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जिला परिषद चेयरपर्सन पर फैसला एक नवंबर को
Updated Fri, 26 Oct 2018 12:11 AM IST
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जिला परिषद चेयरपर्सन पर फैसला एक नवंबर को
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिछले दो महीने से जिला परिषद की चेयरपर्सन पदमा सिंगला की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान पर अब एक नवंबर को फैसला आ सकता है। दरअसल इसी मामले में दो अलग-अलग सुनवाई हाईकोर्ट ने एक ही दिन एक नवंबर को तय की हैं।
गौरतलब है कि 16 अगस्त को कुछ जिला पार्षदों ने चेयरपर्सन पदमा सिंगला के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव डीसी अमित खत्री को दिया था। इसके बाद चार सितंबर को मतदान की तारीख तय हुई, लेकिन जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की व्यस्तता के चलते इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद तीन अक्तूबर को फिर से मतदान की तारीख तय हुई। इसको पदमा सिंगला ने अदालत में चुनौती दी थी। पदमा सिंगला का कहना है कि जब चार सितंबर को उनके विरोध में कोई पार्षद नहीं पहुंचा तो अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। ऐसे में अदालत ने तीन अक्तूबर को होने वाले चुनाव के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी थी। इसके लिए 25 अक्तूबर की तारीख दी गई थी। वहीं इससे पहले डीसी द्वारा मीटिंग रद्द करने के मामले में हाईकोर्ट में एक नवंबर की तारीख लगी हुई है। अब अदालत ने दोनों ही मामलों में एक नवंबर को सुनवाई करने का फैसला लिया है। ऐसे में एक नवंबर को पदमा सिंगला की किस्मत का फैसला हो सकता है। यदि अदालत चार सितंबर की मीटिंग का आधार सही मानती है तो पदमा सिंगला की कुर्सी बच सकती है। हालांकि मतदान में विरोधी पार्षद दावा कर रहे हैं कि उनके साथ पदमा सिंगला को पद से हटाने के लिए मतदान हो चुका है। अविश्वास प्रस्ताव कुल 19 पार्षदों में मतदान किया था। पदमा सिंगला का दावा है कि इसमें तीन पार्षदों क्रॉस वोट कर अविश्वास के खिलाफ मतदान किया है। गणित के हिसाब से विरोधी पार्षदों को 18 मत चाहिए। वर्जन
इस मामले में अदालत ने एक नवंबर को सुनवाई की तारीख तय की है। दोनों ही विषयों पर एक नवंबर को सुनवाई होगी। अदालत का जो भी फैसला आएगा, वह मान्य है।
- अमित खत्री, डीसी।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिछले दो महीने से जिला परिषद की चेयरपर्सन पदमा सिंगला की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान पर अब एक नवंबर को फैसला आ सकता है। दरअसल इसी मामले में दो अलग-अलग सुनवाई हाईकोर्ट ने एक ही दिन एक नवंबर को तय की हैं।
गौरतलब है कि 16 अगस्त को कुछ जिला पार्षदों ने चेयरपर्सन पदमा सिंगला के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव डीसी अमित खत्री को दिया था। इसके बाद चार सितंबर को मतदान की तारीख तय हुई, लेकिन जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की व्यस्तता के चलते इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद तीन अक्तूबर को फिर से मतदान की तारीख तय हुई। इसको पदमा सिंगला ने अदालत में चुनौती दी थी। पदमा सिंगला का कहना है कि जब चार सितंबर को उनके विरोध में कोई पार्षद नहीं पहुंचा तो अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। ऐसे में अदालत ने तीन अक्तूबर को होने वाले चुनाव के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी थी। इसके लिए 25 अक्तूबर की तारीख दी गई थी। वहीं इससे पहले डीसी द्वारा मीटिंग रद्द करने के मामले में हाईकोर्ट में एक नवंबर की तारीख लगी हुई है। अब अदालत ने दोनों ही मामलों में एक नवंबर को सुनवाई करने का फैसला लिया है। ऐसे में एक नवंबर को पदमा सिंगला की किस्मत का फैसला हो सकता है। यदि अदालत चार सितंबर की मीटिंग का आधार सही मानती है तो पदमा सिंगला की कुर्सी बच सकती है। हालांकि मतदान में विरोधी पार्षद दावा कर रहे हैं कि उनके साथ पदमा सिंगला को पद से हटाने के लिए मतदान हो चुका है। अविश्वास प्रस्ताव कुल 19 पार्षदों में मतदान किया था। पदमा सिंगला का दावा है कि इसमें तीन पार्षदों क्रॉस वोट कर अविश्वास के खिलाफ मतदान किया है। गणित के हिसाब से विरोधी पार्षदों को 18 मत चाहिए। वर्जन
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इस मामले में अदालत ने एक नवंबर को सुनवाई की तारीख तय की है। दोनों ही विषयों पर एक नवंबर को सुनवाई होगी। अदालत का जो भी फैसला आएगा, वह मान्य है।
- अमित खत्री, डीसी।