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पापों से मुक्ति और मोक्ष का महाद्वार है अजा एकादशी : शांडिल्य
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फोटो 06जेएनडी18-पुजारी सत्यनारायण शांडिल्य।
उचाना। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत इस वर्ष सात सितंबर को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहने की मान्यता है।
राधा-कृष्ण प्राचीन मंदिर पुजारी सत्यनारायण शांडिल्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी का व्रत खोई हुई सुख-समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस वर्ष एकादशी सोमवार के दिन पडऩे के कारण श्रद्धालुओं के लिए भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का भी विशेष अवसर माना जा रहा है। उदयातिथि के अनुसार अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा। श्रद्धालु इस दिन प्रात स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करेंगे तथा व्रत का संकल्प लेकर भगवान का स्मरण करेंगे।
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शास्त्रों में अजा एकादशी के व्रत की विशेष महिमा बताई गई है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ इस दिन उपवास रखता है, उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
साथ ही व्रत करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।
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राधा-कृष्ण प्राचीन मंदिर पुजारी सत्यनारायण शांडिल्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अजा एकादशी का व्रत खोई हुई सुख-समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
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इस वर्ष एकादशी सोमवार के दिन पडऩे के कारण श्रद्धालुओं के लिए भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का भी विशेष अवसर माना जा रहा है। उदयातिथि के अनुसार अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा। श्रद्धालु इस दिन प्रात स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करेंगे तथा व्रत का संकल्प लेकर भगवान का स्मरण करेंगे।
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शास्त्रों में अजा एकादशी के व्रत की विशेष महिमा बताई गई है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ इस दिन उपवास रखता है, उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
साथ ही व्रत करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।