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Jind News: जिले में बच्चों को गोद लेने के लिए तीन साल से लंबित 20 मामले

Sat, 01 Nov 2025 12:28 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 12:28 AM IST
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20 cases pending for three years for adoption of children in the district
जींद। बच्चों को गोद लेने के इच्छुक परिवारों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। पिछले तीन वर्षों से गोद लेने के लिए लंबित 20 से अधिक मामले फाइलों में ही अटके हुए हैं। इन मामलों की मुख्य वजह बच्चों की संख्या में कमी बताई जा रही है।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध बच्चों की तुलना में आवेदकों की संख्या अधिक होने से प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इससे न केवल गोद लेने वाले अभिभावकों की उम्मीदें टूट रही हैं बल्कि अनाथालयों में रहने वाले बच्चों का भविष्य भी अनिश्चितता के घेरे में है।
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गोद लेने की प्रक्रिया केंद्रीय गोद लेने संसाधन प्राधिकरण (कारा) के दिशा-निर्देशों के तहत चलती है। वर्तमान में जिले के विभिन्न अनाथालयों और बाल गृहों में केवल सीमित संख्या में बच्चे उपलब्ध हैं। सामान्य स्वस्थ शिशुओं की कमी के कारण कई योग्य दंपति वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
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बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया जटिल
बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया तीन प्रमुख चरणों से गुजरती है जो काफी जटिल और समय लेने वाली है। पहला चरण पंजीकरण और होम स्टडी है। इसमें आवेदक दंपति को ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। इसके बाद सोशल वर्कर की टीम उनके घर का दौरा करती है और परिवार की आर्थिक स्थिति, रहन-सहन का मूल्यांकन करती है। दूसरा चरण कानूनी जांच का होता है जहां दंपती के दस्तावेजों की गहन जांच की जाती है। तीसरा और अंतिम चरण मैचिंग का है जिसमें उपलब्ध बच्चे की प्रोफाइल आवेदक से मिलाई जाती है। यदि मैच होता है, तो कोर्ट की मंजूरी के बाद गोद लेना पूरा होता है।
मेडिकल रिपोर्ट के साथ पड़ोसियों से फीडबैक भी जरूरी
इन चरणों में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के चरित्र, आमदनी और व्यवहार की गहन जांच होती है। विभागीय टीम पुलिस वेरिफिकेशन, मेडिकल रिपोर्ट और पड़ोसियों से फीडबैक लेती है। इसके कारण कई दंपति की उम्र निकल जाती है लेकिन उनको बच्चा नहीं मिलता। कई मामलों में ज्यादा चक्कर काटने के कारण दंपती प्रक्रिया को ही अधूरी छोड़ देते हैं। जिला प्रशासन अब इस समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय एजेंसी से अधिक बच्चों की उपलब्धता की मांग कर रहा है।

वर्जन
जागरूकता अभियान चलाकर भी लोगों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह केवल प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दा है। हमें अनाथ बच्चों को परिवार देने की दिशा में तेजी लानी होगी। यदि यह स्थिति ऐसे ही बनी रही तो जींद में गोद लेने के इच्छुक परिवारों की निराशा और बढ़ेगी। -सीमा देवी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला व बाल विकास विभाग
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