{"_id":"5a4147174f1c1b74698c3f2f","slug":"181514227479-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला में वैंटीलेटर पर स्वास्थ्य सेवाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला में वैंटीलेटर पर स्वास्थ्य सेवाएं
Updated Tue, 26 Dec 2017 12:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
भले ही सरकार बेहतर चिकित्सा सेवा देने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयान कर रही है। जिला में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर चल रही हैं। चिकित्सकों से लेकर स्टाफ नर्स और फील्ड में काम करने वाले एमपीएचडब्ल्यू तक के पद खाली पड़े हैं। ऐेसे में लोगों को सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा है।
अमर उजाला ने स्वास्थ्य सेवाओं की हालत जांचने के लिए निरीक्षण किया तो जिला भर में स्टाफ का भारी टोटा मिला। जिला में चार नागरिक अस्पताल हैं, कहीं भी चिकित्सकों की संख्या पूरी नहीं हैं। वहीं इनडोर मरीजों की देखभाल के लिए स्टाफ नर्स और सिस्टर नर्सों की संख्या भी पूरी नहीं है। जिला भर में लैब टेक्नीशियन की भी भारी कमी है। इसके चलते कई ग्रामीण पीएचसी पर लोगों को टेस्ट की सुविधा नहीं मिल पाती। हीमोग्लोबिन से लेकर ब्लड ग्रुप तक की जांच के लिए नागरिक अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
एमपीएचडब्ल्यू मेल के पूरे पद ही नहीं स्वीकृत
जिला की आबादी के अनुसार बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी (एमपीएचडब्ल्यू)मेल 190 पद स्वीकृत होने चाहिए, लेकिन अभी तक 152 पद ही स्वीकृत हैं। 152 में से भी 130 पदों पर ही कर्मचारी तैनात हैं, जबकि 22 पद खाली हैं। यदि जनसंख्या के अनुसार देखा जाए तो रिक्त पदों की संख्या 60 हो जाती है।
विज्ञापन
200 बेड का अस्पताल, स्टाफ 100 का भी नहीं
कहने को तो जींद का जिला अस्पताल 200 बेड का हो गया है, लेकिन यहां सुविधाएं 100 बेड की भी नहीं हैं। यहां तैनात स्टाफ के स्वीकृत पद भी फिलहाल 100 बेड के अनुसार ही हैं और वे भी पूरी तरह से भरे नहीं हैं। जिला में फिजीसियन सिर्फ एक है, वह भी जुलाना सीएचसी में तैनात है। ऑर्थो का भी जिला के चार नागरिक अस्पतालों पर एक ही चिकित्सक है, वह भी लंबे इंतजार के बाद कुछ दिन पहले ही नागरिक अस्पताल जींद में तैनात हुए हैं। इसके अलावा एमडी गायनी की भी स्थाई नियुक्ति नहीं है।
रेफर सेंटर बने अस्पताल
जिला के सभी नागरिक अस्पताल फिलहाल सिर्फ रेफर सेंटर बन कर रह गए हैं। दुर्घटना के मामलों में अधिकतर अस्पताल मरीजों को पीजीआई रोहतक या खानपुर ही रेफर करते हैं। अन्य मरीजों को भी अच्छा इलाज लेने के लिए हिसार, रोहतक, खानपुर या पटियाला का रूख करना पड़ता है।
नहीं मिलते चिकित्सक
नागरिक अस्पताल में इलाज की सुविधाएं नहीं हैं। चिकित्सकों की भारी कमी है। छुट्टी के दिन की तो छोड़ो, कार्य दिवस में भी सामान्य इलाज तक नहीं मिल पाता। यहां चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए।
कृष्ण कुमार पांचाल
नया भवन तो बना इलाज नहीं
भले ही सरकार ने नागरिक अस्पताल में नया भवन दे दिया है, लेकिन इलाज के लिए चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं है। मरीजों को भारी परेशानी होती है। अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। बाहर से महंगे टेस्ट करवाने पड़ते हैं।
विक्की
स्टाफ की कमी है
स्टाफ की कमी है। इसको लेकर सरकार को लिखा गया है। अभी कुछ चिकित्सकों के तबादले जींद हुए हैं, लेकिन पीजी परीक्षा के कारण कई चिकित्सक छुट्टी पर हैं। नए साल में यह चिकित्सक भी दोबारा ज्वाइन करेंगे। यहां तैनात स्टाफ की कार्यकुशलता बेहतर कर लोगों को बेहतर इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
विज्ञापन
जींद।
भले ही सरकार बेहतर चिकित्सा सेवा देने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयान कर रही है। जिला में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर चल रही हैं। चिकित्सकों से लेकर स्टाफ नर्स और फील्ड में काम करने वाले एमपीएचडब्ल्यू तक के पद खाली पड़े हैं। ऐेसे में लोगों को सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा है।
अमर उजाला ने स्वास्थ्य सेवाओं की हालत जांचने के लिए निरीक्षण किया तो जिला भर में स्टाफ का भारी टोटा मिला। जिला में चार नागरिक अस्पताल हैं, कहीं भी चिकित्सकों की संख्या पूरी नहीं हैं। वहीं इनडोर मरीजों की देखभाल के लिए स्टाफ नर्स और सिस्टर नर्सों की संख्या भी पूरी नहीं है। जिला भर में लैब टेक्नीशियन की भी भारी कमी है। इसके चलते कई ग्रामीण पीएचसी पर लोगों को टेस्ट की सुविधा नहीं मिल पाती। हीमोग्लोबिन से लेकर ब्लड ग्रुप तक की जांच के लिए नागरिक अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
एमपीएचडब्ल्यू मेल के पूरे पद ही नहीं स्वीकृत
जिला की आबादी के अनुसार बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी (एमपीएचडब्ल्यू)मेल 190 पद स्वीकृत होने चाहिए, लेकिन अभी तक 152 पद ही स्वीकृत हैं। 152 में से भी 130 पदों पर ही कर्मचारी तैनात हैं, जबकि 22 पद खाली हैं। यदि जनसंख्या के अनुसार देखा जाए तो रिक्त पदों की संख्या 60 हो जाती है।
विज्ञापन
200 बेड का अस्पताल, स्टाफ 100 का भी नहीं
कहने को तो जींद का जिला अस्पताल 200 बेड का हो गया है, लेकिन यहां सुविधाएं 100 बेड की भी नहीं हैं। यहां तैनात स्टाफ के स्वीकृत पद भी फिलहाल 100 बेड के अनुसार ही हैं और वे भी पूरी तरह से भरे नहीं हैं। जिला में फिजीसियन सिर्फ एक है, वह भी जुलाना सीएचसी में तैनात है। ऑर्थो का भी जिला के चार नागरिक अस्पतालों पर एक ही चिकित्सक है, वह भी लंबे इंतजार के बाद कुछ दिन पहले ही नागरिक अस्पताल जींद में तैनात हुए हैं। इसके अलावा एमडी गायनी की भी स्थाई नियुक्ति नहीं है।
रेफर सेंटर बने अस्पताल
जिला के सभी नागरिक अस्पताल फिलहाल सिर्फ रेफर सेंटर बन कर रह गए हैं। दुर्घटना के मामलों में अधिकतर अस्पताल मरीजों को पीजीआई रोहतक या खानपुर ही रेफर करते हैं। अन्य मरीजों को भी अच्छा इलाज लेने के लिए हिसार, रोहतक, खानपुर या पटियाला का रूख करना पड़ता है।
नहीं मिलते चिकित्सक
नागरिक अस्पताल में इलाज की सुविधाएं नहीं हैं। चिकित्सकों की भारी कमी है। छुट्टी के दिन की तो छोड़ो, कार्य दिवस में भी सामान्य इलाज तक नहीं मिल पाता। यहां चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए।
कृष्ण कुमार पांचाल
नया भवन तो बना इलाज नहीं
भले ही सरकार ने नागरिक अस्पताल में नया भवन दे दिया है, लेकिन इलाज के लिए चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं है। मरीजों को भारी परेशानी होती है। अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। बाहर से महंगे टेस्ट करवाने पड़ते हैं।
विक्की
स्टाफ की कमी है
स्टाफ की कमी है। इसको लेकर सरकार को लिखा गया है। अभी कुछ चिकित्सकों के तबादले जींद हुए हैं, लेकिन पीजी परीक्षा के कारण कई चिकित्सक छुट्टी पर हैं। नए साल में यह चिकित्सक भी दोबारा ज्वाइन करेंगे। यहां तैनात स्टाफ की कार्यकुशलता बेहतर कर लोगों को बेहतर इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन