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जिले में पांच हजार लोगों पर एक चिकित्सक, कैसे मिले बेहतर स्वास्थ्य सुविधा

Sun, 01 Mar 2020 11:09 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2020 11:09 PM IST
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5000 poeple in district, one doctor, how to get better health facility
जींद नागरिक अस्पताल। - फोटो : Jind
जींद के नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 55 पद स्वीकृत हैं, मगर 16 चिकित्सक ही कार्य कर रहे हैं बाकी पद खाली हैं। वहीं जिले की बात करें तो सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के कुल 216 पद स्वीकृत हैं, मगर 56 चिकित्सक ही काम कर रहे हैं। ऐसे में जिले में 75 प्रतिशत पद खाली हैं। जिले की आबादी 14 लाख से अधिक है। इस हिसाब से साढ़े पांच हजार लोगों पर सिर्फ एक चिकित्सक है। यह जिले के लोगों के लिए गंभीर समस्या है। नागरिक अस्पताल में हर रोज 1100 से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है। नागरिक अस्पताल में लगातार डॉक्टरों की संख्या कम होती जा रही है। पिछले छह माह में नागरिक अस्पताल से पीएमओ समेत तीन डॉक्टरों के पद खाली हुए हैं, जबकि अभी तक इनकी जगह किसी अन्य चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई है। नागरिक अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, स्किन स्पेशलिस्ट व ईएनटी सर्जन के पद खाली पड़े हैं। यहां तक कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट तक का पद खाली पड़ा है, जिसकी वजह से मरीजों को नागरिक अस्पताल में इलाज ही मुहैया नहीं हो पाता है। उन्हें या तो निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है या फिर पीजीआई रोहतक जाकर इलाज करना पड़ता है।
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हर रोज होती है 1200 मरीजों की ओपीडी
नागरिक अस्पताल में हर रोज 1200 मरीजों की ओपीडी होती है, जबकि नागरिक अस्पताल में केवल 16 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाल रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण काफी परेशानी हो रही है। वहीं निजी अस्पतालों में भी मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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नागरिक अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक का भी लोगों के साथ नहीं अच्छा व्यवहार
नागरिक अस्पताल में एक तरफ चिकित्सकों की काफी कमी है तो दूसरी तरफ यहां कार्यरत चिकित्सकों का व्यवहार भी लोगों के साथ अच्छा नहीं रहा है। इसके एक नहीं बल्कि कई उदाहरण हैं। एक महीने पहले रात को इलाज के लिए बच्चे को लेकर आए उसके पिता के साथ हुआ दुर्व्यवहार काफी चर्चा में रहा। चिकित्सक को एक बार तो सस्पेंड तक कर दिया गया था, मगर बाद में उसे बहाल कर दिया गया। वहीं निडाना निवासी महिला के पोस्टमार्टम के मामले में परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। शहर की एक कॉलोनी में एक व्यक्ति ने अपने बच्चे को इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया था। इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई थी। चिकित्सक बच्चे का पोस्टमार्टम करवाने पर अड़ा था। चिकित्सक की हठधर्मिता के कारण विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने भी नागरिक अस्पताल के सामने धरना दिया था। स
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200 बेड पर ही पीएमओ की भर्ती
नियमानुसार नागरिक अस्पताल में 200 बेड का अस्पताल होने पर पीएमओ का पद होता है। नागरिक अस्पताल में दो साल पहले 200 बेड का अस्पताल शुरू हो गया था। इसके बाद यहां कोई भी पीएमओ स्थायी रूप से नहीं रहा। फिलहाल भी पीएमओ ने ज्वाइन करने के बाद लंबी छुट्टी ले ली है।

लोगों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास
जिले में चिकित्सकों की काफी कमी है। इसके बावजूद जो चिकित्सक कार्यरत हैं, वह मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रयासरत रहते हैं। लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाती। चिकित्सकों की मांग मुख्यालय को भेजी गई है।
-डॉ. जयभगवान जाटान, सिविल सर्जन जींद।
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