फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   20 lakhs spent, still the cattle roaming on the streets

जींद: 20 लाख खर्च, फिर भी सड़कों पर घूम रहा गोवंश

Tue, 14 Feb 2023 12:05 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 14 Feb 2023 12:05 AM IST
विज्ञापन
20 lakhs spent, still the cattle roaming on the streets
जींद। शहर की दो गोशालाओं में गोवंश के रखरखाव के लिए सरकार ने 20 लाख रुपये दिए लेकिन इसके बावजूद शहर में बेसहारा पशु कम नहीं हो रहे। कई तो कुत्तों का शिकार भी बन रहे हैं। बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए माजरा खाप ने तीन दिन पहले प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था। चेताया था कि पशुओं को नहीं पकड़ा तो वह अधिकारियों के निवास स्थानों पर इन पशुओं को बांध देगा। इस मुद्दे पर सोमवार को माजरा खाप की नगराधीश के साथ बैठक हुई। इसमें नगराधीश द्वारा पशुओं को जल्द पकड़ने के आश्वासन पर खाप ने पशुओं को दफ्तरों में भरने का अल्टीमेटम वापस तो ले लिया लेकिन हकीकत ये है कि शहर में तीन गोशालाओं में पशु रखने के लिए जगह ही नहीं है। गोशालाएं भरने की वजह से संचालक यहां पर पशु लेने से हाथ खडे़ कर रहे हैं। यही वजह है कि नगर परिषद को गोवंश पकड़ने का अभियान बीच में बंद करना पड़ा था। अब सवाल उठता है कि जब इन्हें रखने की जगह ही नहीं है तो प्रशासन इन्हें रखेगा कहां।
विज्ञापन

शहर के बीचोंबीच गुजर रही हांसी ब्रांच नहर के पास अस्थाई नंदीशाला बनाई गई है। इसमें फिलहाल तीन हजार के आसपास गोवंश है। इस नंदीशाला में क्षमता से अधिक पशु पहले ही हैं। इन पशुओं का भी सही समय पर भरण-पोषण नहीं हो रहा है। नंदीशाला में सर्दियों में काफी पशुओं की मौत हो चुकी है। इसके अलावा इसके पीछे मीट मार्केट है, यहां रहने वाले कुत्ते मांसाहारी हैं। नंदीशाला की दीवार छोटी होने के कारण कई बार कुत्ते इन पशुओं को अपना शिकार बना चुके हैं। इसी प्रकार हांसी रोड पर सुनंदी गोशाला है। इसमें पशुओं की संख्या 700 से अधिक है। इस गोशाला की क्षमता भी इन पशुओं की संख्या से कम ही है। इसमें और पशुओं को नहीं रखा जा सकता। ऐसे में जिला प्रशासन यदि शहर से गोवंश को पकड़ता है फिर इनको कहां छोड़ा जाएगा, इसकी समस्या पैदा हो जाएगी। गोशाला व नंदीशाला में रह रहे पशुओं की हालत काफी दयनीय हो चुकी है। इनके सामने कई बार चारे की समस्या आ चुकी है। लंबी चर्म रोग वायरस के कारण दोनों ही गोशालाओं में काफी पशुओं की मौत हो गई थी। शहर में घूम रहे बेसहारा पशुओं को कुत्ते अपना शिकार बना रहे हैं। लगातार गोवंश को काटा जा रहा है। एक महीने पहले एक छोटी बछड़ी को कुत्तों ने नोच-नोच कर मौत के घाट उतार दिया था। शनिवार रात को भी कुत्तों ने एक गाय तथा उसके बछड़े को नोच खाया। जींद विकास संगठन के प्रधान डॉ. राजकुमार गोयल ने शहर में घूम रहे खूंखार कुत्तों को पकड़ने की मांग की है। नगर परिषद ने नवंबर महीने में अभियान चलाकर इन दोनों ही गोशालाओं में 1400 पशुओं को पकड़कर छोड़ा था। इसके बाद इन गोशालाओं की क्षमता पूरी होने के बाद नगर परिषद ने अभियान पशु पकड़ने का अभियान बंद कर दिया था। यदि इन गोशालाओं में क्षमता से अधिक पशुओं को रखा जाएगा तो इनके सामने चारे का संकट पैदा हो जाएगा।
विज्ञापन


बॉक्स
खुद के ही संसाधनों से चल रही श्रीकृष्ण गोशाला
भिवानी रोड पर स्थित श्रीकृष्ण गोशाला पूरे जिले में एकमात्र ऐसी गोशाला है, जो खुद के संसाधनों से चलाई जा रही है। इस गोशाला के पास 140 एकड़ जमीन है, जिसमें गायों के लिए चारा उगाया जाता है। इसके अलावा इस गोशाला की 70 के आसपास दुकानें हैं, जिनसे किराया आता है। गोशाला प्रधान संतलाल चुघ ने कहा कि उनके पास 800 के आसपास गाय हैं। उनकी 1300 तक गाय रखने की क्षमता है। यदि प्रशासन 500 गोवंश को उनकी गोशाला में छोड़ना चाहे तो छोड़ सकता है। जितने उनके पास संसाधन हैं, उतनी ही संख्या में वह गोवंश रखते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बॉक्स
दस हजार से ज्यादा गोवंश गोशालाओं से बाहर
जिले में 306 गांव हैं। इसके अलावा जींद, नरवाना, उचाना, उझाना, सफीदों, जुलाना, पिल्लूखेड़ा, अलेवा शहरों में भी गोवंश बेसहारा घूम रहा है। एक अनुमान के अनुसार जिले में इस समय गोशालाओं में छह हजार के आसपास गोवंश हैं, जबकि दस हजार से ज्यादा गोवंश बाहर घूम रहा है। पूरे जिले से गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ना असंभव है। इतने गोवंश की गोशालाओं में व्यवस्था नहीं हो सकती।
बॉक्स

वर्जन
नवंबर महीने में लगभग 1300 के आसपास बेसहारा गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा गया था। इससे अधिक गोवंश को इन गोशालाओं में नहीं रखा जा सकता। इसलिए अभियान को बंद करना पड़ा। कुछ अन्य गोशाला संचालकों से भी बात हुई थी लेकिन सभी ने गोवंश को लेने से मना कर दिया था। एक-दो गोशाला संचालकों से बातचीत चल रही है, यदि किसी में जगह हुई तो फिर से अभियान चलाकर गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा जाएगा।

डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन
वर्जन
माजरा खाप के लोग खेतों में बेसहारा पशुओं से हो रहे नुकसान को लेकर मिले थे। जिले की सभी गोशाला संचालकों से बातचीत चल रही है। जिस-जिस गोशाला में जितने पशुओं को लिया जाएगा, उतनी संख्या में पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा जाएगा। नगर परिषद व अन्य अधिकारियों की बैठक ली जाएगी और हर संभव प्रयास किए जाएंगे ताकि लोगों को नुकसान नहीं हो।
-अमित कुमार, नगराधीश जींद।

फोटो कैप्शन 13जेएनडी03 : बेसहारा पशुओं को पकडने की मांग को लेकर नगराधीश से बातचीत करता माजरा खाप का प्रतिनिधिमंडल। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed