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Jind News: दंडी स्वामी गोशाला में 51 कुंडीय यज्ञ, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा परिसर
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26जेएनडी32: गोशाला में हवन यज्ञ करते हुए गोभक्त। संवाद
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जींद। जलेबी चौक स्थित दंडी स्वामी गौशाला में 51 कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया। जगतगुरु त्रिपुरा पीठाधीश्वर चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट परम पूज्य श्रीश्री 1008 हरिओम महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से हुए यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। यज्ञ में विश्व शांति, पर्यावरण शुद्धि, गोसंरक्षण और मानव कल्याण की कामना के साथ आहुतियां दी गईं।
राष्ट्रीय यज्ञ पुत्र सेना के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र कौशिक बाता ने बताया कि दंडी स्वामी के मौन व्रत पूर्ण होने के उपलक्ष्य में महायज्ञ का आयोजन किया गया। अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं ने यज्ञ में भाग लेकर गोसेवा और संरक्षण का संकल्प लिया। 51 कुंडों में एक साथ आहुति दिए जाने से पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
आयोजन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण का संदेश भी दिया जा रहा है। कार्यक्रम में एडवोकेट सतीश यादव, एडवोकेट नरेंद्र अत्री, एडवोकेट जितेंद्र अत्री, एडवोकेट मोहित सैनी, आचार्य योगेंद्र, विजय शर्मा, जितेंद्र छात्तर, दलीप शर्मा मौजूद रहे।
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गोसेवकों ने प्रशासन से मांग की कि बेसहारा गायों के लिए वैकल्पिक आश्रय की व्यवस्था किए बिना दंडी स्वामी गोशाला को यहां से न हटाया जाए। उन्होंने कहा कि गोवंश के संरक्षण और उनके सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। आयोजन समिति और राष्ट्रीय यज्ञ पुत्र सेना के पदाधिकारियों ने सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, संतों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन का आभार जताया।
राष्ट्रीय यज्ञ पुत्र सेना के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र कौशिक बाता ने बताया कि दंडी स्वामी के मौन व्रत पूर्ण होने के उपलक्ष्य में महायज्ञ का आयोजन किया गया। अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं ने यज्ञ में भाग लेकर गोसेवा और संरक्षण का संकल्प लिया। 51 कुंडों में एक साथ आहुति दिए जाने से पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
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आयोजन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण का संदेश भी दिया जा रहा है। कार्यक्रम में एडवोकेट सतीश यादव, एडवोकेट नरेंद्र अत्री, एडवोकेट जितेंद्र अत्री, एडवोकेट मोहित सैनी, आचार्य योगेंद्र, विजय शर्मा, जितेंद्र छात्तर, दलीप शर्मा मौजूद रहे।
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गोसेवकों ने प्रशासन से मांग की कि बेसहारा गायों के लिए वैकल्पिक आश्रय की व्यवस्था किए बिना दंडी स्वामी गोशाला को यहां से न हटाया जाए। उन्होंने कहा कि गोवंश के संरक्षण और उनके सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। आयोजन समिति और राष्ट्रीय यज्ञ पुत्र सेना के पदाधिकारियों ने सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, संतों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन का आभार जताया।