहर में काफी भवन ऐसे हैं, जो जर्जर हालात में हैं। इन भवनों के पास से निकलने में भी डर लगता है। खासकर बारिश के मौसम में बच्चों को इस रास्ते नहीं निकाला जा सकता। इन पर प्रशासन को जल्द ही कोई कार्रवाई करनी चाहिए।
होशियार सिंह, नाइयों वाली गली
किया जाएगा सर्वे
शहर में जर्जर भवनों के लिए कोई सर्वे नहीं हुआ है, लेकिन अब बारिश के मौसम को देखते हुए इन भवनों का सर्वे किया जाएगा। जो भवन लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं, उनको गिराया जाएगा। ऐसे लोगों को नोटिस देकर आगे की कार्रवाई होगी।
सतीश गर्ग, एमई, नगर परिषद जींद
चार साल से नहीं किया खंडहर इमारतों का सर्वे, मौत के गलियारों में रह रहे लोग
मानूसन के सीजन में हादसे का अंदेशा, नगर परिषद ने नहीं कराया है सर्वे