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हरियाणा रोडवेज से हटाए गए चालकों ने की बैठक
Updated Wed, 05 Dec 2018 12:26 AM IST
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आउटसोर्स पर रखे चालकों के हक में बस चालक लड़ेंगे लड़ाई
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। साल 2016 में हरियाणा रोडवेज में आउटसोर्स पॉलिसी-2 के तहत लगे चालकों को सरकार द्वारा हटाने के बाद जिले के बस चालकों ने बैठक की। सरकार के इस फैसले की निंदा करते हुए विरोध दर्ज करवाया। राजेश ने कहा कि सरकार को जब जरूरत पड़ी तो चालकों को भर्ती किया और जब जरूरत पड़ी हटा दिया। यह सरकार का गलत रवैया है। सरकार ने रोडवेज के प्रति तानाशाही रूप अपनाया हुआ है। रोडवेज में पहले ही कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में चालकों को हटाना गलत है। प्रदेश सरकार रोडवेज को निजीकरण करना चाहती है। किलोमीटर स्कीम और डिपो में प्राइवेट बस लाना के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। हड़ताल के दौरान आउटसोर्स पॉलिसी-2 के तहत लगे कर्मचारियों को प्रदेश सरकार ने हटाने के आदेश दिए थे। हड़ताल हाईकोर्ट के आदेशों पर समाप्त की गई थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि हड़ताल के बाद जनता की सुविधा के लिए स्थिति सामान्य रखी जाए, लेकिन हड़ताल समाप्त होने के बाद रोडवेज चालक व परिचालकों का ओवर टाइम समाप्त कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने अब आउटसोर्स पॉलिसी-2 के तहत लगे कर्मचारियों को हटा दिया है। यह सरकार गलत कर रही है। इसके विरोध में कर्मचारी अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे और इस मुद्दे को कोर्ट में लेकर जाएंगे। बैठक में रोडवेज कर्मचारी महासंघ के प्रधान अनूप लाठर ने कहा कि बुधवार को रोहतक में रोडवेज तालमेल कमेटी की राज्य स्तरीय बैठक में इस मुद्दे को जोर-शोर के साथ उठाया जाएगा। चालकों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। कर्मचारी महासंघ समेत दूसरी सभी यूनियनों कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए ही बनी हैं तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए बड़े से बड़ा आंदोलन और हड़ताल करने के लिए वह तैयार हैं। इस अवसर पर राजेश, सुरेंद्र मलिक, विरेंद्र, राजबीर गतौली, प्रदीप, देवेंद्र व अनूप लाठर मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। साल 2016 में हरियाणा रोडवेज में आउटसोर्स पॉलिसी-2 के तहत लगे चालकों को सरकार द्वारा हटाने के बाद जिले के बस चालकों ने बैठक की। सरकार के इस फैसले की निंदा करते हुए विरोध दर्ज करवाया। राजेश ने कहा कि सरकार को जब जरूरत पड़ी तो चालकों को भर्ती किया और जब जरूरत पड़ी हटा दिया। यह सरकार का गलत रवैया है। सरकार ने रोडवेज के प्रति तानाशाही रूप अपनाया हुआ है। रोडवेज में पहले ही कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में चालकों को हटाना गलत है। प्रदेश सरकार रोडवेज को निजीकरण करना चाहती है। किलोमीटर स्कीम और डिपो में प्राइवेट बस लाना के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। हड़ताल के दौरान आउटसोर्स पॉलिसी-2 के तहत लगे कर्मचारियों को प्रदेश सरकार ने हटाने के आदेश दिए थे। हड़ताल हाईकोर्ट के आदेशों पर समाप्त की गई थी। हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि हड़ताल के बाद जनता की सुविधा के लिए स्थिति सामान्य रखी जाए, लेकिन हड़ताल समाप्त होने के बाद रोडवेज चालक व परिचालकों का ओवर टाइम समाप्त कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने अब आउटसोर्स पॉलिसी-2 के तहत लगे कर्मचारियों को हटा दिया है। यह सरकार गलत कर रही है। इसके विरोध में कर्मचारी अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे और इस मुद्दे को कोर्ट में लेकर जाएंगे। बैठक में रोडवेज कर्मचारी महासंघ के प्रधान अनूप लाठर ने कहा कि बुधवार को रोहतक में रोडवेज तालमेल कमेटी की राज्य स्तरीय बैठक में इस मुद्दे को जोर-शोर के साथ उठाया जाएगा। चालकों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। कर्मचारी महासंघ समेत दूसरी सभी यूनियनों कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए ही बनी हैं तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए बड़े से बड़ा आंदोलन और हड़ताल करने के लिए वह तैयार हैं। इस अवसर पर राजेश, सुरेंद्र मलिक, विरेंद्र, राजबीर गतौली, प्रदीप, देवेंद्र व अनूप लाठर मौजूद रहे।