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मनरेगा मजदूर 23 को करेंगे जिला सचिवालय पर प्रदर्शन
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:09 AM IST
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मनरेगा मजदूर 23 को करेंगे जिला सचिवालय पर प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
मनरेगा कामगार यूनियन अपनी मांगों को लेकर 23 जनवरी को जिला सचिवालय पर प्रदर्शन करेंगे। इसकी तैयारी को लेकर रविवार को यूनियन के संयोजक रमेश चंद्र ने संगतपुरा गांव के मनरेगा मजदूरों की बैठक की।
रमेश चंद्र ने कहा कि ग्रामीण विकास और रोजगार से जुड़े मनरेगा के कानून पर लगातार भाजपा सरकारें हमला कर रही हैं, जो गरीब लोगों की रोजी-रोटी पर कुठाराघात है, क्योंकि लगातार मनरेगा के बजट में केंद्र सरकार द्वारा कटौती की जा रही हैं और प्रदेश सरकार इसे लागू करने में अनदेखी कर रही है। इसके चलते काम करने के बावजूद लंबे-लंबे समय तक मजदूरों की मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता। अब भी पिछले एक साल से मैटीरियल और पक्के काम का पैसा नहीं मिला है। पिछले चार महीने से मजदूरी का भुगतान रुका हुआ है। जिला कमेटी के सदस्य जागेराम ने कहा कि ज्यादातर गांवों में मांगने पर मनरेगा के तहत काम नहीं दिया जा रहा है, जबकि कानून में स्पष्ट है कि मांगने पर 14 दिन के अंदर-अंदर काम दिया जाएगा और काम के बाद 15 दिन के अंदर ही मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। मनरेगा कानून के तहत 100 दिन के काम की गारंटी है, परंतु प्रशासन द्वारा काम देने में हेरा-फेरी की जा रही है। मस्टरोल की पूरी अवधि खत्म होने से पहले ही अगर काम बंद कर दिया जाता है और जितने दिन का मस्टरोल जारी हुआ था, उसे आधार बनाकर 100 दिन से कम कर दिया जाता है जो सरासर कानून का उलंघन है जिसके खिलाफ आगामी 23 जनवरी को मनरेगा से जुड़ी मांगों और समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में करतार, रफी मोहम्मद, राममेहर, नरसी, फूलपति, रामरती, राजबाला, लक्ष्मी, रचना, किरण आदि मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
मनरेगा कामगार यूनियन अपनी मांगों को लेकर 23 जनवरी को जिला सचिवालय पर प्रदर्शन करेंगे। इसकी तैयारी को लेकर रविवार को यूनियन के संयोजक रमेश चंद्र ने संगतपुरा गांव के मनरेगा मजदूरों की बैठक की।
रमेश चंद्र ने कहा कि ग्रामीण विकास और रोजगार से जुड़े मनरेगा के कानून पर लगातार भाजपा सरकारें हमला कर रही हैं, जो गरीब लोगों की रोजी-रोटी पर कुठाराघात है, क्योंकि लगातार मनरेगा के बजट में केंद्र सरकार द्वारा कटौती की जा रही हैं और प्रदेश सरकार इसे लागू करने में अनदेखी कर रही है। इसके चलते काम करने के बावजूद लंबे-लंबे समय तक मजदूरों की मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता। अब भी पिछले एक साल से मैटीरियल और पक्के काम का पैसा नहीं मिला है। पिछले चार महीने से मजदूरी का भुगतान रुका हुआ है। जिला कमेटी के सदस्य जागेराम ने कहा कि ज्यादातर गांवों में मांगने पर मनरेगा के तहत काम नहीं दिया जा रहा है, जबकि कानून में स्पष्ट है कि मांगने पर 14 दिन के अंदर-अंदर काम दिया जाएगा और काम के बाद 15 दिन के अंदर ही मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। मनरेगा कानून के तहत 100 दिन के काम की गारंटी है, परंतु प्रशासन द्वारा काम देने में हेरा-फेरी की जा रही है। मस्टरोल की पूरी अवधि खत्म होने से पहले ही अगर काम बंद कर दिया जाता है और जितने दिन का मस्टरोल जारी हुआ था, उसे आधार बनाकर 100 दिन से कम कर दिया जाता है जो सरासर कानून का उलंघन है जिसके खिलाफ आगामी 23 जनवरी को मनरेगा से जुड़ी मांगों और समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में करतार, रफी मोहम्मद, राममेहर, नरसी, फूलपति, रामरती, राजबाला, लक्ष्मी, रचना, किरण आदि मौजूद थे।
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