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Jind News: बारिश और ओलावृष्टि से 23041 एकड़ गेहूं और सरसों की फसल बर्बाद
Sat, 25 Mar 2023 10:38 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 25 Mar 2023 10:38 PM IST
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जींद। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 23041 एकड़ में बिजाई की गई रबी की फसल बर्बाद हो गई है। यह जानकारी जिले के 3206 किसानों ने क्षतिपूर्ति पोर्टल पर सूचना देकर दर्ज कराई है। साथ ही सरकार से मुआवजे की मांग उठाई है।
खराब हुई फसल की सूचना लगातार आ रही हैं। अब तक क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जिले के 3206 किसानों ने सूचना दर्ज करवाई है। किसानों की ओर से दर्ज करवाई गई सूचना के अनुसार कुल 23041 एकड़ में गेहूं और सरसों की फसल खराब हुई है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र अलेवा का हुआ है, जहां 4564 एकड़ में बारिश और ओलावृष्टि से फसलें तबाह हुई हैं। इसके बाद जींद तहसील का क्षेत्र प्रभावित हुआ है। यहा 4363 एकड़ में फसलों को बारिश से नुकसान हुआ है। सफीदों में 3556 एकड़, उचाना में 3198 एकड़, नरवाना में 2689 एकड़, पिल्लूखेड़ा में 2658 एकड़ और जुलाना में 2010 एकड़ में बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हुई है।
ब्लॉकवार आई फसल बर्बादी की शिकायत
अलेवा
542
जींद
664
जुलाना
316
नरवाना
405
पिल्लूखेड़ा
381
सफीदों
441
उचाना
482
जींद तहसील में 35 प्रतिशत हो चुका ई-गिरदावरी का काम
पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल बर्बादी को लेकर जिले में ई-गिरदावरी का काम शुरू हो चुका है। जिले में सबसे पहले जींद तहसील में शुरू हुआ था, जो अब 35 प्रतिशत कार्य हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार बाकी ब्लॉकों में अभी ई-गिरदावरी का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जींद के बाद जुलाना में पटवारी और जुलाना के पटवारियों ने ई-गिरदावरी का काम शुरू तो किया है, लेकिन अभी तक तहसीलदार की तरफ से इस सर्वे की जांच-पड़ताल नहीं की है, जिससे यह सर्वे अभी अधूरा पड़ा है।
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21 मार्च थी खराब फसलों की बीमा कागजात जमा कराने की अंतिम तारीख
जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा करवाया था, उन किसानों को बीमा संबंधित कागजात कृषि उप निदेशक कार्यालय में रिलायंस कंपनी के कर्मचारी के पास जमा करवाने थे। कागजात जमा करवाने की अंतिम तारीख 21 मार्च थी। इसको लेकर पिछले चार-पांच दिनों में लगभग 3980 किसान अपनी फसलों के बीमा के कागजात जमा करवा चुके हैं। हालांकि बीमा कंपनी के कर्मचारियों ने 23 मार्च को शहीदी दिवस पर अवकाश होने के चलते 24 मार्च को भी किसानों के कागजात जमा करवाए थे। अंतिम तारीख जाने के बाद कर्मचारियों ने कागजात लेने से मना कर दिया है और अब कागजात जमा नहीं होंगे।
वर्जन
क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अब तक 3206 किसानों ने बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों की सूचनाएं दर्ज करवाई हैं। इसको लेकर जींद में ई-गिरदावरी का काम 35 प्रतिशत हो चुका है। ई-गिरदावरी को लेकर निर्देश हैं कि जल्द से जल्द खराब हुई फसलों की ई-गिरदावरी करवाई जाए, ताकि किसानों को समय पर फसल खराबे का मुआवजा मिल सके।
-- अजय सैनी, तहसीलदार, जींद।
शुक्रवार की रात को हुई बारिश के कारण फिर खराब हुईं फसलें
40 प्रतिशत से खराब बढ़कर 60 प्रतिशत तक होने की आशंका
-- उचाना में हुई सबसे ज्यादा 12 एमएम बारिश
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। रात को फिर बारिश होने से फसलों के खराब होने का प्रतिशत बढ़ गया है। अनुमान के अनुसार पहले 40 प्रतिशत फसल खराब हुई थी। बारिश व तेज हवा के कारण गेहूं की फसल गिर गई थी। अब फिर से बारिश होने से गेहूं के दाने काले पडने की आशंका है। यदि ऐसा हुआ तो फिर गेहूं में नुकसान 40 प्रतिशत की बजाय 60 प्रतिशत तक हो जाएगा। शुक्रवार रात को सबसे अधिक उचाना में 12 एमएम बारिश दर्ज की गई।
जींद में चार, नरवाना में चार, सफीदों में तीन, जुलाना में बंूदाबांदी, पिल्लूखेड़ा में चार, उचाना में 12 तथा अलेवा में पांच एमएम बारिश दर्ज की गई। बेमौसमी बरसात के कारण सबसे अधिक इस समय गेहूं की फसल पर प्रभाव पड़ रहा है। पहले ही हवा व बारिश के कारण गिरी फसल में अब और अधिक नुकसान की आशंका हैं। पूर्व खंड कृषि अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि जमीन पर गिरने के कारण गेहूं का दाना काला पडने की आशंका है। पहले से ही जमीन पर गिरी फसल और फिर से बारिश होना काफी नुकसानदायक होगा।
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खराब हुई फसल की सूचना लगातार आ रही हैं। अब तक क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जिले के 3206 किसानों ने सूचना दर्ज करवाई है। किसानों की ओर से दर्ज करवाई गई सूचना के अनुसार कुल 23041 एकड़ में गेहूं और सरसों की फसल खराब हुई है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र अलेवा का हुआ है, जहां 4564 एकड़ में बारिश और ओलावृष्टि से फसलें तबाह हुई हैं। इसके बाद जींद तहसील का क्षेत्र प्रभावित हुआ है। यहा 4363 एकड़ में फसलों को बारिश से नुकसान हुआ है। सफीदों में 3556 एकड़, उचाना में 3198 एकड़, नरवाना में 2689 एकड़, पिल्लूखेड़ा में 2658 एकड़ और जुलाना में 2010 एकड़ में बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद हुई है।
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ब्लॉकवार आई फसल बर्बादी की शिकायत
अलेवा
542
जींद
664
जुलाना
316
नरवाना
405
पिल्लूखेड़ा
381
सफीदों
441
उचाना
482
जींद तहसील में 35 प्रतिशत हो चुका ई-गिरदावरी का काम
पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल बर्बादी को लेकर जिले में ई-गिरदावरी का काम शुरू हो चुका है। जिले में सबसे पहले जींद तहसील में शुरू हुआ था, जो अब 35 प्रतिशत कार्य हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार बाकी ब्लॉकों में अभी ई-गिरदावरी का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जींद के बाद जुलाना में पटवारी और जुलाना के पटवारियों ने ई-गिरदावरी का काम शुरू तो किया है, लेकिन अभी तक तहसीलदार की तरफ से इस सर्वे की जांच-पड़ताल नहीं की है, जिससे यह सर्वे अभी अधूरा पड़ा है।
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21 मार्च थी खराब फसलों की बीमा कागजात जमा कराने की अंतिम तारीख
जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा करवाया था, उन किसानों को बीमा संबंधित कागजात कृषि उप निदेशक कार्यालय में रिलायंस कंपनी के कर्मचारी के पास जमा करवाने थे। कागजात जमा करवाने की अंतिम तारीख 21 मार्च थी। इसको लेकर पिछले चार-पांच दिनों में लगभग 3980 किसान अपनी फसलों के बीमा के कागजात जमा करवा चुके हैं। हालांकि बीमा कंपनी के कर्मचारियों ने 23 मार्च को शहीदी दिवस पर अवकाश होने के चलते 24 मार्च को भी किसानों के कागजात जमा करवाए थे। अंतिम तारीख जाने के बाद कर्मचारियों ने कागजात लेने से मना कर दिया है और अब कागजात जमा नहीं होंगे।
वर्जन
क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अब तक 3206 किसानों ने बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों की सूचनाएं दर्ज करवाई हैं। इसको लेकर जींद में ई-गिरदावरी का काम 35 प्रतिशत हो चुका है। ई-गिरदावरी को लेकर निर्देश हैं कि जल्द से जल्द खराब हुई फसलों की ई-गिरदावरी करवाई जाए, ताकि किसानों को समय पर फसल खराबे का मुआवजा मिल सके।
शुक्रवार की रात को हुई बारिश के कारण फिर खराब हुईं फसलें
40 प्रतिशत से खराब बढ़कर 60 प्रतिशत तक होने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। रात को फिर बारिश होने से फसलों के खराब होने का प्रतिशत बढ़ गया है। अनुमान के अनुसार पहले 40 प्रतिशत फसल खराब हुई थी। बारिश व तेज हवा के कारण गेहूं की फसल गिर गई थी। अब फिर से बारिश होने से गेहूं के दाने काले पडने की आशंका है। यदि ऐसा हुआ तो फिर गेहूं में नुकसान 40 प्रतिशत की बजाय 60 प्रतिशत तक हो जाएगा। शुक्रवार रात को सबसे अधिक उचाना में 12 एमएम बारिश दर्ज की गई।
जींद में चार, नरवाना में चार, सफीदों में तीन, जुलाना में बंूदाबांदी, पिल्लूखेड़ा में चार, उचाना में 12 तथा अलेवा में पांच एमएम बारिश दर्ज की गई। बेमौसमी बरसात के कारण सबसे अधिक इस समय गेहूं की फसल पर प्रभाव पड़ रहा है। पहले ही हवा व बारिश के कारण गिरी फसल में अब और अधिक नुकसान की आशंका हैं। पूर्व खंड कृषि अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि जमीन पर गिरने के कारण गेहूं का दाना काला पडने की आशंका है। पहले से ही जमीन पर गिरी फसल और फिर से बारिश होना काफी नुकसानदायक होगा।