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भाई की हत्या की गहवाही के लिए अदालत जा रहा महंत पुलिस से उलझा, बाद में अधिकारियों ने करवाया समझौता
Updated Sat, 10 Mar 2018 12:37 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
भाई की हत्या के मामले में अदालत में गवाही के लिए जा रहा गतौली गांव के एक महंत का पुलिस सुरक्षा को लेकर जुलाना थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह से विवाद हो गया। बाद में पुलिस अधिकारियों ने मध्यस्थता कर मामला शांत करवा दिया।
जुलाना थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह के अनुसार 2015 में महंत रणदीप के भाई की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में महंत रणदीप गवाह है। शुक्रवार को अदालत में पेश के लिए उन्हें पुलिस सुरक्षा की बीच अदालत लाना था। इसके लिए वे स्वयं सुबह 9:10 बजे महंत के घर पहुंच गए, लेकिन महंत सुबह 9:40 बजे घर से निकले तो अपनी निजी गाड़ी में बैठ गए। इस पर जब सुरक्षा कारणों से उन्हें सरकारी गाड़ी में बैठने को कहा गया तो उन्होंने मना कर दिया। ऐसे में पुलिस व महंत अलग-अलग गाडिय़ों में रवाना हुए। इस दौरान बीच में कई बार दोनों की गाड़ियों के बीच फासला भी हुआ। थाना प्रभारी के अनुसार जब यह मामला उन्होंने अदालत के समक्ष रखा तो अदालत ने दूसरी कोर्ट में मामला देने की सलाह दी। इस पर दूसरी कोर्ट में इसके फाइल लगाई गई। इससे महंत व उनके समर्थक भड़क गए।
बॉक्स
पुलिस की है जवाबदेही
थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह के अनुसार महंत की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की है और इसमें पुलिस कोई ढिलाई नहीं चाहती। सिर्फ सुरक्षा कारणों से ही उन्हें सरकारी गाड़ी में बैठने के लिए कहा गया था।
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राजनीतिक संरक्षण की धमकी
थाना प्रभारी का आरोप है कि इस दौरान महंत के साथ मौजूद एक व्यक्ति ने उनको लोकसभा में एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन नेता के नाम पर भी धमकी दी गई। बाद में अधिकारियों ने मध्यस्थता कर मामले को निपटा दिया।
यह मामला मेरे संज्ञान में आया था। इस पर महंत को कहा गया कि यदि पुलिस ने उनके साथ कोई गलत व्यवहार किया है तो वे शिकायत दे दें, लेकिन उन्होंने शिकायत देने से मना कर दिया। इस पर विवाद निपट गया।
-परमजीत सिंह समोता, डीएसपी।
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जींद।
भाई की हत्या के मामले में अदालत में गवाही के लिए जा रहा गतौली गांव के एक महंत का पुलिस सुरक्षा को लेकर जुलाना थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह से विवाद हो गया। बाद में पुलिस अधिकारियों ने मध्यस्थता कर मामला शांत करवा दिया।
जुलाना थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह के अनुसार 2015 में महंत रणदीप के भाई की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में महंत रणदीप गवाह है। शुक्रवार को अदालत में पेश के लिए उन्हें पुलिस सुरक्षा की बीच अदालत लाना था। इसके लिए वे स्वयं सुबह 9:10 बजे महंत के घर पहुंच गए, लेकिन महंत सुबह 9:40 बजे घर से निकले तो अपनी निजी गाड़ी में बैठ गए। इस पर जब सुरक्षा कारणों से उन्हें सरकारी गाड़ी में बैठने को कहा गया तो उन्होंने मना कर दिया। ऐसे में पुलिस व महंत अलग-अलग गाडिय़ों में रवाना हुए। इस दौरान बीच में कई बार दोनों की गाड़ियों के बीच फासला भी हुआ। थाना प्रभारी के अनुसार जब यह मामला उन्होंने अदालत के समक्ष रखा तो अदालत ने दूसरी कोर्ट में मामला देने की सलाह दी। इस पर दूसरी कोर्ट में इसके फाइल लगाई गई। इससे महंत व उनके समर्थक भड़क गए।
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पुलिस की है जवाबदेही
थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह के अनुसार महंत की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की है और इसमें पुलिस कोई ढिलाई नहीं चाहती। सिर्फ सुरक्षा कारणों से ही उन्हें सरकारी गाड़ी में बैठने के लिए कहा गया था।
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राजनीतिक संरक्षण की धमकी
थाना प्रभारी का आरोप है कि इस दौरान महंत के साथ मौजूद एक व्यक्ति ने उनको लोकसभा में एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन नेता के नाम पर भी धमकी दी गई। बाद में अधिकारियों ने मध्यस्थता कर मामले को निपटा दिया।
यह मामला मेरे संज्ञान में आया था। इस पर महंत को कहा गया कि यदि पुलिस ने उनके साथ कोई गलत व्यवहार किया है तो वे शिकायत दे दें, लेकिन उन्होंने शिकायत देने से मना कर दिया। इस पर विवाद निपट गया।
-परमजीत सिंह समोता, डीएसपी।