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50 हजार कर्मचारियों का रोजगार बचाने के लिए लाए अध्यादेश : रामनिवास
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:16 AM IST
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50 हजार कर्मचारियों का रोजगार बचाने के लिए लाए अध्यादेश : रामनिवास
अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। हरियाणा कर्मचारी महासंघ जिला जींद की बैठक उचाना बस स्टैंड में जिला प्रवक्ता रामनिवास खरक भूरा की अध्यक्षता में हुई। जिला प्रधान कृष्ण नैन व भूरा ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा मानसून सत्र में दिए गए आश्वासन के अनुसार हाईकोर्ट से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने व अन्य विभागों में कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों को पक्का करने के लिए अध्यादेश लाने की की मांग करता हूं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार 30 नवंबर से पहले अध्यादेश नहीं लेकर आती है तो 50 हजार अनुबंध पर लगे अनियमित कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, जिसमें 2014 में अधिसूचित नियमितीकरण की पॉलिसी की नीति के तहत नियमित हुए 4654 कर्मचारी भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार विधानसभा में दिए गए आश्वासन के अनुसार अध्यादेश लाने का निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। एचएसईबी वर्कर्स यूनियन दिल्ली के सर्किल सचिव नरेंद्र सूरजाखेड़ा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने अधिसूचना-2014 की नियमितीकरण की पॉलिसी हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार छह महीने में सभी अनुबंधित कर्मचारियों को हटाकर इन पदों पर नियमित भर्ती करने के लिए कहा गया था। जिससे विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 50 हजार कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक गई है।
मानसून सत्र में कांग्रेस और इनेलो ने विधानसभा में प्रभावित कर्मचारियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार विस में बिल न लाकर, हाईकोर्ट से प्रभावित कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेगी। यदि हाईकोर्ट के निर्णय पर स्टे नही मिला या एसएलपी पर सुनवाई नहीं हुई तो सरकार अध्यादेश लाएगी। सरकार द्वारा दायर की गई एसएलपी पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई। 30 नवंबर 2018 को हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार छह महीने पूरे हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट का निर्णय लागू करना ही पड़ेगा। जिससे 50 हजार कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।
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अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। हरियाणा कर्मचारी महासंघ जिला जींद की बैठक उचाना बस स्टैंड में जिला प्रवक्ता रामनिवास खरक भूरा की अध्यक्षता में हुई। जिला प्रधान कृष्ण नैन व भूरा ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा मानसून सत्र में दिए गए आश्वासन के अनुसार हाईकोर्ट से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने व अन्य विभागों में कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों को पक्का करने के लिए अध्यादेश लाने की की मांग करता हूं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार 30 नवंबर से पहले अध्यादेश नहीं लेकर आती है तो 50 हजार अनुबंध पर लगे अनियमित कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, जिसमें 2014 में अधिसूचित नियमितीकरण की पॉलिसी की नीति के तहत नियमित हुए 4654 कर्मचारी भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार विधानसभा में दिए गए आश्वासन के अनुसार अध्यादेश लाने का निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। एचएसईबी वर्कर्स यूनियन दिल्ली के सर्किल सचिव नरेंद्र सूरजाखेड़ा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने अधिसूचना-2014 की नियमितीकरण की पॉलिसी हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार छह महीने में सभी अनुबंधित कर्मचारियों को हटाकर इन पदों पर नियमित भर्ती करने के लिए कहा गया था। जिससे विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 50 हजार कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक गई है।
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मानसून सत्र में कांग्रेस और इनेलो ने विधानसभा में प्रभावित कर्मचारियों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार विस में बिल न लाकर, हाईकोर्ट से प्रभावित कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करेगी। यदि हाईकोर्ट के निर्णय पर स्टे नही मिला या एसएलपी पर सुनवाई नहीं हुई तो सरकार अध्यादेश लाएगी। सरकार द्वारा दायर की गई एसएलपी पर अभी तक सुनवाई नहीं हुई। 30 नवंबर 2018 को हाईकोर्ट के निर्णय के अनुसार छह महीने पूरे हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली तो हाईकोर्ट का निर्णय लागू करना ही पड़ेगा। जिससे 50 हजार कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।
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