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अनुपगढ़ गांव में धरने की सफलता के बाद झांझ कलां के धरने पर पहुंच रहे विभिन्न दलों के नेता
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। दिल्ली-पटियाला नेशनल हाईवे के फोरलेनिंग के लिए सरकार द्वारा अधिगृहीत की गई जमीन का उचित मुआवजा न देने के विरोध में झांझ कलां गांव में शुरू किए गए धरने पर सभी दलों के नेता पहुंचकर श्रेय लेने की फिराक में हैं। इसी नेशनल हाईवे पर अनूपगढ़ गांव में 64 दिन तक चले धरने के बाद सरकार ने मुआवजा बढ़ाने की घोषणा की थी। अनूपगढ़ के धरने की सफलता के बाद अब झांझ कलां में किसानों द्वारा दिए जाने वाले धरने पर नेताओं में समर्थन देने की होड़ लगी है ताकि सफलता के बाद सभी श्रेय ले सकें।
बताते चलें कि दिल्ली-पटियाला नेशनल हाईवे के लिए सरकार ने कई गांवों की जमीन अधिग्रहण की थी। अनुपगढ़, बिरोली, बिशनपुरा, अशरफगढ़ के किसानों ने अधिक मुआवजे की मांग को लेकर तीन महीने पहले अनुपगढ़ गांव के पास धरना शुरू किया था। इन किसानों का कहना था कि उनको दूसरे गांवों के किसानों के मुकाबले बहुत कम मुआवजा सरकार ने दिया है। 64 दिन बाद सरकार ने इन किसानों को मुआवजा बढ़ाकर देने की घोषणा की थी और धरना समाप्त करवा दिया था। अब झांझ कलां, झांझ खुर्द, कैरखेड़ी के किसानों ठीक अनुपगढ़ गांव की तर्ज पर झांझ कलां गांव में तीन दिन पहले मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। पहले दिन धरने का नेतृत्व इनेलो के जिला उपप्रधान डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने किया। इसके बाद नेताओं का इस धरने पर जाकर समर्थन देने का सिलसिला शुरू हो गया। अब तक इस धरने पर जाकर भारतीय किसान संघ के नेता सुंदरलाल, कांग्रेस की तरफ से प्रमोद सहवाग, आम आदमी पार्टी की तरफ से राजकुमार पहल, इनेलो के युवा नेता प्रदीप गिल समर्थन दे चुके हैं। इन नेताओं को अनूपगढ़ धरने की सफलता के बाद यह लगता है कि सरकार को देर सवेरे मुआवजा बढ़ाने की घोषणा करनी ही है, तो क्यों न इसका श्रेय लिया जाए। इसको देखते हुए यहां नेताओं की आवाजाही लगी रहती है।
हुई थी 50-60 लाख की घोषणा
सरकार ने अनुपगढ़, बिशनपुरा, बिरोली और अशरफगढ़ के किसानों को 50 से 60 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। धरने से पहले इन गांवों के किसानों को 12 से 15 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा मिला था। इसी प्रकार झांझ कलां, झांझ खुर्द व कैरखेड़ी के किसानों को 20 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा मिला है। अब नेता यहां पहुंचकर 90 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
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जींद। दिल्ली-पटियाला नेशनल हाईवे के फोरलेनिंग के लिए सरकार द्वारा अधिगृहीत की गई जमीन का उचित मुआवजा न देने के विरोध में झांझ कलां गांव में शुरू किए गए धरने पर सभी दलों के नेता पहुंचकर श्रेय लेने की फिराक में हैं। इसी नेशनल हाईवे पर अनूपगढ़ गांव में 64 दिन तक चले धरने के बाद सरकार ने मुआवजा बढ़ाने की घोषणा की थी। अनूपगढ़ के धरने की सफलता के बाद अब झांझ कलां में किसानों द्वारा दिए जाने वाले धरने पर नेताओं में समर्थन देने की होड़ लगी है ताकि सफलता के बाद सभी श्रेय ले सकें।
बताते चलें कि दिल्ली-पटियाला नेशनल हाईवे के लिए सरकार ने कई गांवों की जमीन अधिग्रहण की थी। अनुपगढ़, बिरोली, बिशनपुरा, अशरफगढ़ के किसानों ने अधिक मुआवजे की मांग को लेकर तीन महीने पहले अनुपगढ़ गांव के पास धरना शुरू किया था। इन किसानों का कहना था कि उनको दूसरे गांवों के किसानों के मुकाबले बहुत कम मुआवजा सरकार ने दिया है। 64 दिन बाद सरकार ने इन किसानों को मुआवजा बढ़ाकर देने की घोषणा की थी और धरना समाप्त करवा दिया था। अब झांझ कलां, झांझ खुर्द, कैरखेड़ी के किसानों ठीक अनुपगढ़ गांव की तर्ज पर झांझ कलां गांव में तीन दिन पहले मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। पहले दिन धरने का नेतृत्व इनेलो के जिला उपप्रधान डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने किया। इसके बाद नेताओं का इस धरने पर जाकर समर्थन देने का सिलसिला शुरू हो गया। अब तक इस धरने पर जाकर भारतीय किसान संघ के नेता सुंदरलाल, कांग्रेस की तरफ से प्रमोद सहवाग, आम आदमी पार्टी की तरफ से राजकुमार पहल, इनेलो के युवा नेता प्रदीप गिल समर्थन दे चुके हैं। इन नेताओं को अनूपगढ़ धरने की सफलता के बाद यह लगता है कि सरकार को देर सवेरे मुआवजा बढ़ाने की घोषणा करनी ही है, तो क्यों न इसका श्रेय लिया जाए। इसको देखते हुए यहां नेताओं की आवाजाही लगी रहती है।
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हुई थी 50-60 लाख की घोषणा
सरकार ने अनुपगढ़, बिशनपुरा, बिरोली और अशरफगढ़ के किसानों को 50 से 60 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी। धरने से पहले इन गांवों के किसानों को 12 से 15 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा मिला था। इसी प्रकार झांझ कलां, झांझ खुर्द व कैरखेड़ी के किसानों को 20 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा मिला है। अब नेता यहां पहुंचकर 90 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
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