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खेत पाठशाला में मास्टर ट्रेनरों ने दी कीटों की जानकारी
Updated Fri, 13 Jul 2018 12:07 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। निडाना गांव में डॉ. सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता मिशन एवं कृषि विभाग द्वारा महिला किसान खेत पाठशाला का आयोजन किया गया। पाठशाला में कृषि विभाग से क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर डॉ. नरेंद्र पाल, तकनीकी नियंत्रक डॉ. यशपाल सिंह, एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर मोनिका, ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर वेदपाल, बागवानी विभाग से बागवानी विकास अधिकारी विकास कुमार ने विशेष रूप से शिरकत की। मास्टर ट्रेनर सीता, ईश्वंती, संतोष, सुषमा, रिमन ने महिला किसानों को कीटों की पहचान करने, उनके क्रियाकलाप, ईटीएल लेवल, मांसाहारी व शाकाहारी कीटों से फसल पर पड़ने वाले प्रभाव तथा पौधे और कीटों के रिश्ते के बारे में जानकारी दी।
मास्टर ट्रेनर सीता, ईश्वंती, संतोष, सुषमा व रिमन ने बताया कि पौधे और कीट के बीच गहरा रिश्ता होता है। पौधा अपनी जरूरत के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार की गंध छोड़कर कीटों को बुलाता है। उन्होंने बताया कि कीट दो प्रकार के होते हैं। एक शाकाहारी और दूसरे मांसाहारी। शाकाहारी कीट पौधे के पत्तों, फूलों और फलों को खाकर अपना जीवन यापन करते हैं जबकि मांसाहारी कीट शाकाहारी कीटों को खाकर फसल में कुदरती कीटनाशी का काम करते हैं। यदि किसान कीटों की पहचान व उनके क्रियाकलापों के बारे में जानकारी हासिल कर लें तो फिर वह किसी भी कीमत पर फसल में कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह खेत कपास की फसल में सफेद मक्खी की संख्या प्रति पत्ता 0.67, हरा तेले की संख्या 1.57 व चूरेड़ की संख्या 4.67 है जबकि सफेद मक्खी का ईटीएल लेवल (आर्थिक हानि कागार) प्रति पत्ता संख्या 6, हरा तेले की 2 व चूरड़े की 10 है। इसलिए यह कीट अभी तक फसल को नुकसान पहुंचाने के लेवल से काफी दूर हैं। इसलिए अभी किसानों को इसमें किसी प्रकार के कीटनाशक की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही फसल में इन कीटों को नियंत्रित करने के लिए मांसाहारी कीट डाकू बुगड़ा, क्राइसोपा, मकड़ी व हथजोड़ा भी मौजूद हैं। कृषि व बागवानी विभाग से आए अधिकारियों ने भी किसानों को अपने-अपने विभाग से संबंधित कई प्रकार की जानकारियां दीं।
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जींद। निडाना गांव में डॉ. सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता मिशन एवं कृषि विभाग द्वारा महिला किसान खेत पाठशाला का आयोजन किया गया। पाठशाला में कृषि विभाग से क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर डॉ. नरेंद्र पाल, तकनीकी नियंत्रक डॉ. यशपाल सिंह, एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर मोनिका, ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर वेदपाल, बागवानी विभाग से बागवानी विकास अधिकारी विकास कुमार ने विशेष रूप से शिरकत की। मास्टर ट्रेनर सीता, ईश्वंती, संतोष, सुषमा, रिमन ने महिला किसानों को कीटों की पहचान करने, उनके क्रियाकलाप, ईटीएल लेवल, मांसाहारी व शाकाहारी कीटों से फसल पर पड़ने वाले प्रभाव तथा पौधे और कीटों के रिश्ते के बारे में जानकारी दी।
मास्टर ट्रेनर सीता, ईश्वंती, संतोष, सुषमा व रिमन ने बताया कि पौधे और कीट के बीच गहरा रिश्ता होता है। पौधा अपनी जरूरत के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार की गंध छोड़कर कीटों को बुलाता है। उन्होंने बताया कि कीट दो प्रकार के होते हैं। एक शाकाहारी और दूसरे मांसाहारी। शाकाहारी कीट पौधे के पत्तों, फूलों और फलों को खाकर अपना जीवन यापन करते हैं जबकि मांसाहारी कीट शाकाहारी कीटों को खाकर फसल में कुदरती कीटनाशी का काम करते हैं। यदि किसान कीटों की पहचान व उनके क्रियाकलापों के बारे में जानकारी हासिल कर लें तो फिर वह किसी भी कीमत पर फसल में कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह खेत कपास की फसल में सफेद मक्खी की संख्या प्रति पत्ता 0.67, हरा तेले की संख्या 1.57 व चूरेड़ की संख्या 4.67 है जबकि सफेद मक्खी का ईटीएल लेवल (आर्थिक हानि कागार) प्रति पत्ता संख्या 6, हरा तेले की 2 व चूरड़े की 10 है। इसलिए यह कीट अभी तक फसल को नुकसान पहुंचाने के लेवल से काफी दूर हैं। इसलिए अभी किसानों को इसमें किसी प्रकार के कीटनाशक की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही फसल में इन कीटों को नियंत्रित करने के लिए मांसाहारी कीट डाकू बुगड़ा, क्राइसोपा, मकड़ी व हथजोड़ा भी मौजूद हैं। कृषि व बागवानी विभाग से आए अधिकारियों ने भी किसानों को अपने-अपने विभाग से संबंधित कई प्रकार की जानकारियां दीं।
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