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परीसिमन के बाद बदले हुए राजनीतिक समीकरण में पहली बार जींद निवासी बना सांसद

Sat, 25 May 2019 12:08 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2019 12:08 AM IST
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परीसिमन के बाद बदले हुए राजनीतिक समीकरण में पहली बार जींद निवासी बना सांसद
जींद। 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए परीसिमन से घटी जींद जिला की राजनीतिक चौधर एक बार फिर लौट आई है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह का परिवार भी प्रदेश की सत्ता की रेंकिंग शीर्ष पर पहुंच गया है। नए राजनीतिक समीकरणों में चौधरी बीरेंद्र सिंह खुद केंद्रीय मंत्री हैं और उनकी पत्नी प्रेमलता उचाना कलां से विधायक हैं। अब उनके बेटा बृजेंद्र सिंह हिसार संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए हैं।
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परीसिमन से पहले हिसार लोस क्षेत्र में जींद जिला के आते थे चार विस क्षेत्र
दरअसल परीसिमन से पहले हिसार लोकसभा क्षेत्र में जींद जिला की खास पैठ रही है। परीसिमन से पहले हिसार लोकसभा क्षेत्र में जींद जिला के चार विधानसभा क्षेत्र आते थे। इनमें नरवाना, उचाना, जींद व राजौंद विधानसभा क्षेत्र शामिल थे, लेकिन 2009 का चुनाव परीसिमन के बाद हुआ तो राजनीतिक हिसाब से जींद की भौगोलिक स्थिति बदल चुकी थी। परीसिमन में नरवाना को सिरसा लोकसभा मेें जोड़ दिया गया, उचाना कलां को हिसार में और जींद, जुलाना व सफीदों को सोनीपत लोकसभा के साथ जोड़ दिया गया।
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राजौंद विधानसभा क्षेत्र समाप्त कर दिया गया। इसके साथ ही जींद जिला का राजनीतिक कद ऐसा घटा कि जींद मूल के नेता लोकसभा में जाने को तरस गए। हालांकि 2019 से पहले हुए 13 लोकसभा चुनाव में से आठ बार जींद के नेता हिसार लोकसभा से विजयी हुए। पहली बार 1977 में इंद्र सिंह श्योकंद सांसद बने और इसके बाद 1984 में बीरेंद्र सिंह, 1989 में जयप्रकाश, 1991 में मास्टर नारायण सिंह, 1996 में जयप्रकाश, 1998 में सुरेंद्र बरवाला, 1999 में सुरेंद्र बरवाला, 2004 में जयप्रकाश सांसद बने। इसके बाद अब 2019 में बृजेंद्र सिंह सांसद बने हैं।
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डूमरखां गांव में तीसरी बार लोकसभा की चौधर
डूमरखां गांव में तीसरी बार लोकसभा की चौधर आई है। इससे पहले 1977 में सांसद बने इंद्र सिंह श्योकंद भी इसी गांव से रहे हैं और 1984 में बीरेंद्र सिंह सांसद बने। अब बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह सांसद बने हैं।
चार सांसदों का जिला जींद
भले ही जींद जिला के लोग तीन-तीन लोकसभा में बंटे होने से नाराज हैं, लेकिन इसका फायदा यह है कि जींद को तीन-तीन सांसद भी मिलते हैं। साथ ही केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह राज्यसभा से सांसद हैं तो जींद में कुल चार सांसद हुए।
35 साल बाद बीरेंद्र सिंह के परिवार में फिर लोकसभा की चौधर
प्रदेश की राजनीति में अपना खास स्थान रखने वाले केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के परिवार में 35 साल बाद फिर लोकसभा की चौधर आई है। इससे पहले 1984 में वे खुद सांसद बने थे, लेकिन 1989 में जयप्रकाश से हार गए थे। हालांकि बीरेंद्र सिंह उचाना कलां से पांच बार विधायक बने हैं, लेकिन लोकसभा में एक बार ही पहुंचे।

राजनीतिक रूप से बहुत मजबूत हुआ डूमरखां
लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद डूमरखां गांव की खास राजनीतिक पहचान बन गई है। प्रदेश की राजनीति में ऐसे उदाहरण नहीं मिलते, जब एक परिवार में केंद्रीय मंत्री, सांसद व विधायक साथ हों।
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