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भारी पड़ रही देश भक्ति
Updated Tue, 10 Oct 2017 12:23 AM IST
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जुलाना।
दशहरे के बाद बाजार में दीवाली की तैयारियां जोरों पर हैं। दीवाली पर विदेशी चीजों का बहुत अधिक प्रयोग होता है। पटाखे, दीपक, चमकदार लाइटों की भरमार है। बहुत से लोगों ने गांधी जयंती पर स्वदेशी अपनाने का प्रण किया है, अधिकतर लोग चीन के प्रति आक्रोश के चलते चाइनीज माल का बहिष्कार कर रहे हैं। लोगों का मानना है, कि चाइना अपने कमाए धन का प्रयोग आतंकी संगठनों को बढ़ावा देने में कर रहा है। चीन के लिए भारत एक बाजार से बढ़कर कुछ नही है। अगर हर भारतीय प्रण करे कि चीन निर्मित कोई भी सामान नहीं खरीदेंगे तो चीन की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा जाएगी। हर वर्ष अरबों रुपयों के पटाखे जलाकर राख कर देते है, और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते है। लोग चीनी माल का त्याग करने का प्रण ले रहे है, जिससे पर्यावरण व धन दोनों की क्षति से बचा जा सकता है।
उन्हें आशा है, कि इस बार दीपावली पर मिट्टी के दियों की मांग बढ़ेगी। जिससे उनको लाभ होने की उम्मीद है। जहां पिछले कई वर्षों से लोग चाइनीज माल का प्रयोग कर रहे थे। लेकिन पिछले साल से लगातार इसका विरोध देखा जा रहा है। कुंभकारों का मानना है, कि युवा वर्ग इस पुस्तैनी काम को अधिक मेहनत और लागत होने और आमदनी कम होने के कारण छोड़ रहे हैं। लेकिन इस बार स्वदेशी माल की मांग को देखते हुए उनमें भी अपने काम के प्रति जोश देखने को मिल रहा है।
स्वदेशी सामान खरीददारी करे
हमें चीन के माल को खरीदने की बजाए स्वदेशी सामान को खरीदना चाहिए। जिससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। दीवाली पर एक तरफ तो हम लक्ष्मी की पूजा करते है वही दूसरी ओर देश के धन को विदेशों में भेज रहे हैं। सभी को मिट्टी के दीए जलाकर दीवाली मनानी चाहिए।
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- जयबीर सिंधु।
स्वदेशी सामान खरीद, देश अर्थव्यवस्था को करे मजबूत
चाइनीज सामान खरीदकर चीन की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहे है। चीन अपनी कमाई से आतंकवादियों की मदद कर रहा है। देश में चीनी सामान का बहिष्कार चीन के मुंह पर करारा जवाब होगा। स्वदेशी सामान प्रयोग करने से देश के किसान के अलावा देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
- राकेश दलाल, मालवी।
मिट्टी के दीये को प्रयोग करे लोग
त्यौहार में प्रकाश के लिए कुम्हार द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीयों का ही प्रयोग करना चाहिए, जिससे गरीब कुम्हार के परिवार के लिए भी खुशियां मिल सके। स्वतंत्रता आंदोलन के समय स्वदेशी आंदोलन ने विदेशी शासन की नींव हिला दी थी। आज फिर देश में स्वदेशी आंदोलन की जरूरत है। हर भारतीय के मन में ये विचार आना चाहिए कि भले ही हम उस वस्तु के अभाव में जी लेंगे, लेकिन प्रयोग करेंगे तो स्वदेश निर्मित वस्तु ही प्रयोग करेंगे।
- बिजेंद्र लाठर, जुलाना।
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दशहरे के बाद बाजार में दीवाली की तैयारियां जोरों पर हैं। दीवाली पर विदेशी चीजों का बहुत अधिक प्रयोग होता है। पटाखे, दीपक, चमकदार लाइटों की भरमार है। बहुत से लोगों ने गांधी जयंती पर स्वदेशी अपनाने का प्रण किया है, अधिकतर लोग चीन के प्रति आक्रोश के चलते चाइनीज माल का बहिष्कार कर रहे हैं। लोगों का मानना है, कि चाइना अपने कमाए धन का प्रयोग आतंकी संगठनों को बढ़ावा देने में कर रहा है। चीन के लिए भारत एक बाजार से बढ़कर कुछ नही है। अगर हर भारतीय प्रण करे कि चीन निर्मित कोई भी सामान नहीं खरीदेंगे तो चीन की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा जाएगी। हर वर्ष अरबों रुपयों के पटाखे जलाकर राख कर देते है, और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते है। लोग चीनी माल का त्याग करने का प्रण ले रहे है, जिससे पर्यावरण व धन दोनों की क्षति से बचा जा सकता है।
उन्हें आशा है, कि इस बार दीपावली पर मिट्टी के दियों की मांग बढ़ेगी। जिससे उनको लाभ होने की उम्मीद है। जहां पिछले कई वर्षों से लोग चाइनीज माल का प्रयोग कर रहे थे। लेकिन पिछले साल से लगातार इसका विरोध देखा जा रहा है। कुंभकारों का मानना है, कि युवा वर्ग इस पुस्तैनी काम को अधिक मेहनत और लागत होने और आमदनी कम होने के कारण छोड़ रहे हैं। लेकिन इस बार स्वदेशी माल की मांग को देखते हुए उनमें भी अपने काम के प्रति जोश देखने को मिल रहा है।
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स्वदेशी सामान खरीददारी करे
हमें चीन के माल को खरीदने की बजाए स्वदेशी सामान को खरीदना चाहिए। जिससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। दीवाली पर एक तरफ तो हम लक्ष्मी की पूजा करते है वही दूसरी ओर देश के धन को विदेशों में भेज रहे हैं। सभी को मिट्टी के दीए जलाकर दीवाली मनानी चाहिए।
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- जयबीर सिंधु।
स्वदेशी सामान खरीद, देश अर्थव्यवस्था को करे मजबूत
चाइनीज सामान खरीदकर चीन की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहे है। चीन अपनी कमाई से आतंकवादियों की मदद कर रहा है। देश में चीनी सामान का बहिष्कार चीन के मुंह पर करारा जवाब होगा। स्वदेशी सामान प्रयोग करने से देश के किसान के अलावा देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
- राकेश दलाल, मालवी।
मिट्टी के दीये को प्रयोग करे लोग
त्यौहार में प्रकाश के लिए कुम्हार द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीयों का ही प्रयोग करना चाहिए, जिससे गरीब कुम्हार के परिवार के लिए भी खुशियां मिल सके। स्वतंत्रता आंदोलन के समय स्वदेशी आंदोलन ने विदेशी शासन की नींव हिला दी थी। आज फिर देश में स्वदेशी आंदोलन की जरूरत है। हर भारतीय के मन में ये विचार आना चाहिए कि भले ही हम उस वस्तु के अभाव में जी लेंगे, लेकिन प्रयोग करेंगे तो स्वदेश निर्मित वस्तु ही प्रयोग करेंगे।
- बिजेंद्र लाठर, जुलाना।