{"_id":"5a7210424f1c1b8c268b7b9f","slug":"41517424706-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो होगी आरपार की लड़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो होगी आरपार की लड़ाई
Updated Thu, 01 Feb 2018 12:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नागरिक अस्पताल में आशा वर्करों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। 17 जनवरी से नागरिक अस्पताल में अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठी आशा वर्करों ने कहा कि वीरवार को सरकार के साथ उनकी बातचीत होनी है। यदि यह बातचीत सकारात्मक नहीं रही तो उसके बाद सरकार के साथ आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
बताते चलें कि आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने व महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर आशा वर्कर हड़ताल पर चल रही हैं। इसी बीच वीरवार को आशा वर्करों को सरकार से बातचीत का न्यौता मिला है। आशा वर्कर यूनियन की प्रधान मुकेश देवी ने कहा कि यदि यह बातचीत सकारात्मक नहीं रही तो फिर सरकार के साथ आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। धरने को सीटू के जिला सचिव कामरेड रमेश चंद्र ने संबोधित करते हुए कहा कि मंगलवार को जेल भरो आंदोलन में आशा वर्कर ने भारी संख्या में भाग लेकर सरकार पर दबाव बनाया है। स्थानीय मुद्दों पर सीएमओ से भी बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर पूरी लगन के साथ अपना कार्य करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के साथ-साथ पोलियो, टीकाकरण व सरकार की अन्य योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम करती हैं लेकिन इसके विपरीत सरकार द्वारा आशा वर्कर को केवल एक हजार रुपये मानदेय दिया जाना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि न तो आशा वर्कर को किसी प्रकार की कोई सामाजिक सुरक्षा है और न ही उनको कर्मचारी का दर्जा हासिल है। इस कारण आशा वर्करों में भारी रोष है। भारत की जनवादी नौजवान सभा के जिला सचिव असीम ने आशा वर्करों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि देश व प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार रोजगार के नाम पर नौजवानों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि जब स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों तक पहुंचाने की सरकार की जिम्मेदारी है और उसके तहत आशा वर्कर महिलाएं काम कर रही हैं तो उन्हें अपना कर्मचारी मानने में सरकार को क्या परेशानी है। धरने पर रोशनी देवी, शीला खरकरामजी, मुकेश अलेवा, सावित्री, गीता, सुखदेई भी मौजूद रही।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। 17 जनवरी से नागरिक अस्पताल में अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठी आशा वर्करों ने कहा कि वीरवार को सरकार के साथ उनकी बातचीत होनी है। यदि यह बातचीत सकारात्मक नहीं रही तो उसके बाद सरकार के साथ आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
बताते चलें कि आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने व महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर आशा वर्कर हड़ताल पर चल रही हैं। इसी बीच वीरवार को आशा वर्करों को सरकार से बातचीत का न्यौता मिला है। आशा वर्कर यूनियन की प्रधान मुकेश देवी ने कहा कि यदि यह बातचीत सकारात्मक नहीं रही तो फिर सरकार के साथ आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। धरने को सीटू के जिला सचिव कामरेड रमेश चंद्र ने संबोधित करते हुए कहा कि मंगलवार को जेल भरो आंदोलन में आशा वर्कर ने भारी संख्या में भाग लेकर सरकार पर दबाव बनाया है। स्थानीय मुद्दों पर सीएमओ से भी बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर पूरी लगन के साथ अपना कार्य करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के साथ-साथ पोलियो, टीकाकरण व सरकार की अन्य योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम करती हैं लेकिन इसके विपरीत सरकार द्वारा आशा वर्कर को केवल एक हजार रुपये मानदेय दिया जाना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि न तो आशा वर्कर को किसी प्रकार की कोई सामाजिक सुरक्षा है और न ही उनको कर्मचारी का दर्जा हासिल है। इस कारण आशा वर्करों में भारी रोष है। भारत की जनवादी नौजवान सभा के जिला सचिव असीम ने आशा वर्करों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि देश व प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार रोजगार के नाम पर नौजवानों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि जब स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों तक पहुंचाने की सरकार की जिम्मेदारी है और उसके तहत आशा वर्कर महिलाएं काम कर रही हैं तो उन्हें अपना कर्मचारी मानने में सरकार को क्या परेशानी है। धरने पर रोशनी देवी, शीला खरकरामजी, मुकेश अलेवा, सावित्री, गीता, सुखदेई भी मौजूद रही।
विज्ञापन