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Jind News: शामलात भूमि पर बने 20 साल पुराने मकान होंगे वैध
Sat, 25 Oct 2025 11:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 25 Oct 2025 11:48 PM IST
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जींद। गांवों की शामलात भूमि पर बने पुराने अवैध मकानों को वैध रूप से नियमित करने के लिए हरियाणा सरकार की ओर से एक मानक संचालन प्रक्रिया एसओपी जारी की गई है। जींद के सात केस सरकार को मंजूरी के लिए भेजे गए हैं।
यह प्रक्रिया केवल उन ग्रामीण निवासियों पर लागू होगी जिसमें कम क्षेत्रफल की जोहड़ की जमीन व ऐसी भूमि जिससे रास्ते में रुकावट हो उसे छोड़कर जिन्होंने 500 वर्ग गज या शामलात देह की गैर कृषि भूमि पर 31 मार्च 2004 से पहले मकान बना लिया था।
एडीसी विवेक आर्य ने बताया कि संबंधित व्यक्ति को ग्राम पंचायत को आवेदन देना होगा। जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि मकान 31 मार्च 2004 से पहले बनाया गया है। इसके साथ जमाबंदी, खसरा गिरदावरी, साइट प्लान, मकान के फोटोग्राफ व कब्जा साबित करने वाले दस्तावेज संलग्न करने होंगे।
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साथ ही पंचायत द्वारा भूमि उपयोग योजना भी तैयार की जाएगी। ग्राम सचिव इस प्रस्ताव को आवश्यक दस्तावेजों सहित बीडीपीओ को भेजेगा। बीडीपीओ निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर प्रस्ताव को डीसी के पास भेजेगा जिसमें वर्ष 2004 या उसके बाद की कलेक्टर दर भी शामिल होगी।
डीसी यदि ग्राम पंचायत के हित में उपयुक्त समझें तो प्रस्ताव निदेशक पंचायती राज विभाग को स्वीकृति के लिए भेजेंगे आवेदनकर्ता को निर्धारित स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान करना होगा।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि इस प्रक्रिया की जानकारी आमजन तक पहुंचाएं और पात्र मामलों को नियमानुसार शीघ्रता से आगे बढ़ाएं।
इनमें उझाना ब्लॉक के गांव डिंडोली का एक केस, सफीदों ब्लॉक के गांव बसिनी के पांच केस और जुलाना ब्लॉक के गांव शामलो कलां का एक केस शामिल है।
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यह प्रक्रिया केवल उन ग्रामीण निवासियों पर लागू होगी जिसमें कम क्षेत्रफल की जोहड़ की जमीन व ऐसी भूमि जिससे रास्ते में रुकावट हो उसे छोड़कर जिन्होंने 500 वर्ग गज या शामलात देह की गैर कृषि भूमि पर 31 मार्च 2004 से पहले मकान बना लिया था।
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एडीसी विवेक आर्य ने बताया कि संबंधित व्यक्ति को ग्राम पंचायत को आवेदन देना होगा। जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि मकान 31 मार्च 2004 से पहले बनाया गया है। इसके साथ जमाबंदी, खसरा गिरदावरी, साइट प्लान, मकान के फोटोग्राफ व कब्जा साबित करने वाले दस्तावेज संलग्न करने होंगे।
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साथ ही पंचायत द्वारा भूमि उपयोग योजना भी तैयार की जाएगी। ग्राम सचिव इस प्रस्ताव को आवश्यक दस्तावेजों सहित बीडीपीओ को भेजेगा। बीडीपीओ निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर प्रस्ताव को डीसी के पास भेजेगा जिसमें वर्ष 2004 या उसके बाद की कलेक्टर दर भी शामिल होगी।
डीसी यदि ग्राम पंचायत के हित में उपयुक्त समझें तो प्रस्ताव निदेशक पंचायती राज विभाग को स्वीकृति के लिए भेजेंगे आवेदनकर्ता को निर्धारित स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान करना होगा।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि इस प्रक्रिया की जानकारी आमजन तक पहुंचाएं और पात्र मामलों को नियमानुसार शीघ्रता से आगे बढ़ाएं।
इनमें उझाना ब्लॉक के गांव डिंडोली का एक केस, सफीदों ब्लॉक के गांव बसिनी के पांच केस और जुलाना ब्लॉक के गांव शामलो कलां का एक केस शामिल है।