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कम हुई चाइनीज माल की मांग
Updated Mon, 16 Oct 2017 10:55 PM IST
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औंधे मुंह गिरा चाइनीज माल बाजार, कारोबारियों के छूट रहे पसीने
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। देशभर में चाइनीज सामान के खिलाफ चल रही मुहिम से जींद भी अछूता नहीं है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार चाइनीज सामान की बिक्री पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। चाइनीज सामान की बिक्री कम होने से कुंभकारों के भी अच्छे दिन लौट आये हैं। चाइनीज सामान की बिक्री कम होने से इस बार मिट्टी के दीयों का बाजार गुलजार है। इस बार मार्केट में मिट्टी के दीयों की काफी भरमार देखने को मिल रही है। लोग मिट्टी के दीयों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। वहीं कुंभकारों ने भी मौके की नजाकत को देखते हुए इस बार मिट्टी से निर्मित कई तरह के शानदार आइटम बाजार में उतारे हैं।
मार्केट में दिवाली के मौके पर बिजली की लड़ियों से लेकर, तमाम साज सज्जा का सामान, मूर्तियां सहित काफी सामान चाइनीज आ रहा था। व्यापारियों के अनुसार जिला में दो साल पहले तक दिवाली पर करीब एक करोड़ रुपये का कारोबार चाइनीज माल का होता था, लेकिन अब यह 20 प्रतिशत से भी कम रह गया है।
मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्भकारों का मानना है कि चाइनीज के विरोध में देश में चली इस मुहिम से इस बार सही मायने में उनकी दिवाली अच्छी मनेगी। गौरतलब है कि बाजार में बढ़ती चाइनीज आइटमों के चलते कुंभकारों का कामधंधा बुरी तरह से चौपट हो गया था। चाइनीज की मार के चलते हर वर्ष कुंभकारों की दिवाली फीकी रहती थी और मिट्टी से निमत दीयों से लोगों का मोह भंग होने लगा था लेकिन इस बार चाइनीज सामान के खिलाफ देशभर में चल रही मुहिम से एक बार फिर से कुंभकारों के दिन बोहर गए हैं। इन कारिगरों की मानें तो कई साल के बाद फिर से पुराने समय की तरह ही मिट्टी के दियों की मांग बढ़ रही है। इस बार लोगों ने चाइनीज आइटमों का बहिष्कार कर स्वदेशी आइटमों की तरफ रूझान किया है। इससे मिट्टी से निर्मित दीये व दूसरी आइटमों की बिक्री में काफी वृद्धि हुई है। इससे चाइनीज के बाजार पर बुरी मार पड़ी है।
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मार्डन पद्धति का लिया सहारा
हनुमान नगर में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले संतलाल के अनुसार अपने रोजगार को बढ़ाने के लिए उन्होंने मार्डन पद्धति का सहारा लिया है। इस बार बाजार में मिट्टी से निर्मित आइटमों की मांग को देखते हुए दीयों वाली थाली, सजावटी सामान, रंग-बिरंगी मूर्तियां, सुराही, नए-नए डिजाइनों के स्टेंड वाले दीए, हटड़ी, व साधारण दीए भी बनाए गए हैं। मिट्टी से निर्मित आइटमों की इस बार खूब मांग है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार उनके कारोबार में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
मोमबत्तियों की मांग भी बढ़ी
इंदिरा बाजार में मोमबत्तियों का कारोबार करने वाले राधेश्याम के अनुसार इस बार मोमबत्तियों की मांग करीब दोगुनी हो गई है। पिछले पांच-छह साल में पहली बार इस प्रकार की मांग देखी जा रही है। यह सब चाइनीज लड़ियों के विरोध के चलते ही संभव हुआ है।
दोगुना हुआ रेट
मिट्टी के दियों की मांग का आलम यह है कि पिछले साल के मुकाबले रेट दोगुना हो गया है। जहां पिछली साल महज 40 रुपये में 100 दिये बेचे जा रहे थे, इस बार 80 से 90 रुपये में 100 दिए बिक रहे हैं। वहीं कम दिये लेने पर रेट महंगा हो जाता है। डिजाइनिंग वाले दिए 50 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति पीस तक बिक रहे हैं।
पिछला स्टॉक भी नहीं निकल रहा इस बार
देशभर में चाइनीज माल का विरोध हो रहा है। इसका असर व्यापारियों पर पड़ रहा है। पहले से ही पड़ा स्टॉक इस बार निकलना मुश्किल हो रहा है। पहले से 20 प्रतिशत काम मुश्किल से हो पा रहा है, ग्राहक चाइनीज माल नहीं खरीद रहा। इससे लाखों का नुकसान हो रहा है। चाइनीज माल खरीदने से पहले दो माह पहले एडवांस देना पड़ता है, तब जाकर माल मिलता है। अब की बार पूंजी भी नहीं हो पाएगी।
सुनील, चाइनीज माल थोक विक्रेता।
स्वदेशी तरीके मनाएंगे दिवाली
इस बार स्वदेशी तरीके से दिवाली मनाई जाएगी। बाजार में चाइनीज माल की भरमार है, लेकिन इस बार स्वदेशी माल के साथ जैसे, मिट्टी के दीये और मोमबत्ती व मिठाइयों के साथ दिवाली मनाई जाएगी। चाइनीज का बहिष्कार किया है।
नेहा।
मिट्टी के दीये दे रहे चाइनीज माल को मात
देशभर में चाइनीज माल विरोध हो रहा है। इस बार देश का पैसा देश में ही रहेगा और स्वदेशी तरीके से दिवाली मनाई जाएगी। बाजार में सुंदर-सुंदर मिट्टी के दीये आए हुए जो चाइनीज माल को मात दे रहे है।
सतीश।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। देशभर में चाइनीज सामान के खिलाफ चल रही मुहिम से जींद भी अछूता नहीं है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार चाइनीज सामान की बिक्री पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। चाइनीज सामान की बिक्री कम होने से कुंभकारों के भी अच्छे दिन लौट आये हैं। चाइनीज सामान की बिक्री कम होने से इस बार मिट्टी के दीयों का बाजार गुलजार है। इस बार मार्केट में मिट्टी के दीयों की काफी भरमार देखने को मिल रही है। लोग मिट्टी के दीयों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। वहीं कुंभकारों ने भी मौके की नजाकत को देखते हुए इस बार मिट्टी से निर्मित कई तरह के शानदार आइटम बाजार में उतारे हैं।
मार्केट में दिवाली के मौके पर बिजली की लड़ियों से लेकर, तमाम साज सज्जा का सामान, मूर्तियां सहित काफी सामान चाइनीज आ रहा था। व्यापारियों के अनुसार जिला में दो साल पहले तक दिवाली पर करीब एक करोड़ रुपये का कारोबार चाइनीज माल का होता था, लेकिन अब यह 20 प्रतिशत से भी कम रह गया है।
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मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्भकारों का मानना है कि चाइनीज के विरोध में देश में चली इस मुहिम से इस बार सही मायने में उनकी दिवाली अच्छी मनेगी। गौरतलब है कि बाजार में बढ़ती चाइनीज आइटमों के चलते कुंभकारों का कामधंधा बुरी तरह से चौपट हो गया था। चाइनीज की मार के चलते हर वर्ष कुंभकारों की दिवाली फीकी रहती थी और मिट्टी से निमत दीयों से लोगों का मोह भंग होने लगा था लेकिन इस बार चाइनीज सामान के खिलाफ देशभर में चल रही मुहिम से एक बार फिर से कुंभकारों के दिन बोहर गए हैं। इन कारिगरों की मानें तो कई साल के बाद फिर से पुराने समय की तरह ही मिट्टी के दियों की मांग बढ़ रही है। इस बार लोगों ने चाइनीज आइटमों का बहिष्कार कर स्वदेशी आइटमों की तरफ रूझान किया है। इससे मिट्टी से निर्मित दीये व दूसरी आइटमों की बिक्री में काफी वृद्धि हुई है। इससे चाइनीज के बाजार पर बुरी मार पड़ी है।
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मार्डन पद्धति का लिया सहारा
हनुमान नगर में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले संतलाल के अनुसार अपने रोजगार को बढ़ाने के लिए उन्होंने मार्डन पद्धति का सहारा लिया है। इस बार बाजार में मिट्टी से निर्मित आइटमों की मांग को देखते हुए दीयों वाली थाली, सजावटी सामान, रंग-बिरंगी मूर्तियां, सुराही, नए-नए डिजाइनों के स्टेंड वाले दीए, हटड़ी, व साधारण दीए भी बनाए गए हैं। मिट्टी से निर्मित आइटमों की इस बार खूब मांग है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार उनके कारोबार में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
मोमबत्तियों की मांग भी बढ़ी
इंदिरा बाजार में मोमबत्तियों का कारोबार करने वाले राधेश्याम के अनुसार इस बार मोमबत्तियों की मांग करीब दोगुनी हो गई है। पिछले पांच-छह साल में पहली बार इस प्रकार की मांग देखी जा रही है। यह सब चाइनीज लड़ियों के विरोध के चलते ही संभव हुआ है।
दोगुना हुआ रेट
मिट्टी के दियों की मांग का आलम यह है कि पिछले साल के मुकाबले रेट दोगुना हो गया है। जहां पिछली साल महज 40 रुपये में 100 दिये बेचे जा रहे थे, इस बार 80 से 90 रुपये में 100 दिए बिक रहे हैं। वहीं कम दिये लेने पर रेट महंगा हो जाता है। डिजाइनिंग वाले दिए 50 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति पीस तक बिक रहे हैं।
पिछला स्टॉक भी नहीं निकल रहा इस बार
देशभर में चाइनीज माल का विरोध हो रहा है। इसका असर व्यापारियों पर पड़ रहा है। पहले से ही पड़ा स्टॉक इस बार निकलना मुश्किल हो रहा है। पहले से 20 प्रतिशत काम मुश्किल से हो पा रहा है, ग्राहक चाइनीज माल नहीं खरीद रहा। इससे लाखों का नुकसान हो रहा है। चाइनीज माल खरीदने से पहले दो माह पहले एडवांस देना पड़ता है, तब जाकर माल मिलता है। अब की बार पूंजी भी नहीं हो पाएगी।
सुनील, चाइनीज माल थोक विक्रेता।
स्वदेशी तरीके मनाएंगे दिवाली
इस बार स्वदेशी तरीके से दिवाली मनाई जाएगी। बाजार में चाइनीज माल की भरमार है, लेकिन इस बार स्वदेशी माल के साथ जैसे, मिट्टी के दीये और मोमबत्ती व मिठाइयों के साथ दिवाली मनाई जाएगी। चाइनीज का बहिष्कार किया है।
नेहा।
मिट्टी के दीये दे रहे चाइनीज माल को मात
देशभर में चाइनीज माल विरोध हो रहा है। इस बार देश का पैसा देश में ही रहेगा और स्वदेशी तरीके से दिवाली मनाई जाएगी। बाजार में सुंदर-सुंदर मिट्टी के दीये आए हुए जो चाइनीज माल को मात दे रहे है।
सतीश।