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गीत गाकर जारी रखा आंगनबाड़ी वर्कर्स ने धरना
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धरने पर बैठी आंगनबाड़ी वर्कर्स ने सरकार के खिलाप गाए गीत
अमर उजाला ब्यूरो
जींद । मांगों को लेकर धरना दे रहे आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बुधवार को भी अपना धरना जारी रखा। इस दौरान वर्कर्स ने सरकार विरोधी गीए गाए। लघु सचिवालय के बाहर ग्रीन बेल्ट में जिला कोषाध्यक्ष रमेश कुमारी के नेतृत्व में दिए जा रहे धरने में दर्जनभर आंगनबाड़ी वर्कर्स शामिल हुईं। जिला प्रधान सुमन ने कहा कि प्रदेश सरकार की हठधर्मिता के विरोध में धरना तब तक जारी रखा जाएगा जब तक मांगों की अधिसूचना नहीं लागू की जाती।
उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पढ़ी लिखी महिलाओं को हकों के लिए सड़कों पर बैठने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार घोषणाओं को लागू करने के लिए नहीं बल्कि लोगों को गुमराह करने के लिए करती है। 2018 में फरवरी और मार्च में प्रदेश की तमाम आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स ने अपनी लंबित मांगों के लिए आंदोलन किया था। इस आंदोलन में वर्कर्स एवं हेल्पर्स की कुछ मांगों को स्वीकार कर लिया गया था, पर उनमें से केवल दो ही मांगों को पूरा किया गया। इसके कारण आंगनबाड़ी वर्कर्स की अन्य सभी मांगे अधूरी लटकी हुई हैं। इसके कारण यह वर्कर्स सरकार के खिलाफ धरना देने को मजबूर हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद । मांगों को लेकर धरना दे रहे आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बुधवार को भी अपना धरना जारी रखा। इस दौरान वर्कर्स ने सरकार विरोधी गीए गाए। लघु सचिवालय के बाहर ग्रीन बेल्ट में जिला कोषाध्यक्ष रमेश कुमारी के नेतृत्व में दिए जा रहे धरने में दर्जनभर आंगनबाड़ी वर्कर्स शामिल हुईं। जिला प्रधान सुमन ने कहा कि प्रदेश सरकार की हठधर्मिता के विरोध में धरना तब तक जारी रखा जाएगा जब तक मांगों की अधिसूचना नहीं लागू की जाती।
उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पढ़ी लिखी महिलाओं को हकों के लिए सड़कों पर बैठने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार घोषणाओं को लागू करने के लिए नहीं बल्कि लोगों को गुमराह करने के लिए करती है। 2018 में फरवरी और मार्च में प्रदेश की तमाम आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स ने अपनी लंबित मांगों के लिए आंदोलन किया था। इस आंदोलन में वर्कर्स एवं हेल्पर्स की कुछ मांगों को स्वीकार कर लिया गया था, पर उनमें से केवल दो ही मांगों को पूरा किया गया। इसके कारण आंगनबाड़ी वर्कर्स की अन्य सभी मांगे अधूरी लटकी हुई हैं। इसके कारण यह वर्कर्स सरकार के खिलाफ धरना देने को मजबूर हैं।
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