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Jind News: आग की भेंट चढ़े 3.97 लाख के 790 पेड़-पौधे
Mon, 26 May 2025 01:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 26 May 2025 01:26 AM IST
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25जेएनडी08-समैण-फरैण रोड पर आग से जले पौधे। संवाद
जींद। जिले में सड़कों के किनारे खड़े 3.97 लाख रुपये के करीब पेड़-पौधे जल गए हैं। रोजाना खेतों में आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। इसके कारण सड़कों के किनारे खड़े पेड़-पौधे आग की भेंट चढ़ रहे हैं। आग लगाने वाले लोगों पर कार्रवाई करने के लिए वन विभाग गंभीर नहीं है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी तक एक भी पेड़ नहीं जला है जबकि जिले में हाईवे और दूसरे रास्तों पर खड़े 790 पेड़-पौधे जल गए हैं।
जिला में नरवाना क्षेत्र में पेड़-पौधे जलने की घटनाएं ज्यादा हुई है। ऐसे में लोगों को शुद्ध हवा कैसे मिलेगी। शुद्ध हवा देने वाले सड़कों के किनारे खड़े पेड़-पौधे आग के हवाले किए जा रहे हैं। वन विभाग प्रति पौधा 500 रुपये खर्च करके हर वर्ष सड़कों के किनारे पौधे लगाता है, लेकिन हर साल यह पौधे बड़े होने से पहले ही आग की भेंट चढ़ जाते हैं। ऐसे में हर साल वन विभाग को लाखों रुपये का नुकसान होता है।
इससे वातावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है साथ में हरे-भरे पेड़-पौधे जलने से हरियाली को भी ग्रहण लग रहा है। अधिकांश मार्गों पर सड़क किनारे आग लगने से वन विभाग के अलावा किसानों के पेड़ भी जल रहे हैं। इस ओर यदि थोड़ा ध्यान दिया जाए तो लाखों पौधों को बचाया जा सकता है। जिले में अधिकांश मार्गों पर सड़क किनारे खड़े पेड़-पौधों को आग से झुलसा हुआ देखा जा सकता है।
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जिला के नरवाना-समैण रोड, कैथल रोड, हैबतपुर-खोखरी रोड, सफीदों रोड, बरवाला रोड, असंध रोड, गोहाना रोड और नरवाना से जींद के बीच रेलमार्ग के किनारे काफी संख्या में पेड़ जलकर नष्ट हो गए हैं।
पिछले साल विभाग ने की थी कार्रवाई
वन विभाग ने पिछले साल पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस में अलग-अलग 6 मामले दर्ज करवाए थे। इसको लेकर एक एफआईआर गढ़ी थाना में दर्ज करवाई थी। वहीं नरवाना माइनर रोड पर भी विभाग के 35 पेड़ थे, जहां किसी अज्ञात ने आग लगा दी और वह जल गए थे। इस मामले में भी सदर थाना नरवाना ने मामला दर्ज कर लिया है।
हिसार-चंडीगढ़ राजमार्ग पर दबलैन पावर हाउस के पास भी एक व्यक्ति ने अपने खेत में आग लगा दी। यह आग हाईवे के किनारे लगे पौधों तक पहुंची थी। इससे 12 पौधे जल गए। वन विभाग ने व्यक्ति के खिलाफ चालान कर जुर्माना वसूला था। वहीं नरवाना-समैण रोड के किनारे दबलैन गांव के पास भी 250 से ज्यादा पौधे जलाए गए थे, जिसकी पुलिस को शिकायत दी गई थी।
पेड़-पौधों तक खेतों से पहुंच रही आग
किसान गेहूं के फानों, खेतों के कोनों, मेढ़ आदि पर उगे खरपतवार को जलाने के लिए आग लगा देते हैं ताकि अगली फसल की बिजाई अच्छी तरह हो सके। खरपतवार और घास-फुस जलाने के लिए लगाई गई आग सड़क किनारे खड़े पेड़-पौधों तक पहुंच जाती है। ऐसे में पौधे और पेड़ आग की चपेट में आकर जल जाते हैं। इससे पौधे तो बिल्कुल खत्म हो जाते हैंं, वहीं सूखे पेड़ों में आग लगने से कभी-कभार सड़कों की तरफ आ गिरते हैं और हादसों का कारण बनते हैं। जिले से गुजरने वाले दिल्ली-पटियाला राजमार्ग स्थित बेलरखा, उचाना, गढ़ी, जुलाना, गतौली के पास 350 से ज्यादा पौधे आग लगने से नष्ट हो चुके हैं।
पिछली बार की अपेक्षा इस बार आग लगने की घटनाएं कम हुई हैं। विभाग के पेड़-पौधों को कम नुकसान हुआ है। उनके पास पेड़-पौधे जलने की कोई शिकायत नहीं आई है। यदि सड़क किनारे पेड़ों में आग लगी देखेें तो वन विभाग, फायर ब्रिगेड को तुरंत सूचना देें।
पवन ग्रोवर, वन मंडल अधिकारी, जींद
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जिला में नरवाना क्षेत्र में पेड़-पौधे जलने की घटनाएं ज्यादा हुई है। ऐसे में लोगों को शुद्ध हवा कैसे मिलेगी। शुद्ध हवा देने वाले सड़कों के किनारे खड़े पेड़-पौधे आग के हवाले किए जा रहे हैं। वन विभाग प्रति पौधा 500 रुपये खर्च करके हर वर्ष सड़कों के किनारे पौधे लगाता है, लेकिन हर साल यह पौधे बड़े होने से पहले ही आग की भेंट चढ़ जाते हैं। ऐसे में हर साल वन विभाग को लाखों रुपये का नुकसान होता है।
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इससे वातावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है साथ में हरे-भरे पेड़-पौधे जलने से हरियाली को भी ग्रहण लग रहा है। अधिकांश मार्गों पर सड़क किनारे आग लगने से वन विभाग के अलावा किसानों के पेड़ भी जल रहे हैं। इस ओर यदि थोड़ा ध्यान दिया जाए तो लाखों पौधों को बचाया जा सकता है। जिले में अधिकांश मार्गों पर सड़क किनारे खड़े पेड़-पौधों को आग से झुलसा हुआ देखा जा सकता है।
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जिला के नरवाना-समैण रोड, कैथल रोड, हैबतपुर-खोखरी रोड, सफीदों रोड, बरवाला रोड, असंध रोड, गोहाना रोड और नरवाना से जींद के बीच रेलमार्ग के किनारे काफी संख्या में पेड़ जलकर नष्ट हो गए हैं।
पिछले साल विभाग ने की थी कार्रवाई
वन विभाग ने पिछले साल पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस में अलग-अलग 6 मामले दर्ज करवाए थे। इसको लेकर एक एफआईआर गढ़ी थाना में दर्ज करवाई थी। वहीं नरवाना माइनर रोड पर भी विभाग के 35 पेड़ थे, जहां किसी अज्ञात ने आग लगा दी और वह जल गए थे। इस मामले में भी सदर थाना नरवाना ने मामला दर्ज कर लिया है।
हिसार-चंडीगढ़ राजमार्ग पर दबलैन पावर हाउस के पास भी एक व्यक्ति ने अपने खेत में आग लगा दी। यह आग हाईवे के किनारे लगे पौधों तक पहुंची थी। इससे 12 पौधे जल गए। वन विभाग ने व्यक्ति के खिलाफ चालान कर जुर्माना वसूला था। वहीं नरवाना-समैण रोड के किनारे दबलैन गांव के पास भी 250 से ज्यादा पौधे जलाए गए थे, जिसकी पुलिस को शिकायत दी गई थी।
पेड़-पौधों तक खेतों से पहुंच रही आग
किसान गेहूं के फानों, खेतों के कोनों, मेढ़ आदि पर उगे खरपतवार को जलाने के लिए आग लगा देते हैं ताकि अगली फसल की बिजाई अच्छी तरह हो सके। खरपतवार और घास-फुस जलाने के लिए लगाई गई आग सड़क किनारे खड़े पेड़-पौधों तक पहुंच जाती है। ऐसे में पौधे और पेड़ आग की चपेट में आकर जल जाते हैं। इससे पौधे तो बिल्कुल खत्म हो जाते हैंं, वहीं सूखे पेड़ों में आग लगने से कभी-कभार सड़कों की तरफ आ गिरते हैं और हादसों का कारण बनते हैं। जिले से गुजरने वाले दिल्ली-पटियाला राजमार्ग स्थित बेलरखा, उचाना, गढ़ी, जुलाना, गतौली के पास 350 से ज्यादा पौधे आग लगने से नष्ट हो चुके हैं।
पिछली बार की अपेक्षा इस बार आग लगने की घटनाएं कम हुई हैं। विभाग के पेड़-पौधों को कम नुकसान हुआ है। उनके पास पेड़-पौधे जलने की कोई शिकायत नहीं आई है। यदि सड़क किनारे पेड़ों में आग लगी देखेें तो वन विभाग, फायर ब्रिगेड को तुरंत सूचना देें।
पवन ग्रोवर, वन मंडल अधिकारी, जींद